94 बच्चों का स्कूल सिर्फ दो कमरों के भरोसे, बरामदा बना ‘क्लासरूम’

94 बच्चों का स्कूल सिर्फ दो कमरों के भरोसे, बरामदा बना ‘क्लासरूम’

एक कमरे में आंगनबाड़ी, बाकी दो में पढ़ाई के साथ पोषाहार का सामान और कार्यालय; बारिश में कहां बैठें बच्चे?

अलकेश पारीक

जहाजपुर, स्मार्ट हलचल। एक ओर सरकारी विद्यालयों में बेहतर सुविधाओं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के दावे किए जा रहे हैं, वहीं जहाजपुर क्षेत्र के मनोहरपुरा पीओ क्षेत्र स्थित बकली की झोपड़ियां विद्यालय की तस्वीर बुनियादी सुविधाओं की कमी उजागर कर रही है। विद्यालय में 94 विद्यार्थियों का नामांकन और 6 शिक्षक हैं, लेकिन बच्चों की पढ़ाई के लिए पर्याप्त कमरे तक उपलब्ध नहीं हैं।

विद्यालय में कुल तीन कमरे हैं। इनमें से एक कमरे में आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हो रहा है, जहां करीब 20 बच्चों का नामांकन बताया गया है। ऐसे में विद्यालय के 94 विद्यार्थियों के लिए महज दो कमरे बचते हैं।

दो कमरे… पढ़ाई भी, सामान भी और कार्यालय भी!

स्थिति यह है कि शेष दो कमरों में ही बच्चों की कक्षाएं संचालित करने के साथ पोषाहार का सामान रखने और विद्यालय के कार्यालय संबंधी कार्यों की व्यवस्था करनी पड़ रही है। विद्यालय में अलग पोषाहार कक्ष भी नहीं है। जगह की कमी के कारण बच्चों को विद्यालय के बरामदे में बैठाकर पढ़ाई करवानी पड़ रही है।

बारिश के मौसम ने बढ़ाई परेशानी

सबसे गंभीर सवाल मौजूदा बारिश के मौसम को लेकर है। बरामदे में बैठकर पढ़ने वाले बच्चों को बारिश और तेज हवा के दौरान परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। पर्याप्त कक्षा-कक्ष नहीं होने से शिक्षकों के सामने भी सभी कक्षाओं को व्यवस्थित रूप से संचालित करने की चुनौती बनी हुई है।

94 विद्यार्थी, 6 शिक्षक और पढ़ाई के लिए सिर्फ दो कमरे
विद्यालय के आंकड़े ही हालात की गंभीरता बताने के लिए काफी हैं—नामांकन 94, शिक्षक 6, कुल कमरे 3 और उनमें भी एक आंगनबाड़ी के उपयोग में।

सवाल यह है कि जब बच्चों के बैठने के लिए पर्याप्त कक्षा-कक्ष ही नहीं हैं तो बेहतर शैक्षणिक माहौल कैसे उपलब्ध कराया जाएगा?
स्थानीय स्तर पर आवश्यकता है कि शिक्षा विभाग विद्यालय की स्थिति का निरीक्षण कर अतिरिक्त कक्षा-कक्ष एवं अलग पोषाहार कक्ष की व्यवस्था करवाए, ताकि बच्चों को बरामदे के बजाय सुरक्षित कक्षाओं में बैठकर पढ़ने की सुविधा मिल सके।

बड़ा सवाल: बारिश के बीच अगर बरामदे में भी बच्चों को बैठाना संभव न हो तो 94 विद्यार्थियों की कक्षाएं आखिर लगेंगी कहां