निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल, ग्रामीणों ने प्रशासन, खनिज विभाग व पुलिस से जांच कर सख्त कार्रवाई की उठाई मांग

निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल, ग्रामीणों ने प्रशासन, खनिज विभाग व पुलिस से जांच कर सख्त कार्रवाई की उठाई मांग

मांडलगढ़ (स्मार्ट हलचल/विशेष रिपोर्ट)

स्मार्ट हलचल|भीलवाड़ा जिले के मांडलगढ़ क्षेत्र में बनास नदी से अवैध बजरी खनन और परिवहन को लेकर एक बड़ा और गंभीर मामला सामने आया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि करीब 200 किलोमीटर दूर के खनन क्षेत्रों के नाम पर जारी रवन्नों (ट्रांजिट पास) का अनुचित उपयोग कर मांडलगढ़ की बनास नदी से प्रतिदिन 100 से अधिक ट्रक और ट्रैक्टर-ट्रेलर बजरी भरकर अलग-अलग जिलों में भेजे जा रहे हैं। यह महज अवैध खनन का मामला नहीं, बल्कि सरकार को करोड़ों रुपए के राजस्व का चूना लगाने वाला एक संगठित नेटवर्क बन चुका है।

फर्जी रवन्ने का खेल और सड़कें हो रहीं बदहाल

ग्रामीणों के अनुसार, बनास नदी के विभिन्न घाटों पर सुबह से लेकर देर रात तक अवैध रूप से बजरी भरने का काम बेधड़क जारी रहता है। भारी भरकम ओवरलोडेड वाहनों की निरंतर आवाजाही से क्षेत्र की ग्रामीण सड़कें पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। हवा में उड़ती धूल के कारण प्रदूषण चरम पर है और हादसों का अंदेशा लगातार बना रहता है। इसके बावजूद जिम्मेदार विभागों की ओर से कोई ठोस कार्रवाई न होने के कारण स्थानीय निवासियों में गहरा आक्रोश व्याप्त है।

निगरानी व्यवस्था और विभागीय प्रणाली पर सवाल

स्थानीय लोगों का साफ कहना है कि जिन रवन्नों के आधार पर बजरी का परिवहन किया जा रहा है, वे मांडलगढ़ क्षेत्र की खदानों के हैं ही नहीं। यदि रवन्ना किसी दूर-दराज के क्षेत्र के लिए जारी किया गया है, तो उसके दम पर मांडलगढ़ की बनास नदी से बजरी कैसे उठाई जा रही है? प्रतिदिन 100 से ज्यादा भारी वाहनों के निकलने के बाद भी जांच न होना प्रशासन की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था की पोल खोलता है। समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो बनास नदी का पर्यावरणीय संतुलन पूरी तरह बिगड़ सकता है।

🛑 मामले से जुड़े 4 प्रमुख सवाल:

  • क्या दूसरे क्षेत्र के लिए जारी रवन्नों पर मांडलगढ़ से बजरी का अवैध परिवहन हो रहा है?
  • प्रतिदिन भारी संख्या में निकल रहे ट्रकों-ट्रेलरों की मौके पर जांच क्यों नहीं की जा रही?
  • सरकार को हो रहे करोड़ों के राजस्व नुकसान की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
  • अवैध खनन व परिवहन पर स्थाई रोक लगाने के लिए संयुक्त जांच अभियान कब शुरू होगा?

ग्रामीणों ने की संयुक्त जांच और कार्रवाई की मांग

क्षेत्रवासियों ने जिला प्रशासन, खनिज विभाग और पुलिस प्रशासन से संयुक्त रूप से विशेष अभियान चलाकर इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करने की पुरजोर मांग की है। साथ ही रवन्नों की सत्यता (Geo-Verification) की जांच कर यह स्पष्ट करने का आग्रह किया है कि स्वीकृत खदान कौन सी है और परिवहन किस स्थान से किया जा रहा है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि इस अनियमितता में शामिल दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।