मांडलगढ़ पुलिस की अमानवीयता: फ्रैक्चर से कराहते युवक को इलाज के बजाय बंद किया






मांडलगढ़ पुलिस की अमानवीयता: फ्रैक्चर से कराहते युवक को इलाज के बजाय भेजा जेल


खाकी शर्मसार

मांडलगढ़ पुलिस की अमानवीयता: दबंगों ने तहखाने में बंधक बना सरियों से तोड़े हाथ-पैर, पुलिस ने इलाज कराने के बजाय शांति भंग में किया पाबंद

विधवा महिला की जमीन हड़पने का विरोध करने पर युवक को दी तालिबानी सजा; भीलवाड़ा अस्पताल में ऑपरेशन के बाद युवक भर्ती

शिव लाल जांगिड़

लाडपुरा/मांडलगढ़। राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के मांडलगढ़ थाना क्षेत्र के लाडपुरा गांव से खाकी को दागदार करने वाली एक बेहद अमानवीय घटना सामने आई है। यहाँ दबंगों द्वारा एक बेसहारा विधवा महिला की पुश्तैनी जमीन हड़पने की नीयत से उसके बेटे का अपहरण कर, उसे दुकान के तहखाने में बंधक बनाया गया और सरियों से बेरहमी से पीटकर उसके दोनों हाथ और एक पैर तोड़ दिए गए। लेकिन हद तो तब हो गई जब रक्षक बनी पुलिस ने अमानवीयता की सारी हदें पार करते हुए, मरणासन्न हालत में मिले पीड़ित का उचित इलाज कराने के बजाय रसूखदारों के दबाव में आकर उसे ही धारा 151 (शांति भंग) के तहत पाबंद कर दिया।

“पीड़ित सुनील गुर्जर वर्तमान में भीलवाड़ा के अस्पताल में गंभीर हालत में भर्ती है, जहाँ डॉक्टरों ने उसके टूटे हुए दोनों हाथों और पैर का ऑपरेशन कर प्लास्टर चढ़ाया है। परिजनों का आरोप है कि पुलिस अगर समय पर इलाज कराती तो युवक को इतनी यातना नहीं झेलनी पड़ती।”

धोखे से हड़पी जमीन, अब बाकी बची भूमि पर नजर

पीड़िता संतोष देवी गुर्जर पत्नी स्व. भोजराज गुर्जर ने थाने में रिपोर्ट सौंपकर बताया कि वह एक बेसहारा विधवा महिला है। उसका एक बेटा मानसिक रूप से मंदबुद्धि है। इसी मजबूरी का फायदा उठाकर गांव के ही दबंग सूरजमल, गोविन्द और गोपाल गुर्जर ने अनपढ़ महिला के मंदबुद्धि बेटे के अंगूठे का निशान लगवाकर धोखे से 2 बीघा के बदले 4 बीघा जमीन की रजिस्ट्री करवा ली। अब आरोपियों की नजर महिला की बची हुई पुश्तैनी और कब्जेशुदा जमीन पर है, जिसके लिए वे आए दिन महिला को डरा-धमका रहे हैं।

तहखाने में बंधक बनाकर सरियों से पीटा

घटनाक्रम के अनुसार, 24 मई को महिला का दूसरा बेटा सुनील गुर्जर सुबह करीब 10-11 बजे लाडपुरा बस स्टैंड गया था। तभी आरोपियों ने सोची-समझी साजिश के तहत उसे अपनी दुकान के अंदर खींच लिया और तलघर (तहखाने) में ले जाकर बंधक बना लिया। वहाँ उस पर बची जमीन छोड़ने का दबाव बनाया गया। जब सुनील ने मना किया, तो आरोपियों ने सरियों और लात-घूसों से उस पर जानलेवा हमला कर दिया। करीब 2/3 घंटे तक उसे बेरहमी से पीटा गया, जिससे उसका एक पैर और दोनों हाथ कई जगह से फ्रैक्चर हो गए।

पुलिस का अमानवीय चेहरा: कोर्ट में कराया खड़ा

वारदात को अंजाम देने के बाद शातिर आरोपियों ने खुद को बचाने के लिए पुलिस को झूठी सूचना दी कि सुनील उनकी दुकान में आकर उत्पाद मचा रहा है। मौके पर पहुंची लाडपुरा चौकी पुलिस ने जब सुनील को लहूलुहान हालत में देखा, तब भी उनका दिल नहीं पसीजा। पुलिस उसे स्थानीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले गई, जहाँ महज खानापूर्ति के लिए हल्की पट्टी करवाकर उसे सीधे थाने के लॉकअप में बंद कर दिया। गंभीर रूप से घायल युवक दर्द से तड़पता रहा, लेकिन पुलिस ने उसे अस्पताल भेजने के बजाय दोनों पक्षों पर धारा 151 के तहत कार्रवाई कर दी और कोर्ट में पेश कर दिया।

चौकी प्रभारी का गैर-जिम्मेदार बयान:

इस पूरे मामले पर जब लाडपुरा चौकी प्रभारी राम सिंह से बात की गई तो उन्होंने अजीब दलील देते हुए कहा, “हमें इतनी गंभीर चोटों या फ्रैक्चर की जानकारी नहीं थी। दोनों पार्टियां लड़ाई-झगड़ा कर रही थीं, इसलिए शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए हमने दोनों को पाबंद किया था।”

पीड़ित परिवार ने लगाई न्याय की गुहार

अब सवाल यह उठता है कि क्या पुलिस को युवक के टूटे हाथ-पैर और शरीर पर लगे गहरे जख्म दिखाई नहीं दिए? या फिर रसूखदारों के प्रभाव में आकर जानबूझकर आंखें मूंद ली गईं? कोर्ट से जमानत मिलने के बाद परिजनों ने तुरंत सुनील को भीलवाड़ा जिला अस्पताल पहुंचाया, जहाँ उसका इलाज जारी है। पीड़िता संतोष देवी ने मांडलगढ़ थानाधिकारी से आरोपियों के खिलाफ हत्या के प्रयास और अपहरण का मुकदमा दर्ज कर उन्हें तुरंत गिरफ्तार करने की मांग की है।

पुलिस ने क्या कहा
इस संबंध में लाडपुरा चौकी प्रभारी राम सिंह से मोबाइल पर संपर्क करने पर उन्होंने बताया कि प्रारंभिक सूचना के अनुसार दोनों पक्षों के बीच विवाद और झगड़े की स्थिति थी। शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए दोनों पक्षों के विरुद्ध पाबंदी की कार्रवाई की गई थी।

चौकी प्रभारी ने कहा कि उस समय उन्हें युवक के हाथ-पैर में फ्रैक्चर जैसी गंभीर चोटों की जानकारी नहीं थी। यदि मेडिकल रिपोर्ट में गंभीर चोटें सामने आती हैं तो नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

उधर पीड़ित पक्ष ने मामले की निष्पक्ष जांच कर आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने तथा पुलिस की भूमिका की भी जांच कराने की मांग की है।