कागजों में सिमटा विकास, धरातल से कुर्सियां नदारद; आवारा श्वान पकड़ने के ठेके में अपारदर्शिता पर भड़के नागरिक, उच्च स्तरीय जांच व भौतिक सत्यापन की मांग
मांडलगढ़ (स्मार्ट हलचल)
मांडलगढ़ नगर पालिका में विकास कार्यों एवं विभिन्न मदों में सरकारी बजट के खर्च को लेकर गंभीर अनियमितताओं और लाखों रुपये के कथित घोटाले के आरोप सामने आए हैं। पालिका प्रशासन पर आवारा कुत्ते पकड़ने के नाम पर भारी-भरकम राशि का भुगतान करने तथा बिना सीमेंट की कुर्सियां लगाए ही फाइलों में काम दिखाकर फर्जी बिल उठाने के संगीन आरोप लगे हैं। इन खुलासों के बाद नगर पालिका की कार्यप्रणाली, भुगतान प्रक्रिया और वित्तीय पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
कुर्सियां धरातल से गायब, कागजों में भुगतान पूरा
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि जिन सार्वजनिक स्थानों और वार्डों में सीमेंट की कुर्सियां लगाने का दावा सरकारी फाइलों में दर्शाया गया है, वहां मौके पर कुर्सियां नजर ही नहीं आ रही हैं। इसके बावजूद संबंधित ठेकेदारों को बिलों का पूरा भुगतान कर दिया गया। शहरवासियों ने सवाल उठाया है कि जब मौके पर कार्य हुआ ही नहीं, तो माप पुस्तिका (MB) में इंद्राज किसने किया और अधिकारियों ने किस आधार पर बिल पास किए?
कुत्ता पकड़ने के नाम पर भी भारी गोलमाल के आरोप
इसी प्रकार शहर में आवारा श्वानों को पकड़ने के नाम पर नगर पालिका के खजाने से बड़ी राशि खर्च दिखाई गई है। आरोप है कि यह कार्य किस ठेकेदार या एजेंसी को सौंपा गया, वास्तव में कितने कुत्ते पकड़े गए और प्रति कुत्ता कितना भुगतान किया गया—इसकी कोई सार्वजनिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। धरातल पर आवारा कुत्तों का आतंक जस का तस है, लेकिन भुगतान पूरा उठा लिया गया।
🛑 नागरिकों की प्रमुख मांगें व सवाल:
- संबंधित सभी कार्यों के वर्क ऑर्डर, माप पुस्तिका (MB), बिल-वाउचर और भुगतान पत्रावलियों की निष्पक्ष जांच हो।
- प्रशासनिक टीम द्वारा मौके पर भौतिक सत्यापन कराकर निर्माण व आपूर्ति की वास्तविक स्थिति जांची जाए।
- बिना कार्य भुगतान में संलिप्त अधिकारियों व ठेकेदारों पर गबन का मुकदमा दर्ज कर राशि वसूली जाए।
चुनावी समर में गरमाया भ्रष्टाचार का मुद्दा
नगर पालिका चुनाव के दौरान सामने आए इन गंभीर आरोपों से कस्बे का राजनीतिक पारा चढ़ गया है। जनता का कहना है कि पालिका के खजाने से खर्च हुए लाखों रुपयों का वास्तविक उपयोग कहां हुआ, इसका जवाब आने वाले चुनाव में मांगा जाएगा। प्रबुद्ध नागरिकों ने जिला प्रशासन व स्वायत्त शासन विभाग (DLB) से तत्काल उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है।
