13 साल फरार रहे करोड़ों की ठगी के आरोपी को हाईकोर्ट से झटका

114 निवेशकों से 10 करोड़ से अधिक की धोखाधड़ी का आरोप, गुजरात हाईकोर्ट ने खारिज की जमानत याचिका

अहमदाबाद /स्मार्ट हलचल|करोड़ों रुपये की निवेश ठगी के मामले में 13 वर्षों तक फरार रहे आरोपी को गुजरात हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। गुजरात हाईकोर्ट ने निवेश योजना के नाम पर सैकड़ों लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी करने के आरोपी अनिल शंकरलाल बिरला की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि आरोपी ने लंबे समय तक जांच में सहयोग नहीं किया और वर्षों तक फरार रहा, ऐसे में उसे राहत देने का कोई आधार नहीं बनता।
हाईकोर्ट में दायर याचिका में आरोपी की ओर से दलील दी गई थी कि मामले में चार्जशीट पेश हो चुकी है और अब उसे जेल में रखने का कोई औचित्य नहीं है। वहीं राज्य सरकार और मूल परिवादी की ओर से जमानत का कड़ा विरोध करते हुए कहा गया कि आरोपी पर गंभीर आर्थिक अपराध के आरोप हैं तथा उसने बड़ी संख्या में निवेशकों को ठगा है।
न्यायमूर्ति निखिल एस. करियल की एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि आरोपी ने वर्ष 2011 में निवेश योजना चलाकर लोगों से बड़ी रकम जमा करवाई, लेकिन रकम लौटाने के बजाय फरार हो गया। एफआईआर दर्ज होने के बावजूद आरोपी वर्ष 2025 में जाकर पुलिस के हत्थे चढ़ा। अदालत ने माना कि आरोपी का लगातार जांच से बचना और फरार रहना उसके खिलाफ सबसे बड़ा तथ्य है।
अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि आरोपी की अग्रिम जमानत याचिकाएं वर्ष 2012 और 2017 में भी खारिज हो चुकी थीं। इसके बावजूद वह वर्षों तक पुलिस और जांच एजेंसियों की पकड़ से बाहर रहा। आरोपी की गिरफ्तारी के लिए सीआरपीसी की धारा 70 के तहत वारंट तक जारी किए गए थे।
कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि आरोपी पर राजस्थान के भीलवाड़ा कोतवाली थाने और वडोदरा डीसीबी थाने में भी इसी प्रकार के आर्थिक अपराध दर्ज हैं। अदालत ने टिप्पणी की कि आरोपी पर वर्ष 2011 में करीब 228 लोगों से 71 लाख रुपये से अधिक की ठगी करने के आरोप भी सामने आए हैं। वर्तमान मामले में आरोपी पर 114 निवेशकों से लगभग 10 करोड़ 23 लाख 80 हजार रुपये की धोखाधड़ी करने का आरोप है। हाईकोर्ट ने कहा कि इतने बड़े पैमाने पर लोगों को ठगने और लंबे समय तक फरार रहने वाले आरोपी को न्यायालय की विवेकाधीन राहत नहीं दी जा सकती। इसके साथ ही अदालत ने जमानत अर्जी को खारिज कर दिया।