श्मशान भूमि पर होटल-पेट्रोल पंप आवंटन प्रस्ताव से बढ़ा विवाद, विधायक के बेटे को भूमि आवंटन आवेदन पर उठे सवाल

ग्राम पंचायत ने श्मशान के लिए भेजा था प्रस्ताव, निर्णय लंबित रहने के बीच निजी आवंटन आवेदन बना चर्चा का विषय

सुरज वर्मा
स्मार्ट हलहल|बनेड़ा भीलवाड़ा-अजमेर राष्ट्रीय राजमार्ग से सटी ग्राम बेरों की आराजी संख्या 3131/2506 की भूमि को लेकर नया विवाद सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि जिस भूमि को ग्राम पंचायत ने श्मशान के लिए आरक्षित किए जाने का प्रस्ताव प्रशासन को भेजा था, उसी भूमि के एक हिस्से पर विधायक लालाराम बैरवा के बेटे के नाम होटल एवं पेट्रोल पंप स्थापित करने के लिए आवेदन प्रस्तुत किया गया। इस घटनाक्रम के बाद ग्रामीणों में नाराजगी है और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठने लगी है।
जानकारी के अनुसार संबंधित भूमि पर लंबे समय से श्मशान होने का दावा किया जाता रहा है। ग्राम पंचायत बेरों ने भी इस भूमि को श्मशान के रूप में आवंटित करने का प्रस्ताव प्रशासन को भेजा था, लेकिन उस प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय नहीं हो सका। इसी दौरान इसी आराजी के एक हिस्से के निजी उपयोग के लिए होटल एवं पेट्रोल पंप स्थापना का आवेदन सामने आने से विवाद गहरा गया।
पटवारी द्वारा तहसीलदार को भेजी गई रिपोर्ट के अनुसार आराजी संख्या 3131/2506 का कुल रकबा 0.5347 हेक्टेयर है। रिपोर्ट में भूमि को होटल एवं पेट्रोल पंप स्थापना के लिए उपयुक्त बताया गया है। साथ ही यह भी उल्लेख किया गया कि ग्राम पंचायत की ओर से इसी भूमि को श्मशान के लिए आवंटित करने का प्रस्ताव पहले ही भेजा जा चुका था, जिस पर अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भूमि भीलवाड़ा-अजमेर हाईवे से सटी हुई है तथा रेलवे लाइन से लगभग 800 मीटर की दूरी पर स्थित है। सड़क सीमा में आने वाले हिस्से को छोड़कर शेष भूमि को आवंटन योग्य माना गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि यह भूमि वर्षों से श्मशान के रूप में उपयोग में रही है और पंचायत ने भी इसके लिए प्रस्ताव पारित किया था, तो ऐसे में निजी उपयोग के लिए आवंटन की प्रक्रिया कई सवाल खड़े करती है। उनका कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि सार्वजनिक उपयोग के लिए प्रस्तावित भूमि पर निजी आवंटन का आवेदन किन परिस्थितियों में स्वीकार किया गया।