लाडपुरा: मौसम के बदलाव के साथ आम के पेड़ों पर झूलने लगीं कच्ची कैरियां
कस्बे सहित आस-पास के ग्रामीण क्षेत्रों में इन दिनों आम के पेड़ों पर कच्ची कैरियां (हरे आम) लटकती हुई दिखाई दे रही हैं। मौसम में आए बदलाव के बीच खेतों में आम के पेड़ों पर लगे हरे-हरे गुच्छे हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच रहे हैं।
जल्दी आए मोड़ (फूल गुच्छे), अब दिखने लगीं कैरियां
इस वर्ष सर्दियां जल्दी खत्म होने के कारण आम के पेड़ों पर मोड़ (फूल) समय से पहले आ गए थे, जिसके परिणामस्वरूप अब पेड़ों पर छोटी-छोटी कैरियां झूलने लगी हैं।
- विकास का चरण: अभी ये फल कच्चे हैं। अप्रैल के अंत से लेकर मई तक इनका आकार धीरे-धीरे बढ़ेगा।
- पकने का समय: जून के महीने से ये पकना शुरू हो जाएंगे। हरे आम के पीले और लाल रंग के पके फलों में बदलने का यह सफर प्रकृति का एक सुंदर नजारा होता है।
किसानों को अच्छी पैदावार की उम्मीद
आम के पेड़ों पर लहलहाती इन कैरियों ने किसानों की उम्मीदें भी जगा दी हैं। किसानों का मानना है कि यदि आगे मौसम साफ रहा और तेज आंधी या भीषण लू नहीं चली, तो जून-जुलाई में आम की बंपर पैदावार देखने को मिलेगी।
मानसून में आम के पेड़ों का प्राकृतिक प्रसार
आम के पेड़ों का सबसे अधिक प्रसार मानसूनी सीजन में होता है। इसकी प्राकृतिक प्रक्रिया कुछ इस प्रकार है:
- बीज का फैलाव: पके हुए आम जब पेड़ से गिरते हैं, या पक्षी और जानवर इन्हें खाकर गुठलियां इधर-उधर फेंक देते हैं।
- मानसून की नमी: जुलाई-अगस्त की बारिश से मिट्टी नरम हो जाती है और इन गुठलियों को अंकुरित होने के लिए उपयुक्त वातावरण मिल जाता है।
- कम देखभाल में विकास: नए पौधों को शुरुआत में पर्याप्त पानी की आवश्यकता होती है, जिसकी पूर्ति बारिश के पानी से अपने आप हो जाती है।
आम के पेड़ों का महत्व: आम का पेड़ न केवल फलों का राजा प्रदान करता है, बल्कि भीषण गर्मी में इसकी शीतल छाया राहगीरों को सुकून देती है।
