आकाश शर्मा
स्मार्ट हलचल|चित्तौड़गढ़ नगर परिषद निकाय चुनावों के सरगर्म माहौल में इन दिनों एक अजीबोगरीब तांत्रिक-राजनीतिक घमासान देखने को मिल रहा है। ‘मुकेश्यानंद महाराज’ नामक एक पहुंचे हुए बाबा ने दावा ठोका है कि वे केवल इंसानों की रेखाएं ही नहीं, बल्कि पूरी राजनीतिक पार्टियों की तकदीर लिखने का दम रखते हैं। बाबा ने अपनी वाणी से सीधे कांग्रेस के बोर्ड बनने की भविष्यवाणी कर डाली है। साथ ही कुछ ऐसे आंकड़ों का दांव खेला है, जिस पर हमारी पड़ताल जारी है। लेकिन जब हमारी टीम ने उनसे “पान का बीड़ा, चश्मा काला… बाउजी के बड़े सपने!” के बारे में चुभता हुआ सवाल पूछा, तो महाराज जी का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया । जैसे-तैसे शांत कराने के बाद बाबा जब अपने पुराने रंग में आए, तो उन्होंने वार्ड 15 की पूरी ‘कुंडली’ खोलकर रख दी ।
पैसे का घमंड बनाम जनता का दिल- बाबा ने तंज कसते हुए कहा “अरे भाई ! पैसा ही सब कुछ नहीं होता। क्या नोटों के दम पर चुनाव जीते जाते हैं? चुनाव जीतने के लिए दिल में जगह और जुबान में मिठास होनी चाहिए, जो कि सत्ता के दावेदारों के पास दूर-दूर तक नहीं है।”
चाणक्य की बिसात और शिष्य की बलि- विपक्षी खेमे की तारीफ करते हुए महाराज बोले “विपक्ष के पास भले ही धनबल कम हो, लेकिन राजनीति के मंजे हुए ‘चाणक्य’ सुरेंद्र सिंह जाड़ावत का हाथ उनके सिर पर है। वे पूरी कमान संभालकर माहौल अपने पक्ष में मोड़ने में लगे हैं। हालांकि, इसी राजनीतिक खेल में चाणक्य ने दूसरे वार्ड में अपने ही एक ‘अंधभक्त शिष्य’ की बलि चढ़ा दी !”
दोनों दलों का एक ही हाल- बाबा यही नहीं रुके, उन्होंने अंत में बड़ा धमाका करते हुए कहा कि दोनों ही प्रमुख पार्टियों ने अपने-अपने भावी सभापतियों के सपनों की ‘कार सेवा’ खुद ही अंदरूनी भितरघात से कर दी है। फिलहाल मुकेश्यानंद महाराज के इन दावों और राजनीतिक समीकरणों में कितनी सच्चाई है, इसका सच तो चुनावी नतीजे ही तय करेंगे। लेकिन बाबा की इस ‘दिव्य वाणी’ ने शहर की सियासत में हलचल जरूर बढ़ा दी है। जांच-पड़ताल जारी है, आप भी बने रहें हमारे साथ !