:- शीतल भवन की धर्मसभा में शिष्टाचार और प्रशंसक पर रविन्द्र मुनि ने दिया संदेश
राजेन्द्र बबलू पोखरना
कोटड़ी।स्मार्ट हलचल|स्थानीय शीतल भवन में चातुर्मास के दौरान आयोजित धर्मसभा के दौरान प्रवचन में मेवाड़ गौरव, प्रखर वक्ता परम पूज्य श्री रविन्द्र मुनि जी मसा ने शिष्टाचार, विनम्रता और प्रशंसा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मनुष्य की पहचान केवल उसके ज्ञान, धन या पद से नहीं बल्कि उसके व्यवहार और संस्कारों से होती है। व्यक्ति का मधुर व्यवहार ही उसके व्यक्तित्व को प्रभावशाली बनाता है।
मुनि ने कहा कि शिष्टाचार केवल अभिवादन करने तक सीमित नहीं है बल्कि दूसरों के प्रति सम्मान, संयमित वाणी, विनम्रता और सहयोग की भावना रखना भी शिष्टाचार है। हमारी वाणी और व्यवहार से सामने वाले के मन पर सकारात्मक या नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसलिए बोलने से पहले शब्दों का चयन और व्यवहार करने से पहले सामने वाले की भावनाओं का ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने प्रशंसा के विषय में कहा कि सच्ची प्रशंसा व्यक्ति के उत्साह और आत्मविश्वास को बढ़ाती है, लेकिन झूठी प्रशंसा अहंकार को जन्म दे सकती है। इसलिए प्रशंसा हमेशा गुणों की होनी चाहिए, व्यक्ति को खुश करने के लिए चापलूसी नहीं। इसी प्रकार जब कोई हमारी प्रशंसा करे तो उसमें अहंकार नहीं, बल्कि अपने भीतर और बेहतर बनने की प्रेरणा पैदा होनी चाहिए। वही रविन्द्र मुनि ने कहा कि परिवार, समाज और धार्मिक क्षेत्र में मधुर व्यवहार रखने वाला व्यक्ति सहज ही सबके हृदय में स्थान बना लेता है। सम्मान मांगने से नहीं, अपने आचरण से अर्जित किया जाता है। यदि जीवन में विनम्रता, शिष्टाचार और सद्भाव आ जाए तो अनेक विवाद स्वतः समाप्त हो सकते हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे अपने दैनिक जीवन में मीठी वाणी, विनम्र व्यवहार और निष्कपट प्रशंसा को अपनाएं तथा दूसरों के गुणों को देखकर उनसे प्रेरणा लें। यही संस्कार परिवार और समाज को मजबूत बनाने का आधार बन सकते हैं। इस दौरान चातुर्मास समिति के प्रवक्ता अविनाश लोढा, महिला मण्डल की मन्त्री सुनीता पोखरना व प्रवक्ता अनिता पोखरना ने गीतिका प्रस्तुत की। कार्यक्रम का मंच संचालन चातुर्मास समिति के अध्यक्ष शान्ति लाल पोखरना ने किया। सभा में भीलवाड़ा, बड़ा महुआ, नन्दराय, मांडलगढ़ सहित अन्य स्थानों के श्रावक-श्राविकाए उपस्थित थे।
