कोटड़ी (भीलवाड़ा)। जिले में ब्याज माफियाओं और सूदखोरों के खिलाफ पुलिस का शिकंजा कसता जा रहा है। कोटड़ी थाना पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए 2 लाख रुपये के मूल ऋण के बदले 3.95 लाख रुपये ऐंठने और उसके बाद भी खाली चेक व स्टाम्प के जरिये प्रताड़ित करने वाले दो शातिर सूदखोरों (पिता-पुत्र) को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से पुलिस ने खाली चेक और स्टाम्प सहित अन्य दस्तावेज बरामद कर लिए हैं। न्यायालय के आदेश पर दोनों को 6 मई 2026 तक न्यायिक अभिरक्षा (माण्डलगढ़ जेल) में भेज दिया गया है।
लोन पास होते ही खाली चेक से उड़ाए 3.90 लाख
कोटड़ी थानाधिकारी महावीर प्रसाद ने बताया कि धायलों का खेड़ा निवासी प्रार्थी चन्द्रा गाडरी ने 5-6 वर्ष पूर्व आरोपी आशाराम तेली से 2 लाख रुपये उधार लिए थे। उस समय सिक्योरिटी के तौर पर आशाराम ने एचडीएफसी बैंक के 7 खाली चेक और 500 रुपये का एक खाली स्टाम्प प्रार्थी से रखवा लिया था। प्रार्थी ने अपना कर्ज चुकाने के लिए बैंक से 3,95,000 रुपये का लोन लिया। जैसे ही यह पैसा प्रार्थी के खाते में आया, आरोपी आशाराम ने पहले से रखे एक खाली चेक में 3,90,000 रुपये की राशि भरकर पैसे अपने खाते में ट्रांसफर करवा लिए।
आत्महत्या को मजबूर कर रहा था माफिया
लगभग दोगुनी राशि वसूलने के बावजूद सूदखोरों का लालच खत्म नहीं हुआ। वे अवैध पेनल्टी लगाकर और रुपयों की मांग करने लगे। रुपये न देने पर उन्होंने प्रार्थी को धमकाया कि बचे हुए अमानतन खाली चेक और स्टाम्प का दुरुपयोग कर वे उसे झूठे मुकदमों में फंसा देंगे और मकान पर कब्जा कर लेंगे। आरोपियों की इस प्रताड़ना से पीड़ित और उसका परिवार आत्महत्या करने की कगार पर पहुंच गया था।
पिता-पुत्र हुए गिरफ्तार, जेल भेजे गए
पुलिस ने धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र और डरा-धमका कर जबरन पैसे ऐंठने का मामला दर्ज कर मुख्य आरोपी आशाराम (34) और उसके पिता प्रभूलाल तेली (55) निवासी कोटड़ी को गिरफ्तार कर लिया है।
यह पूरी कार्रवाई पुलिस अधीक्षक धर्मेन्द्र सिंह के निर्देश पर एएसपी राजेश आर्य व वृत्ताधिकारी सुरेश डाबरिया के सुपरविजन में की गई। टीम में थानाधिकारी महावीर प्रसाद, सउनि रणजीत सिंह, हैड कांस्टेबल कमलेश कुमार, कांस्टेबल राकेश और लक्ष्मण शामिल रहे।
