कोर्ट के आदेश के बाद भी पिछली बार नहीं मिला था कार्यभार, पति को टावर पर चढ़कर करना पड़ा था आंदोलन; अब फिर प्रशासन के कदम पर टिकी निगाहें

कोर्ट के आदेश के बाद भी पिछली बार नहीं मिला था कार्यभार, पति को टावर पर चढ़कर करना पड़ा था आंदोलन; अब फिर प्रशासन के कदम पर टिकी निगाहें

जहाजपुर (स्मार्ट हलचल/अलकेश पारीक)

ग्राम पंचायत पंडेर की पूर्व सरपंच एवं प्रशासक ममता जाट से जुड़ा मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। राजस्थान हाईकोर्ट, जोधपुर से दूसरी बार अंतरिम राहत मिलने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि प्रशासन न्यायालय के आदेश के अनुरूप उन्हें प्रशासक पद का कार्यभार ग्रहण करवाता है या फिर पिछली बार की तरह मामला जॉइनिंग पर ही अटका रहता है।

11 मई के पदमुक्ति आदेश के प्रभाव पर लगी अंतरिम रोक

जानकारी के अनुसार, राजस्थान हाईकोर्ट ने 23 जुलाई 2026 को पारित अपने आदेश में राज्य सरकार के 11 मई 2026 के पदमुक्ति आदेश के प्रभाव एवं संचालन पर अंतरिम रोक लगा दी है। हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद एक बार फिर पंडेर पंचायत में प्रशासक पद और प्रशासनिक गतिविधियों को लेकर हलचल तेज हो गई है।

पुराना घटनाक्रम: कोर्ट से राहत के बावजूद अटकी थी जॉइनिंग, टावर पर चढ़े थे पति

इस पूरे मामले का पिछला घटनाक्रम पूरे क्षेत्र में खासा चर्चित रहा था। ममता जाट को पूर्व में भी न्यायालय से राहत मिली थी, लेकिन इसके बावजूद प्रशासक पद का कार्यभार ग्रहण कराने में प्रशासनिक स्तर पर देरी होती चली गई। कार्यभार की मांग को लेकर उनके पति ने उग्र विरोध का रास्ता अपनाते हुए टावर पर चढ़कर आंदोलन किया था, जिसने प्रशासनिक अमले के हाथ-पांव फुला दिए थे। यही कारण है कि दोबारा हाईकोर्ट से राहत मिलने पर पुराना घटनाक्रम फिर चर्चा में आ गया है।

‘न्यायालय के आदेश की पालना हो, दोबारा न बने आंदोलन की नौबत’

ममता जाट के पति ने कहा कि उन्हें न्यायपालिका और कानून व्यवस्था पर पूरा भरोसा है। पिछली बार कोर्ट से राहत के बावजूद कार्यभार के लिए संघर्ष करना पड़ा था और टावर पर चढ़ने जैसा कदम उठाना पड़ा। हम नहीं चाहते कि इस बार फिर वैसी परिस्थितियां बनें। यदि न्यायालय के आदेश की पालना में अनावश्यक देरी या टालमटोल की गई, तो अपने अधिकार के लिए लोकतांत्रिक व कानूनी तरीके से दोबारा आंदोलन किया जाएगा।

अब प्रशासन के पाले में गेंद

हाईकोर्ट से अंतरिम आदेश मिलने के बाद अब सभी की निगाहें प्रशासनिक अधिकारियों की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि क्या इस बार न्यायालय के आदेश के बाद ममता जाट को नियमानुसार कार्यभार सौंपा जाएगा, या फिर पंडेर में जॉइनिंग की जंग के लिए आंदोलन का इतिहास दोहराया जाएगा?