डीएपी आपूर्ति के लिए कलेक्टर टोंक ने कृषि आयुक्त को लिखा पत्र-15 सितंबर को किसान महापंचायत प्रतिनिधिमंडल से दूसरे चरण की वार्ता

5 तहसीलों के 8 जीएसएस पर किसानों का अनिश्चितकालीन धरना-दोपहर 2 बजे बाद स्थगित; 21 सितंबर से फिर बड़े आंदोलन की चेतावनी

शिवराज बारवाल मीना
टोंक। स्मार्ट हलचल|जिले में डीएपी उर्वरक की कमी को लेकर किसानों का आंदोलन तेज होने के बीच जिला कलेक्टर टीना डाबी ने कृषि आयुक्त, राजस्थान नरेश कुमार गोयल को डीएपी की अतिरिक्त आपूर्ति के लिए डीओ लेटर भेजा है। कलेक्टर ने जिले में 5,000 से 7,000 मीट्रिक टन अतिरिक्त डीएपी उपलब्ध करवाने की मांग की है। यह मात्रा लगभग 1 लाख से 1.40 लाख बैग के बराबर है। किसानों की मांग और आगामी सरसों की बुवाई को देखते हुए कलेक्टर ने पत्र में बताया कि जिले में वर्तमान में खुदरा विक्रेताओं के पास करीब 22 मीट्रिक टन तथा थोक विक्रेताओं के पास करीब 11 मीट्रिक टन डीएपी उपलब्ध है। जिले में लगभग 3.30 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सरसों की बुवाई होती है, जो कुल बुवाई क्षेत्र का करीब 75 प्रतिशत है। सरसों की बुवाई सितंबर के अंतिम सप्ताह से अक्टूबर के द्वितीय सप्ताह तक होती है।
जिला कलेक्टर ने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि वर्तमान में किसानों द्वारा डीएपी का उपयोग सरसों की फसल के लिए किया जा रहा है। जिले के कुछ क्षेत्रों में बारिश के कारण खेत खाली होने लगे हैं और इस समय बारिश होने से किसान बड़े क्षेत्रफल में सरसों की बुवाई की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में डीएपी की मांग लगातार बढ़ने की संभावना है।
*21 सितंबर से बड़े आंदोलन की चेतावनी*
किसान महापंचायत ने चेतावनी दी है कि यदि टोंक जिले में डीएपी की पर्याप्त आपूर्ति नहीं हुई तो 21 सितंबर से फिर से तीन गुना ग्राम सेवा सहकारी समितियों पर अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू किया जाएगा। आंदोलन के अगले चरण में जिले की 10 तहसीलों की 21 जीएसएस का चयन किए जाने की बात कही गई है।
किसानों ने डीएपी संकट को आगामी पंचायत राज चुनावों में प्रमुख मुद्दा बनाने की चेतावनी देते हुए नारा दिया है—
“डीएपी उर्वरक नहीं तो वोट नहीं”
किसान महापंचायत के प्रतिनिधिमंडल के साथ 15 सितंबर को दूसरे चरण की वार्ता प्रस्तावित है।
पांच तहसीलों के आठ जीएसएस पर धरना
डीएपी की उपलब्धता की मांग को लेकर मुण्डिया, बहड़, खण्डवा, पासरोटिया, गणेती, नगरफोर्ट, चंदलाई और अरणयाकेदार स्थित जीएसएस पर किसानों ने धरना दिया। धरने को मंगलवार 8 सितंबर दोपहर 2 बजे बाद स्थगित किया गया। इन धरना स्थलों पर किसानों को संबोधित करते हुए आंदोलनकारियों ने डीएपी की पर्याप्त एवं समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग उठाई। धरना स्थलों की जिम्मेदारी संभालने वालों में मुण्डिया से शंकरलाल मीणा, बहड़ से मोहनलाल खोड़ा, खण्डवा से राजाराम पहाड़ी, पासरोटिया से रामकरण जाट, गणेती से रतन खोखर, नगरफोर्ट से प्रहलाद सुवालका, चंदलाई से सावंरलाल रुस्तमगंज तथा अरणियाकेदार से मोहन खेड़ा शामिल रहे।
*कृषि विभाग करेगा कार्रवाई, दुकानों पर रेट लिस्ट और अधिकारियों के नंबर होंगे प्रदर्शित*
कृषि विभाग की ओर से खाद-बीज विक्रेताओं के खिलाफ भी निगरानी बढ़ाने की बात कही गई है। कोई भी खाद-बीज विक्रेता बिना बिल के उत्पाद का वितरण नहीं कर सकेगा। सभी खाद-बीज विक्रेताओं की दुकानों पर कृषि अधिकारियों के मोबाइल नंबर प्रदर्शित किए जाएंगे तथा खाद-बीज की रेट लिस्ट भी अनिवार्य रूप से प्रदर्शित की जाएगी।
*यूरिया की किल्लत को लेकर होगी मजिस्ट्रेट स्तर की जांच*
जिले में यूरिया की उपलब्धता को लेकर वर्ष 2017 में हुई एक बड़ी तकनीकी/रिकॉर्ड संबंधी गड़बड़ी का मामला भी सामने आया है। बताया गया है कि भूलवश 4,262.55 मीट्रिक टन यूरिया खुदरा व्यापारी शंकर खाद-बीज भंडार, ककोड़ की POS मशीन में दर्ज हो गया था। इस मामले की तथ्यात्मक रिपोर्ट तैयार करने के लिए मजिस्ट्रेट स्तर की जांच करवाकर राजस्थान सरकार को रिपोर्ट भेजी जाएगी। इसके आधार पर भारत सरकार के उर्वरक मंत्रालय से रिकॉर्ड में दर्ज गलत यूरिया को सही करवाने की कार्रवाई की जाएगी।
*आंदोलन की अगुवाई कर रहे किसान महापंचायत के युवा प्रदेशाध्यक्ष*
आंदोलन की अगुवाई किसान महापंचायत के युवा प्रदेशाध्यक्ष रामेश्वर प्रसाद चौधरी कर रहे हैं। उन्होंने सभी धरना-प्रदर्शन स्थलों की निगरानी के साथ प्रशासन से समन्वय स्थापित किया। आंदोलन में प्रदेश मंत्री रतन खोखर, जिला अध्यक्ष गोपी लाल डोडवाडी, जिला उपाध्यक्ष सीताराम खादवाल, निवाई तहसील अध्यक्ष दशरथ सिंह चौहान, उनियारा तहसील अध्यक्ष भवानी शंकर, पीपलू तहसील अध्यक्ष दुल्लाराम प्रजापत सहित शिवजीराम चौधरी, पूर्ण बैरवा, नमोनारायण मीणा, जगदीश बैरवा, मुकेश मीणा, कमलेश चौधरी, भवानी मीना, नाथूलाल उप सरपंच बिडोली, खेमराज मीणा, गोपाल जाट पराना, केदार धाबाई पूर्व सरपंच बहड़, बाबूलाल मीणा, गिर्राज देगड़ा, रामदयाल, राधाकृष्ण मीणा, दयाराम सहित सैकड़ों पदाधिकारियों ने भूमिका निभाई।