वतन हिंदुस्तान के लिए मांगी अमन,चैन,खुशहाली की दुआ
काछोला 30 मई – स्मार्ट हलचल।मक्का मदीना शरीफ के मुकद्दस सफर हज की 46 दिन की पवित्र यात्रा पर गए काछोला के हाजी मोहम्मद साबिर रंगरेज,हज्जन नजमा बानू रंगरेज सहित आदि सात समंदर पार मक्का मदीना शरीफ की जियारत कर वतन हिंदुस्तान और घर,परिवार के लिए अमन ,चैन,खुशहाली,सुख,समृद्धि के साथ दुनिया में शक्तिशाली देश बनने की प्रार्थना की। हज यात्रा के दौरान काछोला के हाजी बाबू मेवाती,हज्जन सलमा बानू,हाजी अय्यूब लुहार,हज्जन रजिया बानू,हाजी अंसार मोहम्मद अंसारी,हज्जन शबनम,हाजी जिकरुद्दीन रंगरेज पुर, हाजी आजाद नीलगर हमीरगढ़,हाजी शरीफ मोहम्मद,हाजी अय्यूब मोहम्मद,हाजी कय्यूम मोहम्मद रंगरेज मांडल,हाजी अल्लाह रख लुहार सहित आदि ने हज के अनुष्ठान किए।
हज दुनिया का सबसे बड़ा आयोजन -हाजी रंगरेज ने बताया कि हज इस्लाम के पांच स्तंभों में से एक है,सक्षम मुस्लिम को एक बार हज करना फर्ज है,इस्लामी वर्ष के 12 वे महीने में होने वाला हज दुनिया के सबसे बड़े सामूहिक धार्मिक आयोजनों में से एक है।
मीना में 5 दिन किए हज के आयोजन – मक्का मदीना शरीफ में हज के मुकद्दस 5 दिन जिसमें हाजी मीना में रुककर ,अराफात के मैदान में प्रार्थना,मुजदलफा में रात रुककर कंकरी इकट्ठा करना,जमरात में तीनों शैतान को कंकरी मारना,हरम शरीफ काबा परिक्रमा करना सहित सफा मरवा पहाड़ियों के बीच दौड़ना सहित कई अनुष्ठान किए।
कबूतरों को डालते है दाना – हाजी रंगरेज ने बताया कि गुंबद ए खिजरा व अस्ताना ए महबूब से इश्क व मुहब्बत को लेकर हज पर आने वाले हाजियों द्वारा मक्का व मदीना शरीफ में बेजुबान पक्षी में बेजुबान पक्षी कबूतरों को दाना डालते है जो अपने वतन से साथ लेकर आते है।
हज यात्रा का हुआ समापन -(13 जिल हिज्जा) को ‘तवाफ अल-वदा’ (अलविदा तवाफ) की अदायगी के साथ हो रहा है। पवित्र अनुष्ठान पूरे कर मक्का स्थित अपने आवास पर लौट रहे हाजी इस समय मक्का में ही मौजूद हैं।हाजियों की वापसी से जुड़ी मुख्य बातें:तवाफ-ए-ज़ियारत और रमी: शैतान को कंकरी मारने (रमी) और काबा में अनिवार्य परिक्रमा (तवाफ-ए-ज़ियारत) के बाद हाजी अपने अंतिम पड़ाव की ओर बढ़ते हैं।अलविदा तवाफ: मीना से मक्का लौटने के बाद, स्वदेश या अपने गंतव्य के लिए निकलने से पहले हाजी काबा का अंतिम चक्कर (तवाफ अल-वदा) लगाते हैं।सम्मान: मक्का में इस यात्रा को सफलतापूर्वक पूरा करने वाले तीर्थयात्रियों को समुदाय में ‘हाजी’ (पुरुष) और ‘हज्जा’ (महिला) के रूप में सम्मान दिया जाता है।
