कठोर शब्द किसी के मन को घायल कर सकते है, जबकि मीठे शब्द टूटे हुए मन को जोड़ सकते है: प्रतिभा श्रीजी

ओम जैन

शंभूपुरा। स्मार्ट हलचल|जैन सिद्धान्ताचार्य प्रतिभा श्री जी मा.सा. ने सेंती स्थित शान्ति भवन मे अपने चातुर्मासिक काल मे प्रवचन के दौरान फरमाया कि आचार्य मान्तुग का कहना है कि मेरी वाणी से भगवान की भक्ति अपने आप हो रही है। कोकिल मधुर गाती है व बसन्त ऋतु में उसका कण्ठ माधुरी रस की वर्षा करने लगता है। भक्ति का संवेग जब भीतर से जाग जाता है तो मनोबल बढ़ जाता है। मधुर वचन ज्ञानी की पहचान है। मधुर वचन औषधी है व कटु वचन तीर के समान है। वास्तविक ज्ञान हमेशा विचारो वाणी व व्यवहार से दिखाई देता है। किसी के पास बहुत ज्ञान है किन्तु वाणी कठोर है तो वह ज्ञान अधूरा है। उन्होंने बताया कि सच्चा ज्ञानी वही है जिसकी वाणी मे मधुरता विनम्रता व करुणा हो। भगवान महावीर ने भी अहिंसा का सन्देश दिया। अहिंसा ज्ञान कर्म से नही बल्कि वाणी से भी होती है। कठोर शब्द किसी के मन को घायल कर सकते है, जबकि मीठे शब्द टूटे हुए मन को जोड़ सकते है।
साध्वी प्रेक्षा श्रीजी ने भी अपने प्रवचन से शांतिभवन में मौजूद सेकड़ो श्रावक श्राविकाओं को लाभान्वित किया।