चित्तौड़गढ़। स्मार्ट हलचल।पूर्व राज्यमंत्री सुरेंद्रसिंह जाड़ावत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्र की भारतीय जनता पार्टी सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि उज्ज्वला योजना के तहत रियायती गैस सिलेंडरों की वार्षिक सीमा 9 से घटाकर 4 करना गरीब एवं मध्यम वर्गीय परिवारों के साथ अन्याय है। यह निर्णय साबित करता है कि केंद्र सरकार को आमजन की परेशानियों और महंगाई से जूझ रहे परिवारों की कोई चिंता नहीं है।
जाड़ावत ने कहा कि एक ओर रसोई गैस, खाद्य सामग्री और दैनिक उपयोग की वस्तुओं के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सरकार गरीब महिलाओं को मिलने वाली राहत में कटौती कर रही है। उज्ज्वला योजना का उद्देश्य महिलाओं को धुएं से मुक्ति दिलाना और उन्हें स्वच्छ ईंधन उपलब्ध कराना था, लेकिन अब रियायती सिलेंडरों की संख्या कम कर सरकार स्वयं अपने उद्देश्य से पीछे हटती दिखाई दे रही है।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए वर्ष में केवल चार रियायती सिलेंडर पर्याप्त नहीं हैं। इससे लाखों परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा और कई परिवार पुनः पारंपरिक ईंधन का उपयोग करने को मजबूर हो सकते हैं। यह निर्णय गरीब महिलाओं के स्वास्थ्य और सम्मान दोनों पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला है।
पूर्व राज्यमंत्री ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार बड़े-बड़े विज्ञापनों और प्रचार के माध्यम से गरीब हितैषी होने का दावा करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर लिए जा रहे निर्णय गरीबों को राहत देने के बजाय उनकी परेशानियां बढ़ाने वाले साबित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि महंगाई, बेरोजगारी और बढ़ते घरेलू खर्चों के बीच यह फैसला आमजन के साथ अन्याय है।
जाड़ावत ने केंद्र सरकार से मांग की कि उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए रियायती सिलेंडरों की पूर्व व्यवस्था बहाल की जाए तथा गैस सिलेंडर के बढ़ते दामों पर नियंत्रण कर गरीब एवं मध्यम वर्गीय परिवारों को राहत प्रदान की जाए। उन्होंने कहा कि जनता अब केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि वास्तविक राहत चाहती है।
