ठेकेदारों का भुगतान अटका तो JJM की रफ्तार थमी, बजट होने के बावजूद आवंटन नहीं; 11 अगस्त को CMR में होगा हिसाब

2024 से पहले के कामों की करोड़ों की देनदारी लंबित, 15 जुलाई तक 2 हजार करोड़ भुगतान का भरोसा भी अधूरा; 28 जुलाई के निर्देशों के बाद भी पुराने और पूर्णता के करीब कामों को नहीं मिली अपेक्षित गति

✍️ राकेश मीणा

जयपुर।स्मार्ट हलचल|सरकार का लक्ष्य है कि राजस्थान के हर घर तक नल पहुंचे, गांवों में पानी की समस्या दूर हो और जल जीवन मिशन (JJM) के जरिए वर्षों से अधूरी पेयजल परियोजनाएं पूरी हों। लेकिन जमीनी तस्वीर इस लक्ष्य के ठीक उलट सवाल खड़े कर रही है। ठेकेदारों के पुराने भुगतान अटके हैं, कई परियोजनाएं बंद या धीमी गति से चल रही हैं और उपलब्ध बजट के आवंटन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

भुगतान संकट अब इतना गहरा गया है कि ठेकेदार दोबारा आंदोलन की तैयारी में हैं। इसी बीच मुख्यमंत्री कार्यालय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए 11 अगस्त को CMR में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक बुलाई है। बैठक का पहला एजेंडा ही भुगतान में देरी से बंद, लंबित और धीमी गति से चल रही परियोजनाओं की समीक्षा है।

यानी अब सवाल केवल ठेकेदारों की जेब का नहीं है। सवाल उन गांवों का है, जहां पाइपलाइन तो पहुंची, लेकिन पानी नहीं पहुंचा; जहां टंकी बनी, लेकिन जलापूर्ति शुरू नहीं हुई; जहां काम पूर्णता के करीब है, लेकिन भुगतान के इंतजार में गति थम गई।

बजट आया, लेकिन मेजर प्रोजेक्ट को आवंटन कहां?

सबसे गंभीर सवाल बजट आवंटन को लेकर है। जानकारी के अनुसार पिछले माह वित्त विभाग से JJM के लिए करीब 1,000 करोड़ रुपए जारी किए गए। लेकिन इसमें से लगभग 250 करोड़ रुपए ही OTMP कार्यों के लिए आवंटित किए जाने की जानकारी सामने आई है।

राजस्थान में JJM की बड़ी पेयजल परियोजनाएं मेजर प्रोजेक्ट्स के माध्यम से संचालित हो रही हैं। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब बजट उपलब्ध है तो मेजर प्रोजेक्ट्स के लिए उसका अपेक्षित आवंटन क्यों नहीं हुआ?

बजट की फाइलें चलती रहें और जमीन पर पाइपलाइन, टंकियां और जलापूर्ति योजनाएं धीमी पड़ जाएं तो इसका खामियाजा आखिरकार आम ग्रामीण को ही भुगतना पड़ेगा।

मुख्य सचिव के निर्देश… फिर भी जमीन पर बदलाव क्यों नहीं?

28 जुलाई को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि उपलब्ध बजट को प्राथमिकता से पुराने और पूर्णता के करीब कार्यों पर लगाया जाए। उद्देश्य भी साफ था—जो योजनाएं वर्षों से अधूरी हैं, उन्हें पहले पूरा किया जाए ताकि सरकारी पैसा अधर में न रहे और जनता को जल्द पेयजल सुविधा मिल सके।

साथ ही हर घर नल कनेक्शन यानी FHTC लक्ष्य को गति देने के निर्देश दिए गए।

लेकिन सवाल यह है कि निर्देशों के बावजूद स्थिति में अपेक्षित बदलाव क्यों नहीं आया?

यदि बजट उपलब्ध है और पुराने कार्यों को प्राथमिकता देने के निर्देश भी हैं, तो फिर भुगतान और आवंटन की समस्या आखिर कहां अटक रही है?

15 जुलाई तक 2 हजार करोड़ भुगतान का भरोसा, तारीख निकल गई

ठेकेदारों की परेशानी का सबसे बड़ा कारण पुराने कार्यों का भुगतान है। ठेकेदारों के अनुसार सरकार के साथ बातचीत में 15 जुलाई तक करीब 2 हजार करोड़ रुपए का भुगतान करने का भरोसा दिया गया था।

15 जुलाई गुजर गई, लेकिन भुगतान को लेकर ठेकेदारों की परेशानी खत्म नहीं हुई।

ठेकेदारों ने अपने संसाधन लगाकर काम किए। सामग्री उधार ली, मजदूरों और उपठेकेदारों को भुगतान किया, मशीनरी लगाई। अब लंबे समय से सरकारी भुगतान अटकने से उनकी देनदारियां बढ़ती जा रही हैं।

ठेकेदारों का सवाल सीधा है—जब काम सरकार के आदेश पर हुआ और काम पूरा भी किया, तो भुगतान के लिए उन्हें बार-बार आंदोलन क्यों करना पड़ रहा है?

