चंद्रप्रकाश टेलर
स्मार्ट हलचल|राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अंतर्गत गुरुवार को बांदनवाड़ा में भगवान श्री सत्यनारायण मंदिर परिसर के सामने भव्य हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में क्षेत्रभर से आए हजारों धर्मप्रेमियों की उपस्थिति से कस्बा पूर्णतः धार्मिक और भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो गया।
हिंदू सम्मेलन का शुभारंभ तुलसी मंगल कलश यात्रा एवं ऐतिहासिक त्रिवेणी संगम जल कलश यात्रा के साथ हुआ। त्रिवेणी संगम जल कलश यात्रा कस्बे के विभिन्न मंदिरों से होती हुई भगवान श्री सत्यनारायण मंदिर परिसर पहुंची, जहां वह विशाल धर्मसभा में परिवर्तित हो गई।
धर्मसभा को संबोधित करते हुए संतों ने दिया एकता का संदेश
धर्मसभा को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय निर्मोही अखाड़ा, अयोध्या हनुमानगढ़ी के महंत श्री श्री 108 सत्यनारायण दास जी महाराज ने कहा कि हिंदू समाज को संगठित होकर गौ माता की रक्षा करनी चाहिए। उन्होंने तिलक, माला और शिखा को हिंदू पहचान का महत्वपूर्ण प्रतीक बताया।
निर्मोही अखाड़ा के ही महंत श्री श्री 108 संतोष दास जी (शिक्षा शास्त्री) ने कहा कि सनातन संस्कृति सृष्टि के आरंभ से चली आ रही है और हिंदुस्तान में रहने वाला प्रत्येक व्यक्ति हिंदू है।
हिंदू धर्म संरक्षक ठाकुर वीरेंद्र सिंह राठौड़ ने कहा कि जो भारत भूमि को माता मानता है, वही सच्चा हिंदू है। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पृष्ठभूमि और समाजहित में किए जा रहे कार्यों पर भी प्रकाश डाला।
दुर्गा माई संगठन से पूजा साहू ने कुटुंब प्रबोधन पर जोर देते हुए संत परिवार में रहने और पाश्चात्य संस्कृति से दूरी बनाए रखने का आह्वान किया। वहीं वक्ता हनुमान सिंह ने गौ माता, गीता माता और धरती माता की रक्षा को हिंदू समाज का परम कर्तव्य बताया तथा धर्मांतरण व छुआछूत जैसी कुरीतियों का विरोध किया।
महामंडलेश्वर माता सती नंद गिरी जी रहीं विशेष रूप से उपस्थित
धर्मसभा में अंतर्राष्ट्रीय किन्नर अखाड़ा, उज्जैन की महामंडलेश्वर श्री श्री 1008 माता सती नंद गिरी जी महाराज विशेष रूप से उपस्थित रहीं। उनके साथ बांदनवाड़ा किन्नर आश्रम की पिंकी बुआ जी, सोनिया बुआ जी एवं सपना बुआ जी भी मंचासीन रहीं।
ऐतिहासिक त्रिवेणी संगम जल कलश यात्रा
मुख्य जल कलश यात्रा प्रातः 10 बजे रेलवे कॉलोनी स्थित नीलकंठ महादेव मंदिर से रवाना होकर कस्बे के प्रमुख मार्गों से होती हुई मंदिर परिसर पहुंची। इसके अलावा बाबा रामदेव मंदिर, रैगरान बस्ती, लक्ष्मी नारायण मंदिर, चारभुजा नाथ मंदिर, गोपीनाथ जी मंदिर, पंचायत वाले बालाजी, बड़ी स्कूल, गणगौर दरवाजा, कालका माता मंदिर प्रतापपुर सहित अनेक स्थानों से कलश यात्राएं निकाली गईं। इस दौरान विभिन्न देवी-देवताओं की भव्य झांकियां सजाई गईं, जिनका नागरिकों ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया।
आयोजकों के अनुसार आजादी के बाद बांदनवाड़ा में पहली बार इस प्रकार की ऐतिहासिक त्रिवेणी संगम जल कलश यात्रा का आयोजन हुआ।
महाप्रसादी में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
सम्मेलन के समापन पर महाप्रसाद का आयोजन किया गया, जिसमें पंडाल में लगभग 3000 धर्मप्रेमियों ने सहभागिता की तथा करीब 3000 भक्तों ने प्रसादी ग्रहण की।













