विशेष रिपोर्ट-आकाश शर्मा
निंबाहेड़ा । स्मार्ट हलचल|नगर परिषद निंबाहेड़ा के पिछले कार्यकाल में हुआ एक समझौता आज आमजन के लिए जी का जंजाल और ‘ब्लैक स्पॉट’ बन चुका है। पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष सुभाष चंद्र शारदा के समय जेके सीमेंट समूह और नगरपालिका के बीच एक एमओयू (MoU) हुआ था, जिसके तहत पुराने चुंगी नाके से लेकर जेके चौराहा तक की सड़क का नाम जेके सीमेंट समूह के स्व. यदुपति सिंघानिया के नाम करने का निर्णय लिया गया। इसके एवज में जेके सीमेंट ने नगरपालिका को 4 करोड़ 44 लाख रुपये दिए, जिससे रोड और डिवाइडर का निर्माण हुआ । सहमति के मुताबिक जेके सीमेंट समूह को डिवाइडर पर पौधे लगाने, 5 साल तक उनके रखरखाव और सड़क में किसी भी टूट-फूट की मरम्मत का जिम्मा दिया गया था । लेकिन बड़ा सवाल यह उठता है कि जिस सड़क और चौराहे को उद्योग समूह अपने नाम से पहचान दे रहा है, क्या उसे हादसों का अड्डा बनने से रोकना उसका सामाजिक दायित्व और नैतिक फर्ज नहीं है ?
डिजाइन की भूल या दूरदर्शिता की कमी !
नेतृत्व और योजनाकारों की दूरदर्शिता पर आज गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं । यदि तत्कालीन नगरपालिका अध्यक्ष सुभाष चंद्र शारदा और जेके प्रबंधन ने उस वक्त जनहित को सर्वोपरि रखा होता, तो इस चौराहे की बनावट ऐसी खतरनाक न होती ।अंधा मोड़ और रॉन्ग साइड का खतरा होने के बाद भी राहगीरों को इस मार्ग से गुजरना पडता है वर्तमान में जेके चौराहे का मोड़ ऐसा है कि दोनों तरफ से आने-जाने वाले वाहनों को सामने से आती गाड़ियाँ बिल्कुल दिखाई नहीं देतीं । सही रास्ता और सीधा कट न होने के कारण आम वाहन चालकों को मजबूरन ‘रॉन्ग साइड’ जाना पड़ता है । यह तो गनीमत है कि स्थानीय लोग और वाहन चालक अत्यंत सतर्कता और धीमी गति से गाड़ियाँ चलाते हैं, जिससे आए दिन होने वाले संभावित बड़े हादसे टल जाते हैं। लेकिन हर बार किस्मत साथ नहीं देती!
समाधान आसान, बस ‘नीयत’ की जरूरत !
इस जानलेवा तिराहे को एक सुरक्षित और चौड़े चौराहे में बदलने का समाधान बेहद सीधा और व्यावहारिक है। जेके सीमेंट समूह के ‘रीजनल ट्रेनिंग सेंटर (RTC / ITI)’ के बाहर उसकी अपनी जमीन पड़ी हुई है । यदि जेके समूह जनहित में इस जमीन में से मात्र कुछ फीट हिस्सा प्रशासन को दे दे, तो सड़क को बिल्कुल सीधा निकाला जा सकता है । सड़क सीधी होते ही गाड़ियों को घुमावदार अंधा मोड़ नहीं लेना पड़ेगा और रॉन्ग साइड जाने की मजबूरी खत्म हो जाएगी । सीधा रोड बनने से दृश्यता साफ होगी, जिससे दुर्घटनाओं का अंदेशा हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा।
सवाल प्रशासन और जेके प्रबंधन से !
कब तक निंबाहेड़ा की जनता जेके सीमेंट और तत्कालीन प्रशासन की इस बड़ी भूल और लापरवाही का शिकार होती रहेगी ? 4.44 करोड़ रुपये का राजस्व बड़ा है या बेकसूर आम नागरिकों की अनमोल जिंदगी ? यदि जेके सीमेंट समूह अपनी थोड़ी सी जमीन प्रशासन को सौंपकर इस सड़क को सीधा बनवाने में पहल करता है, तो न केवल आए दिन होने वाले हादसों से लोगों की जान बचेगी, बल्कि आमजन के दिलों में जेके समूह और स्थानीय प्रशासन का सम्मान कई गुना बढ़ जाएगा । अब देखना यह है कि प्रशासन और जेके सीमेंट प्रबंधन इस गंभीर समस्या पर कब जागते हैं या फिर किसी बड़े हादसे का इंतजार करते हैं !