दस दिन जल भवन पर धरना दे चुके ठेकेदार

लंबित भुगतान और आठ सूत्रीय मांगों को लेकर PHED ठेकेदार जयपुर स्थित जल भवन में करीब दस दिन तक धरने पर बैठे थे। PHED मंत्री कन्हैया लाल चौधरी के हस्तक्षेप और आश्वासन के बाद आंदोलन स्थगित किया गया।

लेकिन भुगतान की समस्या पूरी तरह दूर नहीं होने से अब ठेकेदारों में फिर आक्रोश बढ़ रहा है। उनका कहना है कि यदि पुराने भुगतान नहीं हुए तो आंदोलन दोबारा शुरू किया जा सकता है।

भुगतान अटका तो काम कैसे दौड़ेगा?

JJM में ठेकेदार केवल निर्माण एजेंसी नहीं हैं। वे अपनी पूंजी लगाकर परियोजनाओं को जमीन पर उतारते हैं। पाइप, पंप, टंकी, मशीनरी, मजदूर—हर स्तर पर भुगतान की जरूरत होती है।

जब पिछले कार्यों की राशि ही नहीं मिलेगी तो ठेकेदार नए काम में पूंजी कैसे लगाएगा?

यही कारण है कि भुगतान संकट अब सीधे परियोजनाओं की गति से जुड़ गया है।

एक तरफ सरकार ‘हर घर जल’ की बात कर रही है, दूसरी तरफ भुगतान के अभाव में उन्हीं कार्यों को गति देने वाले ठेकेदार आर्थिक संकट में हैं। यह विरोधाभास अब सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।

मुख्यमंत्री-पीएचईडी मंत्री के प्रयासों के बाद विभागीय स्तर पर अड़चन?

JJM को गति देने और केंद्र से बजट उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और PHED मंत्री कन्हैया लाल चौधरी द्वारा केंद्र स्तर पर प्रयास किए जाने की बात सामने आई है।

यदि केंद्र और राज्य स्तर से राशि उपलब्ध कराने की कोशिशों के बाद भी विभागीय स्तर पर उसका समय पर आवंटन नहीं होता है, तो सवाल व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर उठना स्वाभाविक है।

पैसा उपलब्ध है तो फाइल क्यों रुकी है? फाइल चली है तो आवंटन क्यों नहीं हुआ? आवंटन हुआ है तो पुराने बिलों का भुगतान क्यों नहीं हुआ?

इन सवालों का जवाब अब 11 अगस्त की बैठक में तलाशा जाएगा।

CMR की बैठक में तीन विभागों की जवाबदेही

मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से 7 अगस्त को जारी पत्र के अनुसार बैठक में वित्त विभाग, PHED और जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे।

वित्त विभाग की विशिष्ट शासन सचिव शिवांगी स्वर्णकार, PHED के संयुक्त सचिव अरविन्द सारस्वत, जल संसाधन विभाग की संयुक्त सचिव अमृता चौधरी, मुख्य अभियंता राज सिंह चौधरी, देव राज सोलंकी, मुख्य अभियंता JJM भवानी सिंह शेखावत सहित अन्य अधिकारी बैठक में मौजूद रहेंगे।

जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता भुवन भास्कर और अमरजीत सिंह तथा PHED के वित्तीय सलाहकार एवं मुख्य लेखा अधिकारी ललित कुमार मोरोडिया भी बैठक में शामिल होंगे।

बीसलपुर-मोर सागर फीडर पर भी होगी चर्चा

बैठक में बीसलपुर से मोर सागर कृत्रिम जलाशय तक फीडर निर्माण कार्य भी एजेंडे में है। राजस्थान वॉटर ग्रिड कॉरपोरेशन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक रवि सोलंकी सहित संबंधित अधिकारियों को बैठक में बुलाया गया है।

इससे साफ है कि सरकार अब केवल भुगतान की शिकायत नहीं, बल्कि भुगतान से प्रभावित पूरी परियोजना व्यवस्था की समीक्षा करने जा रही है।

अब ठेकेदारों की नजर फैसले पर

11 अगस्त की बैठक ठेकेदारों के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वे लंबे समय से भुगतान की मांग कर रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि बैठक में केवल समीक्षा नहीं, बल्कि पुराने भुगतान की स्पष्ट समय-सीमा, उपलब्ध बजट के तत्काल आवंटन और अधूरे कार्यों को प्राथमिकता से पूरा कराने का निर्णय होगा।

क्योंकि बात केवल ठेकेदारों की आर्थिक परेशानी की नहीं है।

जिस ठेकेदार का भुगतान अटका है, उसकी मशीन रुकती है। मशीन रुकती है तो काम रुकता है। काम रुकता है तो गांव में पाइपलाइन नहीं बिछती। पाइपलाइन नहीं बिछती तो ‘हर घर जल’ का सपना अधूरा रह जाता है।

अब 11 अगस्त को CMR में होने वाली बैठक में यही तय होना है कि JJM की फाइलें तेज चलेंगी या फिर ठेकेदारों के भुगतान और बजट आवंटन का संकट राजस्थान के ‘हर घर जल’ अभियान की रफ्तार को और धीमा करेगा।