मूकदर्शक नहीं, मार्गदर्शकः वैश्विक संघर्षों के बीच भारत का ‘विश्व मित्र’ स्वरूप

शाश्वत तिवारी

नई दिल्ली।स्मार्ट हलचल|दुनिया जब दो मोर्चों पर खिंचे युद्ध के अंतहीन दौर से गुजर रही है, तब कूटनीति के गलियारों से शांति की सबसे मुखर आवाज एक बार फिर नई दिल्ली से गूंजी है। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर की सितंबर के पहले सप्ताह में हुई यूक्रेन और पोलैंड की आधिकारिक यात्रा महज एक द्विपक्षीय दौरा नहीं थी, बल्कि यह वैश्विक अशांति के बीच संवाद और कूटनीति की भारतीय प्रतिबद्धता का एक जीवंत दस्तावेज बनकर उभरी है। ऐसे समय में जब युद्ध की विभीषिका से वैश्विक अर्थव्यवस्था और मानवीय मूल्य कराह रहे हैं, भारत ने एक बार फिर दुनिया के सामने यह स्पष्ट कर दिया है कि युद्ध कभी भी किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकता।
यूक्रेन व पौलेंड दोनों देशों के साथ व्यापारिक रिश्तों को मजबूत बनाने के साथ ही डॉ. जयशंकर की इस यात्रा का सबसे बड़ा और केंद्रीय स्तंभ था, यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने की भारत की पुरजोर वकालत। कीव की धरती पर यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा के साथ टेबल पर बैठते ही डॉ. जयशंकर ने बिना किसी लाग-लपेट के युद्ध के विनाशकारी दुष्परिणामों को रेखांकित किया। भारत ने साफ कहा कि इस संघर्ष का असर सिर्फ यूरोप तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्लोबल साउथ के देशों पर इसका ईंधन, खाद्य और उर्वरक संकट के रूप में सीधा प्रहार हो रहा है।
भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार, जयशंकर ने अपने यूक्रेनी समकक्ष के समक्ष अपने वक्तव्य की शुरुआत करते हुए कहा मेरी इस यात्रा का मकसद बेशक दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूत करना है, लेकिन इससे भी अहम बात यह है कि यह यात्रा उस युद्ध के बड़े संदर्भ में हो रही है, जो 2022 से चल रहा है। भारत ने हमेशा यही कहा है कि यह दौर युद्ध का नहीं है और समाधान युद्ध के मैदान से नहीं निकलेंगे।
उन्होंने आगे कहा दो दिन पहले बिश्केक में, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि अब अंतहीन युद्ध की जगह युद्ध की समाप्ति होनी चाहिए। संघर्ष के हर बीतते दिन का मतलब है और ज़्यादा मौतें और और ज़्यादा तबाही। ज़ाहिर है, इसका रास्ता संबंधित पक्षों को ही खोजना होगा। लेकिन, अगर भारत किसी भी तरह से मदद कर सकता है, तो हम तैयार हैं और विदेश मंत्री सिबिहा के साथ मेरी अब तक की बातचीत का मुख्य बिंदु यही था।
वहीं दूसरी ओर, पौलेंड पहुंचे जयशंकर ने उप-प्रधानमंत्री व विदेश मंत्री राडोस्लाव सिकोरस्की के साथ व्यापार एवं निवेश में और बढ़ोतरी करने पर चर्चा करने के साथ ही यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने पर विशेष जोर दिया। विदेश मंत्रालय के अनुसार, उन्होंने कहा भारत का मानना है कि कभी न खत्म होने वाले युद्ध की जगह युद्ध को खत्म करने की कोशिश होनी चाहिए। ऐसे युद्धों में कोई नहीं जीतता। इस संघर्ष को खत्म करने के लिए दूसरों की कोशिशों का समर्थन करना चाहिए। भारत का यह पक्का विश्वास है और हम इसी दिशा में काम कर रहे हैं।
भारत कई अंतरराष्ट्रीय मंचों से यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने की वकालत करता रहा है। भारत की ओर से अब तक मानवीय मदद के तौर पर यूक्रेन को 19 खेपें भेजी गई हैं, जिनमें 160 टन सामान शामिल है। ऐसे नाजुक समय में, जब एक तरफ अमेरिका-इजरायल एवं ईरान के बीच तनाव कायम है और रूस-यूक्रेन में संघर्ष कम होने का नाम नहीं ले रहा है, डॉ. जयशंकर का यह तीन दिवसीय दौरा यह साबित करता है कि भारत आज वैश्विक राजनीति में मूकदर्शक नहीं, बल्कि एक सक्रिय ‘विश्व मित्र’ की भूमिका में है।