कारोईकलां पंचायत गबन मामला: ₹37.44 लाख निजी खाते में ट्रांसफर पर अब न्यायालय पहुंचा प्रकरण, वीडीओ ओर थानाप्रभारी के खिलाफ कार्यवाही की मांग

पूर्व सरपंच, VDO और तत्कालीन थानाधिकारी के विरुद्ध FIR ओर ED जांच की भी मांग

गुरला:-(बद्री लाल माली)पंचायत समिति सुवाणा की ग्राम पंचायत कारोईकलां में ₹37.44 लाख के कथित गबन और नियम विरुद्ध पट्टा जारी करने का मामला अब न्यायालय तक पहुंच गया है। सामाजिक कार्यकर्ता गोटू सिंह राजपूत ने सक्षम न्यायालय में विस्तृत इस्तगासा प्रस्तुत किया है। न्यायालय ने मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर लिया है।

क्या था पूरा मामला
जिला परिषद को सौंपी गई जांच रिपोर्ट के अनुसार कारोईकलां पंचायत में दो बड़ीअनियमितताएं हुईं। दोबारा पट्टा जारी*: वर्ष 2012 में मिसल संख्या 59 के तहत जारी पट्टे की भूमि पर ही वर्ष 2019 में तत्कालीन सरपंच श्रीमती निर्मल कंवर राणावत और तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी भगवानसिंह ने गोपाललाल सूत्र के नाम नया पट्टा संख्या 42 जारी कर दिया। यह राजस्थान पंचायतीराज नियम 1996 के नियम 157 का उल्लंघन है। यह प्रकरण अभी न्यायालय में विचाराधीन है।

पंचायत निधि का निजी खाते में अंतरण :

जांच में पाया गया कि 29 सितंबर 2019 से 1 जनवरी 2020 के बीच ग्राम पंचायत के बैंक ऑफ बड़ौदा, सुवाणा शाखा खाता संख्या 11830100012081 से कुल ₹37,44,420 तत्कालीन सरपंच के निजी खाते में ट्रांसफर किए गए। इसमें ₹1,99,500 सरपंच मानदेय और ₹35,44,920 को निर्माण कार्य व श्रमिक भुगतान बताया गया। जांच समिति ने इसे वित्तीय अनियमितता और लेखा अभिलेखों में हेराफेरी माना है।

अपराध से अर्जित संपत्ति का आरोप

परिवाद में आरोप लगाया गया है कि पंचायत निधि से निजी खाते में गई राशि से उदयपुर में होटल का निर्माण किया गया। इस आधार पर न्यायालय से मांग की गई है कि प्रकरण की सूचना प्रवर्तन निदेशालय को भेजी जाए ताकि धन शोधन कानून के तहत अपराध से अर्जित संपत्ति की जांच हो सके।

पुलिस पर भी कार्रवाई की मांग

परिवादी ने बताया कि इस मामले में पहले पुलिस थाने में लिखित रिपोर्ट दी गई थी, लेकिन तत्कालीन थानाधिकारी द्वारा FIR दर्ज नहीं की गई। परिवाद में तत्कालीन थानाधिकारी के विरुद्ध भी भारतीय न्याय संहिता की धारा 199 में FIR दर्ज करने की मांग की गई है।
क्या मांग की गई। अधिवक्ता मुकेश कुमार शर्मा ने बताया कि न्यायालय से मांग की गई है कि जांच रिपोर्ट में दोषी पाए गए पूर्व सरपंच निर्मल कंवर और VDO भगवानसिंह के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम व भारतीय न्याय संहिता में FIR दर्ज हो। साथ ही सरकारी अभिलेखों में कूटरचना, गबन और आपराधिक विश्वासघात की निष्पक्ष विवेचना कराई जाए।पूर्व सरपंच निर्मल कंवर ने जांच के दौरान कहा था कि उस समय श्रमिकों के खाते नहीं थे इसलिए राशि निजी खाते में लेकर नकद भुगतान किया गया। फिलहाल न्यायालय में मामला विचाराधीन है।