गृह मंत्री मामा नातुंग ने किसानों से कहा- प्राकृतिक खेती अपनाएं, आय बढ़ाने का यह सबसे प्रभावी माध्यम

पम्पोली में जनकल्याण शिविर में शामिल हुए गृह मंत्री, गांव-गांव जागरूकता अभियान चलाने के दिए निर्देश; पोल्ट्री, पिगरी और मत्स्य पालन के एकीकृत मॉडल की सराहना

पम्पोली (पूर्वी कामेंग)।स्मार्ट हलचल।राज्य के गृह मंत्री Mama Natung ने कहा कि प्राकृतिक एवं जैविक खेती केवल पर्यावरण संरक्षण का माध्यम नहीं है, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का सशक्त रास्ता भी है। उन्होंने अधिकारियों से जिले के सभी सर्किलों में ऐसे जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने का आह्वान किया, ताकि अधिक से अधिक किसान प्राकृतिक खेती की तकनीकों और सरकारी योजनाओं का लाभ उठा सकें।

गृह मंत्री पूर्वी कामेंग जिले के केवीके पम्पोली में जिला प्रशासन की ओर से आयोजित जनकल्याण शिविर को संबोधित कर रहे थे। देश में प्राकृतिक और जैविक खेती से जुड़ी पहलों के 12 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान, कृषि विशेषज्ञ, जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम में विधायक Ealing Tallang, उपायुक्त Yashashwini B. सहित कई गणमान्यजन उपस्थित रहे।

गृह मंत्री ने कहा कि प्राकृतिक खेती से उत्पादन लागत कम होती है, भूमि की उर्वरता बनी रहती है और किसानों को बेहतर गुणवत्ता की फसल प्राप्त होती है। उन्होंने किसानों से रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर निर्भरता कम करने तथा पारंपरिक और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों के समन्वय को अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार किसानों की आय दोगुनी करने और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं।

शिविर के दौरान कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को प्राकृतिक एवं जैविक खेती की विभिन्न तकनीकों, जैविक खाद निर्माण, प्राकृतिक कीट नियंत्रण और कम लागत वाली खेती के बारे में विस्तार से जानकारी दी। साथ ही किसानों को बताया गया कि प्राकृतिक खेती अपनाकर वे उत्पादन बढ़ाने के साथ बाजार में बेहतर मूल्य भी प्राप्त कर सकते हैं।

कार्यक्रम के बाद गृह मंत्री ने पोल्ट्री, पिगरी और मत्स्य पालन पर आधारित एकीकृत कृषि मॉडल का निरीक्षण किया। इस मॉडल में कृषि और पशुपालन को एक साथ जोड़कर आय के विभिन्न स्रोत विकसित किए गए हैं। निरीक्षण के दौरान उन्होंने किसानों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के मॉडल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

उन्होंने कहा कि अरुणाचल प्रदेश में कृषि और पशुपालन क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं तथा सरकार इन क्षेत्रों को आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षण के माध्यम से सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने किसानों से नई तकनीकों को अपनाने और सरकारी योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाने का आह्वान किया।

जनकल्याण शिविर में किसानों ने प्राकृतिक खेती से जुड़े अपने अनुभव साझा किए तथा विशेषज्ञों से विभिन्न विषयों पर मार्गदर्शन प्राप्त किया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को टिकाऊ कृषि पद्धतियों के प्रति जागरूक करना और प्राकृतिक खेती के माध्यम से आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाना रहा। ग्रामीण क्षेत्रों में प्राकृतिक एवं जैविक खेती को जन-आंदोलन बनाने की दिशा में यह शिविर एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।