राष्ट्रीय शिक्षा महाकुंभ में कोटा के डॉ. नयन प्रकाश गांधी का राष्ट्रीय सम्मान, पब्लिक पॉलिसी और अकादमिक शोध में उत्कृष्ट योगदान की मिली पहचान

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नई दिल्ली में 28 प्रतिष्ठित व्यक्तियों एवं संस्थानों का हुआ सम्मान; गेस्ट ऑफ ऑनर और युवा पैनलिस्ट स्पीकर के रूप में भी हुए आमंत्रित, AI एवं शिक्षा 5.0 पर रखा यूथ-ड्रिवन विकसित भारत का विजन
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नई दिल्ली :स्मार्ट हलचल|कोटा राजस्थान की शैक्षणिक कोटा के प्रख्यात मैनेजमेंट विश्लेषक, शिक्षाविद्, अकादमिक शोधकर्ता, इंटरनेशनल करियर एनएलपी लाइफ कोच एवं पब्लिक पॉलिसी विशेषज्ञ डॉ. नयन प्रकाश गांधी ने राष्ट्रीय स्तर पर कोटा का गौरव बढ़ाया है। नई दिल्ली के प्रतिष्ठित ली मेरिडियन होटल स्थित इंस्पायर हॉल में आयोजित 8वें नेशनल एजुकेशन कॉन्क्लेव 2026 में उन्हें ‘बेस्ट एकेडमिक रिसर्चर एवं पब्लिक पॉलिसी एक्सपर्ट अवॉर्ड-2026’ से सम्मानित किया गया। शिक्षा, अकादमिक अनुसंधान, सार्वजनिक नीति और युवा सशक्तीकरण के क्षेत्र में उनके विशिष्ट योगदान को इस सम्मान के माध्यम से राष्ट्रीय पहचान मिली।

इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (ICCI) एवं फेम फाइंडर्स मैगजीन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस राष्ट्रीय शिक्षा महाकुंभ में डॉ. गांधी को गेस्ट ऑफ ऑनर के साथ युवा पैनलिस्ट स्पीकर के रूप में भी आमंत्रित किया गया। उन्होंने अपने विचारों और नीतिगत दृष्टिकोण के माध्यम से शिक्षा, तकनीक, रोजगार, नवाचार तथा युवा नेतृत्व के भविष्य पर सार्थक विमर्श प्रस्तुत किया।

समारोह के मुख्य अतिथि पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं वरिष्ठ भाजपा नेता श्री सुरेश पचौरी तथा दिल्ली खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के उपाध्यक्ष श्री तिलक राज कटारिया रहे। कार्यक्रम में सीए दीन दयाल अग्रवाल, चेयरमैन, CSR रिसर्च फाउंडेशन तथा डॉ. कैलाश बिहारी सिंह, अध्यक्ष, ICCI की गरिमामयी उपस्थिति रही। देशभर से आए शिक्षाविदों, उद्योगपतियों, उद्यमियों, शोधकर्ताओं, नीति विशेषज्ञों एवं संस्थागत प्रतिनिधियों ने सम्मेलन में सहभागिता की। इस अवसर पर विभिन्न श्रेणियों में 28 प्रतिष्ठित व्यक्तियों एवं संस्थानों को सम्मानित किया गया।

शिक्षा 5.0 और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर गांधी का दूरदर्शी दृष्टिकोण

कॉन्क्लेव के तकनीकी एवं विचार-विमर्श सत्र में शिक्षा 5.0, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल लर्निंग, उद्योग-अकादमिक साझेदारी, कौशल विकास और भविष्य की रोजगार संभावनाओं पर व्यापक चर्चा हुई।

इस महत्वपूर्ण सत्र में डॉ. नयन प्रकाश गांधी के साथ डॉ. नितिन गुप्ता, डॉ. स्वेता सौरभ, डॉ. बुद्ध चंद्रशेखर, डॉ. दीपक गुप्ता, डॉ. तनवीर आलम, डॉ. संदीप त्रिपाठी, डॉ. संतोष कुमार, श्री अमित भारद्वाज, श्री भीम प्रकाश सहित अनेक शिक्षाविदों एवं उद्योग विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए।

