बद्री लाल माली
गुरला|स्मार्ट हलचल|केंद्र और राज्य सरकारें देश को स्वच्छ और खुले में शौच मुक्त बनाने के लिए स्वच्छ भारत मिशन के नाम पर हजारों करोड़ रुपए खर्च कर रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सपना है कि हर गांव स्वच्छ हो, हर व्यक्ति को शौचालय की सुविधा मिले। इसी सपने को साकार करने के लिए गांव-गांव में सामुदायिक शौचालयों का निर्माण करवाया जा रहा है। लेकिन भीलवाड़ा जिले की सुवाणा पंचायत समिति की ग्राम पंचायत गुरला में इस मिशन की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
ताजा मामला ग्राम पंचायत गुरला के राजस्व गांव रगसपुरिया का है। यहां पंचायत द्वारा लाखों रुपए की लागत से एक सामुदायिक शौचालय का निर्माण करवाया गया है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि यह शौचालय अभी चालू भी नहीं हुआ है और इस पर पहले ही ताला जड़ दिया गया है। निर्माण पूरा होने के बाद से आज तक इसका गेट नहीं खुला।
दीवारों पर नारे, गेट पर ताले – फोटो दे रही है गवाही
हमारे संवाददाता जब मौके पर पहुंचे तो जो नजारा देखा, वह बेहद चौंकाने वाला था। शौचालय की बाहरी दीवार पर बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा हुआ है – सामुदायिक शौचालय रगसपुरिया, ग्राम पंचायत गुरला, पंचायत समिति सुंवाणा जिला – भीलवाड़ा (राज.) इसके ठीक नीचे स्वच्छ भारत मिशन का लोगो और नारा लिखा है – एक कदम स्वच्छता की ओर और शौचालय का करें उपयोग, रखें जन-जन को निरोग
दीवारों पर स्वच्छता का संदेश देती हुई सुंदर चित्रकारी भी की गई है, जिसमें एक पुरुष, एक महिला और एक बच्चे को हाथ धोते हुए दिखाया गया है। दूर से देखने पर लगता है कि कितना सुंदर और उपयोगी शौचालय बना है। लेकिन जैसे ही आप इसके नजदीक जाते हैं, इसकी पोल खुल जाती है।
शौचालय के दोनों लोहे है दरवाजे हैं पर बड़े-बड़े ताले लटके हुए हैं। दरवाजों पर जंग लगना शुरू हो गया है, जिससे साफ पता चलता है कि इसे बने हुए कई महीने हो गए हैं और ताले को कभी खोला ही नहीं गया। शौचालय के सामने कोई पक्का फर्श नहीं है, कच्ची मिट्टी और मलबा पड़ा है। न तो पानी का कोई कनेक्शन दिख रहा है, न ही पानी की टंकी। अंदर शौचालय के गड्ढे बने हैं या नहीं, यह भी भगवान भरोसे है क्योंकि इसे देखने के लिए दरवाजा ही नहीं खुल रहा।
*ग्रामीणों ने बताया, उद्घाटन का इंतजार करते-करते थक गए*
इस संबंध में *स्थानीय जागरूक ग्रामीण ने हमें पूरी जानकारी दी। ओर बताया कि इस सामुदायिक शौचालय का निर्माण लगभग 10. 12 महिने पहले किया गया था। ग्राम पंचायत के माध्यम से इसका निर्माण करवाया। निर्माण के दौरान ग्रामीणों को लगा कि अब गांव में एक अच्छी सुविधा मिलेगी, गांव से बाहर खेतों में काम करने वाले किसानों, मजदूरों और बाहर से आने-जाने वाले राहगीरों को इसका लाभ मिलेगा।
लेकिन निर्माण होते ही इसमें ताला लगा दिया और चला गया। उसके बाद से ग्राम पंचायत गुरला के सरपंच और ग्राम विकास अधिकारी ने इसकी सुध तक नहीं ली। ग्रामीण ने बताया कि “हमने कई बार सरपंच साहब से कहा कि इस शौचालय को चालू करवाओ, लेकिन सरपंच जी कहते हैं अभी ऊपर से आदेश नहीं आया, अभी हैंडओवर नहीं हुआ। अगर हैंडओवर नहीं हुआ तो ताला क्यों लगाया? और अगर बन गया है तो चालू क्यों नहीं कर रहे?”
कागजों में हो गया भुगतान, धरातल पर बंद
ग्रामीणों का आरोप है कि इस शौचालय के नाम पर पंचायत ने लाखों रुपए का पूरा भुगतान उठा लिया है। सरकारी रिकॉर्ड में यह शौचालय पूर्ण दिखा दिया गया है। लेकिन धरातल पर यह आज भी बंद पड़ा है। यह सीधे-सीधे सरकारी धन का दुरुपयोग है। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत सामुदायिक शौचालयों के लिए लगभग 3 स लाख रुपए तक का बजट आता है। अगर इतनी राशि खर्च करने के बाद भी जनता को इसका लाभ न मिले तो यह भ्रष्टाचार नहीं तो और क्या है?
*स्वच्छ भारत मिशन की उड़ रही है धज्जियां*
आपको बता दें कि स्वच्छ भारत मिशन का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता को बढ़ावा देना और खुले में शौच की प्रथा को खत्म करना है। सरकार चाहती है कि गांव में कोई भी व्यक्ति खुले में शौच न जाए। इसी के तहत पंचायतों को निर्देश हैं कि सार्वजनिक स्थानों, बस स्टैंड, गांव के चौक और खेतों के रास्ते में सामुदायिक शौचालय बनाए जाएं।
लेकिन गुरला पंचायत ने इस मिशन को सिर्फ दीवारों पर पेंटिंग तक सीमित कर दिया। शौचालय बना दिया, फोटो खिंचवा ली, बिल पास करवा लिया और ताला लगा दिया। इससे बड़ा मजाक स्वच्छता के नाम पर और क्या हो सकता है?
*महिलाओं और किसानों को सबसे ज्यादा परेशानी*
रगसपुरिया गांव के आसपास कई खेत हैं जहां दिनभर किसान और मजदूर काम करते हैं। यहां से गुजरने वाले राहगीरों के लिए भी यह एकमात्र रास्ता है। महिलाओं को खेतों में काम के दौरान शौच के लिए बहुत परेशानी होती है। अगर यह सामुदायिक शौचालय चालू हो जाता तो महिलाओं को सबसे ज्यादा राहत मिलती। लेकिन पंचायत की इस लापरवाही से महिलाओं को आज भी खेतों में ही जाना पड़ता है।
*दोहरा संकट: एक तरफ टूटी सड़क, दूसरी तरफ बंद शौचालय*
गुरला पंचायत में विकास के दावे वैसे भी खोखले नजर आ रहे हैं। एक तरफ टीला का खेड़ा से राजपुरा को जोड़ने वाली मुख्य सड़क 12 साल से टूटी पड़ी है, जिसे चंबल परियोजना ने और बर्बाद कर दिया है। उस सड़क पर स्कूली बच्चे कीचड़ में गिर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ रगसपुरिया में बना-बनाया शौचालय ताले में बंद पड़ा है। यानी एक तरफ जो सुविधा है उसे बर्बाद कर दिया और जो नई सुविधा बनाई उसे चालू ही नहीं किया।
*क्या कहते हैं नियम?*
स्वच्छ भारत मिशन के नियमों के अनुसार, सामुदायिक शौचालय बनने के 15 दिन के अंदर उसे जनता के लिए खोलना अनिवार्य है। उसमें पानी, बिजली, सफाई कर्मी और नियमित साफ-सफाई की व्यवस्था पंचायत को करनी होती है। लेकिन यहां तो महीनों से ताला लगा है। न तो पानी की व्यवस्था है, न ही कोई देखरेख करने वाला।
रगसपुरिया के समस्त ग्रामीणों* ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस सामुदायिक शौचालय की तुरंत जांच की जाए कि इसका निर्माण कितनी लागत से हुआ और भुगतान किसे किया गया।
इसे तुरंत प्रभाव से आम जनता के लिए खोला जाए। इसमें पानी की टंकी, नल कनेक्शन और सफाई कर्मचारी की नियुक्ति की जाए। जब तक यह चालू नहीं होता, तब तक संबंधित ग्राम विकास अधिकारी और सरपंच की जिम्मेदारी तय की