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पुष्कर मेले में छाई मूंछों की शान, विदेशी सैलानियों ने 15 सेकंड में साफा बांधकर लूटा आनन्द

वर्षों की मेहनत और समर्पण से यह शान बरकरार,संस्कृति और वैश्विक एकता का अद्भुत संगम बना

(हरिप्रसाद शर्मा)

पुष्कर. अजमेर.स्मार्ट हलचल|अंतरराष्ट्रीय प्राप्त पुष्कर मेला 2025 अपने पूरे रंग में नजर आ रहा है। सोमवार को मेले का माहौल राजस्थानी परंपरा, संस्कृति और लोक गौरव से सराबोर रहा। मूंछ प्रतियोगिता में देशभर से आए प्रतिभागियों ने राजस्थान की शान का प्रदर्शन किया, दूसरी ओर विदेशी सैलानियों ने साफा प्रतियोगिता में भाग लेकर परंपरा के प्रति अपनी दीवानगी दिखाई।
मूंछों में झलकी राजस्थानी शान
मेला मैदान में आयोजित मूंछ प्रतियोगिता में देशभर से आए 33 प्रतिभागियों ने अपनी अनोखी मूंछों का प्रदर्शन किया। किसी ने तलवार जैसी मूंछें तानीं तो किसी ने कलात्मक अंदाज में अपनी मूंछें संवारीं। मंच पर आते ही दर्शकों की तालियों से माहौल गूंज उठा। प्रतिभागियों ने राजस्थानी साफा और पारंपरिक पोशाक पहन रखी थी, जिससे कार्यक्रम लोक संस्कृति के रंग में रंग गया।
निर्णायक मंडल ने बताया कि विजेताओं का चयन मूंछों की लंबाई, घनत्व, देखभाल, कलात्मकता और प्रस्तुतिकरण के आधार पर किया जाएगा। प्रतियोगिता में शामिल प्रतिभागियों ने बताया कि मूंछों को संवारना आसान नहीं है, कई वर्षों की मेहनत और समर्पण से यह शान बरकरार रहती है।
प्रतिभागी राम सिंह ने गर्व से कहा कि राजस्थान में मूंछें शान और स्वाभिमान की निशानी हैं, इन्हें संभालना एक जिम्मेदारी है।
15 सेकंड में बांधा साफा

मेला ग्राउंड में ही साफा और तिलक प्रतियोगिता ने विदेशी सैलानियों का दिल जीत लिया। अर्जेंटीना से आए कपल पाब्लो और कोस्टा ने केवल 15 सेकंड में पारंपरिक राजस्थानी साफा बांधकर पहला स्थान हासिल किया।

दूसरे स्थान पर रूस से आए निकों और युगा, जबकि तीसरे स्थान पर कनाडा के जो और फ्रांस की किको की जोड़ी रही। रूस की प्रतिभागी युगा ने बताया कि वह चार साल से पुष्कर मेला आ रही हैं। उन्होंने कहा कि साफा बांधना सिर्फ प्रतियोगिता नहीं, बल्कि राजस्थान की संस्कृति को महसूस करने का माध्यम है।
प्रतियोगिता में अमेरिका, जर्मनी, अर्जेंटीना, इटली, स्पेन और फ्रांस से आए दस से अधिक विदेशी कपल्स ने पारंपरिक पोशाकों में मंच पर अपनी कला दिखाई। दर्शकों ने तालियों और जयकारों से उनका उत्साह बढ़ाया।

दोनों प्रतियोगिताओं में न सिर्फ लोक परंपरा की झलक दिखी, बल्कि यह भी साबित हुआ कि राजस्थान की पहचान उसकी संस्कृति, रंग और रीति-रिवाजों में बसती है। पुष्कर मेला हर साल की तरह इस बार भी भारतीय लोक संस्कृति और वैश्विक एकता का अद्भुत संगम बना हुआ है।

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