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अजमेर दरगाह में खादिम लाइसेंस प्रक्रिया पर असमंजस, अंतिम तारीख से पहले भी एक भी आवेदन नहीं

(हरिप्रसाद शर्मा )

अजमेर/ स्मार्ट हलचल| अजमेर स्थित ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह में खादिमों को लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही है। दरगाह कमेटी की अधिसूचना के अनुसार आवेदन की अंतिम तारीख 5 जनवरी 2026 तय की गई है, लेकिन अब तक नाजिम कार्यालय में एक भी आवेदन जमा नहीं हुआ है। अंतिम तारीख नजदीक होने के बावजूद प्रक्रिया ठप नजर आ रही है।

करीब तीन हजार खादिम प्रक्रिया से जुड़े
दरगाह में खादिमों की दो प्रमुख अंजुमनें सक्रिय हैं। अंजुमन सैयद जादगान के लगभग 2200 और अंजुमन शेखजादगान के करीब 800 सदस्य बताए जा रहे हैं। कुल मिलाकर लगभग तीन हजार खादिम इस लाइसेंस प्रक्रिया से प्रभावित हैं। इन दोनों अंजुमनों ने पहले ही इस निर्णय का विरोध दर्ज कराया था, जिसका असर आवेदन प्रक्रिया पर साफ दिखाई दे रहा है।

कानूनी आदेशों के अनुपालन का दावा
दरगाह नाजिम मोहम्मद बिलाल खान ने जारी विज्ञापन में स्पष्ट किया था कि यह लाइसेंस प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के आदेशों, केंद्र व राज्य सरकार की गाइडलाइंस, जिला प्रशासन तथा दरगाह सुरक्षा अंकेक्षण रिपोर्ट के अनुरूप शुरू की गई है। उनके अनुसार यह व्यवस्था केवल सैयद जादगान और शेखजादगान खादिमों के लिए लागू है।

दरगाह अधिनियम के तहत पहल
नाजिम के अनुसार, दरगाह ख्वाजा साहब अधिनियम 1955 की धारा 11 (एफ) के तहत खादिमों के दायित्व, पहचान, मानक प्रक्रिया और जायरीन की सुविधा व सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लाइसेंस जारी किए जाने हैं। इसी के तहत पात्र खादिमों से आवेदन आमंत्रित किए गए थे।

विरोध के चलते आगे नहीं बढ़ी प्रक्रिया
अंजुमन सैयद जादगान के सचिव सैयद सरवर चिश्ती ने इस निर्णय को परंपराओं के खिलाफ बताते हुए इसे ‘तुगलकी फरमान’ करार दिया था। उनका कहना है कि यह प्रक्रिया खादिमों के अधिकारों को प्रभावित करती है। इसी विरोध के कारण अब तक किसी भी खादिम ने आवेदन जमा नहीं किया है।

पहली बार शुरू हुई ऐतिहासिक पहल
गौरतलब है कि दरगाह के 75 साल के इतिहास में पहली बार खादिमों को लाइसेंस देने की प्रक्रिया शुरू की गई है। अब तक तीन प्रशासक और 37 नाजिम अपने कार्यकाल पूरे कर चुके हैं। वर्तमान नाजिम मोहम्मद बिलाल खान के कार्यकाल में यह पहल शुरू हुई है। अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि अंतिम तारीख तक कोई बदलाव होता है या प्रशासन को आगे कोई निर्णय लेना पड़ता है।

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