“मेडिकल कॉलेज में नौकरी के नाम पर लाखों की वसूली?”

 

देवकली मेडिकल कॉलेज में आउटसोर्स भर्ती पर उठे सवाल, वायरल वीडियो से मचा हड़कंप

नौकरी दिलाने के नाम पर रुपये लेने के आरोप, जांच की उठी मांग; वायरल वीडियो बना चर्चा का विषय

श्रीकान्त सिंह शाक्य
लखीमपुर खीरी। स्मार्ट हलचल|प्रदेश सरकार जहां युवाओं को पारदर्शी और निष्पक्ष रोजगार उपलब्ध कराने का दावा कर रही है, वहीं जनपद के स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय, देवकली से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने भर्ती प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे एक वीडियो में आउटसोर्स भर्ती के नाम पर अभ्यर्थियों से लाखों रुपये वसूले जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद पूरे जिले में चर्चाओं का बाजार गर्म है और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठने लगी है।

बताया जा रहा है कि मेडिकल कॉलेज में आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती को कुछ लोगों ने कथित तौर पर कमाई का जरिया बना लिया। आरोप है कि नौकरी दिलाने का भरोसा देकर बेरोजगार युवाओं से मोटी रकम वसूली गई। सबसे गंभीर बात यह बताई जा रही है कि कई अभ्यर्थियों से नौकरी पक्की कराने के नाम पर लाखों रुपये लिए जाने की बातें सामने आ रही हैं।

“बाजार लगा नहीं, जेबकतरे पहले से आ गए”— यह कहावत इन चर्चाओं के बीच लोगों की जुबान पर है। लोगों का कहना है कि मेडिकल कॉलेज में भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह शुरू होने से पहले ही कथित रूप से रुपये लेकर नौकरी दिलाने के दावे किए जाने लगे।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में कुछ लोग कथित रूप से नौकरी दिलाने के नाम पर लेन-देन की बातें करते दिखाई और सुनाई दे रहे हैं। हालांकि इस वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इसके सामने आने के बाद मेडिकल कॉलेज की भर्ती प्रक्रिया पर सवाल जरूर खड़े हो गए हैं।

यदि वायरल वीडियो और लगाए गए आरोपों में सच्चाई पाई जाती है, तो यह मामला केवल आर्थिक अनियमितता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बेरोजगार युवाओं के साथ धोखाधड़ी और सरकारी भर्ती व्यवस्था की साख पर भी बड़ा सवाल होगा। ऐसे में संबंधित एजेंसियों द्वारा निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग तेज हो रही है।

फिलहाल मेडिकल कॉलेज प्रशासन या संबंधित आउटसोर्स एजेंसी की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। वहीं जिला प्रशासन की ओर से भी जांच शुरू होने की पुष्टि नहीं की गई है।

यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मामला जनपद की सबसे बड़ी भर्ती अनियमितताओं में से एक माना जा सकता है। अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पर टिकी हैं कि वायरल वीडियो और लगाए गए आरोपों की जांच कब और किस स्तर पर होती है तथा दोषियों पर क्या कार्रवाई की जाती है।