गोपाल भील के परिवार को 50 लाख रुपये मुआवजा, सरकारी नौकरी एवं दोषियों पर गैर इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज करने की मांग

इंजीनियर रवि मीणा

कोटा :स्मार्ट हलचल|नगर निगम के ठेका कार्य के दौरान हुए दर्दनाक हादसे में श्रमिक गोपाल भील की सांड के हमले से हुई मृत्यु के विरोध में शुक्रवार को जिला कलेक्ट्रेट पर भील समाज एवं सर्वसमाज के लगभग 500 से अधिक लोगों ने प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री के नाम जिला प्रशासन के माध्यम से ज्ञापन सौंपा।पूर्व उप महापौर पवन मीणा के नेतृत्व में दिए गए ज्ञापन में मांग की गई कि स्वर्गीय गोपाल भील के परिवार को 50 लाख रुपये का आर्थिक मुआवजा, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी तथा परिवार को सभी पात्र सरकारी योजनाओं का तत्काल लाभ दिया जाए।

कार्यक्रम में विशेष आग्रह पर कांग्रेस नेता पुष्पेंद्र भारद्वाज ने भाग लेकर आंदोलन का समर्थन किया। इस अवसर पर प्रतापलाल मीणा अध्यक्ष ( आदिवासी जनजाति अधिकार मंच) पंचायत समिति सदस्य राजू भील (बूंदी), रामनाथ भील, धूलीचंद भील, पूर्व पार्षद सोनू भील, कर्मेन्द्र मीणा (जिला अध्यक्ष, एसटी प्रकोष्ठ, शहर जिला), छत्रभुज खींची (अध्यक्ष, डॉ. भीमराव अंबेडकर समिति), मंजू चौधरी, स्वर्गीय गोपाल भील के परिजन तथा कोटा शहर एवं आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में भील समाज के लोग उपस्थित रहे।

ज्ञापन में कहा गया कि गोपाल भील नगर निगम के ठेका कार्य के दौरान सफाई कार्य कर रहे थे। इसी दौरान एक आक्रामक एवं अनियंत्रित सांड श्रमिकों के बीच पहुंच गया और उसने गोपाल भील पर हमला कर दिया, जिससे उनकी मृत्यु हो गई। यह केवल एक दुर्घटना नहीं बल्कि गंभीर प्रशासनिक लापरवाही का मामला है।

ज्ञापन में प्रमुख मांगें रखी गईं—

* स्वर्गीय गोपाल भील के परिवार को 50 लाख रुपये का मुआवजा एवं परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए।
* घटना के लिए जिम्मेदार नगर निगम के संबंधित अधिकारी, सुपरवाइजर एवं अन्य जिम्मेदार कर्मचारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कर उनके विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की उपयुक्त धाराओं के अंतर्गत, यदि जांच में लापरवाही या दायित्व सिद्ध हो, तो गैर इरादतन हत्या सहित आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाए।
* जिस स्थान पर घटना हुई वहां सीसीटीवी कैमरे क्यों नहीं लगे थे, इसकी जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।
* यह जांच की जाए कि आक्रामक सांड को श्रमिकों के कार्यस्थल के बीच बिना नियंत्रण के कैसे पहुंचने दिया गया तथा इस संबंध में किसकी जिम्मेदारी बनती है।
* घटना के एक माह बाद भी पीड़ित परिवार को उचित राहत एवं सरकारी लाभ नहीं मिलना प्रशासन की संवेदनहीनता को दर्शाता है।
* भविष्य में किसी भी सरकारी विभाग में ठेका, संविदा या आउटसोर्स व्यवस्था के तहत कार्यरत कर्मचारियों के लिए दुर्घटना या मृत्यु की स्थिति में स्थायी नीति बनाई जाए, ताकि उन्हें नियमित सरकारी कर्मचारियों की तरह उचित मुआवजा, बीमा, सामाजिक सुरक्षा एवं अन्य सरकारी लाभ मिल सकें।

मीडिया को संबोधित करते हुए पवन मीणा ने कहा कि यह केवल गोपाल भील के परिवार की लड़ाई नहीं, बल्कि उन हजारों श्रमिकों की सुरक्षा और सम्मान की लड़ाई है जो प्रतिदिन अपनी जान जोखिम में डालकर सरकारी कार्यों का निष्पादन करते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि एक माह के भीतर सरकार ने मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो भील समाज एवं सर्वसमाज के सहयोग से उग्र जनआंदोलन किया जाएगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी सरकार एवं प्रशासन की होगी।