अपने संबोधन में डॉ. गांधी ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी पूंजी उसकी युवा जनशक्ति है। आज आवश्यकता केवल युवाओं को डिग्रियां प्रदान करने की नहीं, बल्कि उन्हें भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप कौशल, नवाचार, उद्यमिता, नेतृत्व क्षमता और आधुनिक तकनीक से सशक्त बनाने की है।

उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को केवल ऑटोमेशन अथवा रोजगार के पारंपरिक स्वरूप में बदलाव के रूप में नहीं देखना चाहिए, बल्कि इसे सामाजिक नवाचार, समावेशी विकास और जनकल्याण का प्रभावी माध्यम बनाया जाना चाहिए।

डॉ. गांधी ने अपने विचार को स्पष्ट करते हुए कहा, “AI केवल ऑटोमेशन का उपकरण नहीं, बल्कि सामाजिक नवाचार और समावेशी विकास का उत्प्रेरक है।”

‘यूथ-ड्रिवन भारत’ से विकसित भारत की ओर

डॉ. गांधी ने अपने संबोधन में यूथ-ड्रिवन भारत की अवधारणा प्रस्तुत करते हुए कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य तभी साकार होगा, जब युवा केवल रोजगार तलाशने वाले नहीं, बल्कि रोजगार सृजित करने वाले, नवाचार के नेतृत्वकर्ता और सामाजिक परिवर्तन के वाहक बनेंगे।

उन्होंने युवाओं के लिए री-स्किलिंग, अप-स्किलिंग, उद्यमिता प्रशिक्षण, स्टार्टअप संस्कृति और व्यावहारिक शिक्षा को प्राथमिकता देने की आवश्यकता बताई। साथ ही उन्होंने कहा कि शिक्षा संस्थानों, उद्योग जगत और नीति निर्माताओं के बीच मजबूत साझेदारी विकसित किए बिना भारत को वैश्विक नवाचार केंद्र बनाना संभव नहीं है।

उन्होंने AI आधारित सामाजिक उद्यमिता, ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीकी नवाचार, डिजिटल समावेशन तथा वंचित समुदायों तक आधुनिक तकनीक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया।

शिक्षा, उद्योग और सार्वजनिक नीति के समन्वय पर जोर

सम्मेलन में उद्योग 4.0, रोजगारपरक शिक्षा, अनुसंधान एवं विकास, उद्यमिता, नई शिक्षा नीति, संस्थागत नवाचार और विकसित भारत-2047 के लक्ष्यों पर भी गहन विचार-विमर्श हुआ।

डॉ. गांधी ने रेखांकित किया कि शिक्षा व्यवस्था को बदलते वैश्विक परिदृश्य के अनुरूप तैयार करने के लिए अकादमिक शोध को सार्वजनिक नीति से जोड़ना समय की मांग है। शोध का वास्तविक महत्व तभी है, जब उसके निष्कर्ष समाज, प्रशासन, उद्योग और आम नागरिकों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकें।

राष्ट्रीय सम्मान को बताया नई जिम्मेदारी और प्रेरणा

सम्मान प्राप्त करने पर डॉ. नयन प्रकाश गांधी ने आयोजक संस्थाओं, मुख्य अतिथियों, विशिष्ट अतिथियों, पैनलिस्टों, शिक्षाविदों, सहयोगियों एवं मीडिया प्रतिनिधियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

उन्होंने कहा कि यह सम्मान व्यक्तिगत उपलब्धि से आगे बढ़कर शिक्षा, अकादमिक अनुसंधान, सार्वजनिक नीति, युवा सशक्तीकरण और राष्ट्र निर्माण के प्रति समर्पित प्रयासों की प्रेरणा है। उनका प्रयास रहेगा कि युवाओं की क्षमता, शोध आधारित चिंतन और आधुनिक तकनीक के समन्वय से समाज एवं राष्ट्र के विकास में सार्थक योगदान दिया जाए।

कोटा से राष्ट्रीय मंच तक पहुंची यह उपलब्धि राजस्थान के शैक्षणिक जगत और युवा प्रतिभाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत है। राष्ट्रीय शिक्षा महाकुंभ 2026 ने शिक्षा और उद्योग के बीच संवाद, शोध एवं नवाचार को प्रोत्साहित करने तथा भारत को ज्ञान, कौशल और तकनीक आधारित वैश्विक अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया।