जज ने लिखा-मरना पसंद, डरपोक कहलाना नहीं:अब तक 36 को फांसी की सजा दी

‘मैं मरना पसंद करूंगा, डरपोक जज कहलवाना पसंद नहीं करूंगा। जब तक मैं अपने सिद्धांतों पर चलता हूं, तब तक सर्विस करूंगा, अन्यथा त्यागपत्र दे दूंगा। जब तक मैं जज की कुर्सी पर हूं तो फैसला लेने का अधिकार भी एकमात्र मेरा होगा मुझे पश्चिम के एक माफिया/गैंगस्टर द्वारा यह संदेश भी भिजवाया गया कि अभी तो सिर्फ पत्रावलियां हटवाई गई हैं, अगर मेरे पीछे पड़े तो जिले से बाहर ट्रांसफर करवा देंगे।’ मुजफ्फरनगर के अपर जिला और सत्र न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने एक अहम फैसले में यह बात लिखी है। उन्होंने दहेज हत्या के दोषी नदीम को फांसी की सजा सुनाई है। नदीम ने अपनी बीवी को जिंदा जला दिया था।

माफिया-गैंगस्टर की धमकी मिली

जज दिवाकर पिछले पांच महीने में 10 चर्चित मामलों में 23 दोषियों को फांसी की सजा सुना चुके हैं। न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने फैसले में कहा है कि पश्चिम यूपी के माफिया, गैंगस्टरों ने उनसे संपर्क करके संदेश भिजवाया है कि उनके पीछे पड़ा तो वे कोर्ट बदलवा देंगे या जिले से बाहर ट्रांसफर करवा देंगे। उन्होंने कहा है कि, मैं मरना पसंद करूंगा, डरपोक जज कहलाना नहीं।

अपराधियों के दबाव में काम किया तो न्यायपालिका पर भरोसा कमजोर होगा

जज रवि कुमार दिवाकर ने कस्बा शाहपुर में आठ साल पहले घरेलू विवाद में जिंदा जलाई गई 23 साल की शहजादी के पति नदीम को फांसी की सजा सुनाई। उन्होंने इस फैसले में अपने ऊपर उठ रहे सवालों का भी जवाब दिया। उन्होंने फैसले में लिखा, मेरे माता-पिता ने भगवान के सिवा किसी अन्य से नहीं डरने की शिक्षा दी है। यदि न्यायाधीश बाहुबलियों, माफिया या अपराधियों के दबाव में काम करने लगे तो जनता का न्यायपालिका पर भरोसा कमजोर होगा। यदि मैं ऐसी शक्तियों से भयभीत हो जाऊंगा तो मेरे लिए न्यायिक संस्था से इस्तीफा देना ही उचित होगा।

जज दिवाकर ने शहजादी को जिंदा जलाने के मामले में शौहर नदीम को फांसी की सजा सुनाई। उन्होंने वादी के पिता सहित अन्य गवाहों के बयान बदलने के बावजूद मजिस्ट्रेट को मृत्यु पूर्व दिए गए बयान के आधार पर यह सजा सुनाई। उन्होंने फैसले में लिखा, अबला नारी को जिंदा जलाने वाला सहानुभूति का हकदार नहीं है। उन्होंने हत्या के दोषी नदीम पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

जज दिवाकर ने 17 साल में 36 अपराधियों को मृत्युदंड दिया

रवि कुमार दिवाकर ने जज के रूप में अपनी 17 साल की सेवा में अलग-अलग गंभीर मामलों में दोषी 36 अपराधियों को फांसी की सजा सुनाई है। मुजफ्फरनगर में उन्होंने पांच महीने में 10 मामलों में 23 दोषियों को मौत की सजा दी है। इसी बीच जिला एवं सत्र न्ययाधीश ने उनकी अदालत से करीब 100 मुकदमों को रिकॉल कर लिया लिया था। यह मामले दूसरे न्यायालयों में ट्रांसफर कर दिए गए थे। जज रवि कुमार दिवाकर ने 29 नवंबर 2025 को मुजफ्फरनगर में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश का कार्यभार संभाला था।