जिला न्यायाधीश का आदेश— UIT नोटिस पर आगे कार्रवाई नहीं करेगा, लेकिन पहले से सीज परिसर खोलने के निर्देश नहीं
भीलवाड़ा /स्मार्ट हलहल|जैन दिवाकर चरण साधना सेवा संस्थान और नगर विकास न्यास (UIT) के बीच चल रहे विवाद में जिला एवं सत्र न्यायाधीश अभय कुमार जैन ने गुरुवार को एक महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए यूआईटी को 27 फरवरी 2026 के नोटिस के आधार पर फिलहाल कोई नई कार्रवाई करने, संपत्ति को पुनः सीज करने अथवा मौके की यथास्थिति में बदलाव करने से रोक दिया है। हालांकि न्यायालय ने पहले से सीज किए गए परिसर को डी-सील (सील खोलने) का कोई आदेश नहीं दिया।
संस्थान की ओर से अधिवक्ता अमित कोठारी ने निचली अदालत के आदेश को चुनौती देते हुए कहा कि केवल यथास्थिति बनाए रखने का आदेश पर्याप्त नहीं है, क्योंकि यूआईटी नोटिस के आधार पर कार्रवाई कर सकता है। इस पर जिला न्यायाधीश अभय कुमार जैन ने अंतरिम निषेधाज्ञा के अंतिम निर्णय तक यूआईटी को नोटिस के आधार पर कार्रवाई नहीं करने के निर्देश दिए।
सुनवाई के दौरान संस्थान ने उपहारनामा, बिजली बिल, रसीदें और अन्य दस्तावेज पेश कर कब्जे का दावा किया, जबकि यूआईटी ने संपत्ति को पहले से सीज होना और संस्थान को अतिक्रमणकारी बताया। जिला न्यायाधीश जैन ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि संपत्ति के स्वामित्व, कब्जे की वैधता और दस्तावेजों की वास्तविकता का अंतिम निर्णय मूल वाद की सुनवाई के बाद ही होगा।
कानूनी जानकारों के अनुसार, न्यायालय ने पहले से सीज परिसर को खोलने संबंधी कोई स्पष्ट निर्देश नहीं दिए हैं। ऐसे में पूर्व में सीज किया गया क्षेत्र यथावत रहेगा। मामले को आगे की सुनवाई के लिए निचली अदालत को रिमांड कर दिया गया है। इससे संस्थान को नई कार्रवाई से तो राहत मिली है, लेकिन सीज परिसर खुलवाने के मामले में फिलहाल कोई राहत नहीं मिली।
