52 अकृत्रिम जिनालयों की आराधना का प्रतीक है नंदीश्वर दीप : आदि कुमार भैयाजी
नंदीश्वर दीप विधान के साथ अष्टान्हिका महापर्व का शुभारंभ
तलवंडी जैन मंदिर में नौ दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान प्रारंभ, विश्व शांति महायज्ञ के साथ होगा समापन
कोटा। स्मार्ट हलचल|दिगंबर जैन परंपरा के प्रमुख आध्यात्मिक पर्व अष्टान्हिका महापर्व के अवसर पर तलवंडी जैन मंदिर में मंगलवार से नौ दिवसीय नंदीश्वर दीप महामंडल विधान एवं विश्व शांति कल्याण महायज्ञ का शुभारंभ श्रद्धा एवं धार्मिक उल्लास के साथ हुआ। ध्वजारोहण, घटयात्रा, मंडल शुद्धिकरण एवं मंगलाचरण के साथ प्रारंभ हुए इस आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर आत्मकल्याण और विश्व शांति की कामना की।तलवंडी मंदिर समिति के महामंत्री प्रकाश सामरिया ने बताया कि अष्टान्हिका महापर्व जैन धर्म का अत्यंत महत्वपूर्ण आध्यात्मिक पर्व है। उन्होंने बताया कि नौ दिवसीय आयोजन के दौरान आठ दिनों तक नंदीश्वर विधान एवं अंतिम दिन विश्व शांति कल्याण महायज्ञ के साथ कार्यक्रम का समापन होगा।
विधानाचार्य श्री आदि कुमार जी भैयाजी ने प्रवचन में अष्टान्हिका महापर्व एवं नंदीश्वर दीप के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जैन आगमों में वर्णित नंदीश्वर दीप असंख्यात द्वीप-समुद्रों में स्थित आठवां दिव्य द्वीप है, जहां 52 अकृत्रिम जिनालय विराजमान हैं। इन दिव्य जिनालयों तक मनुष्य नहीं पहुंच सकते और अष्टान्हिका महापर्व के दौरान देवगण वहां भगवान जिनेन्द्र की आराधना करते हैं।
कार्यक्रम का शुभारंभ ध्वजारोहण, घटयात्रा एवं मंडल शुद्धिकरण के साथ हुआ। ध्वजारोहण का सौभाग्य श्रवण बडजात्या एवं सरोज बड़जात्या को प्राप्त हुआ। सौधर्म इंद्र की भूमिका भागचंद टोंग्या, देवेंद्र टोंग्या एवं अमन टोंग्या ने निभाई। द्रव्य पुण्यार्जक के रूप में धर्मवंद, पदम एवं पारस काला ने सहभागिता की। अखंड ज्योति स्थापना का सौभाग्य प्रकाश चंद्र एवं सुनीता सामरिया को प्राप्त हुआ, जबकि मुख्य कलश स्थापना सुशीला कपिल एवं राहुल सुरलाया परिवार द्वारा की गई। इसके अतिरिक्त चार मंगल कलश एवं अष्ट प्रातिहार्य की स्थापना सौभाग्यवती महिलाओं ने विधि-विधान से संपन्न कराई।
मंदिर समिति के अध्यक्ष अशोक पहाड़िया ने बताया कि नौ दिनों तक चलने वाले इस धार्मिक आयोजन में प्रतिदिन नंदीश्वर विधान, पूजन एवं धार्मिक प्रवचन होंगे। अंतिम दिन विश्व शांति एवं मानव कल्याण की कामना के साथ महायज्ञ आयोजित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि पर्व के दौरान अनेक श्रावक-श्राविकाएं तप, उपवास एवं विभिन्न धार्मिक आराधनाओं के माध्यम से आत्मकल्याण की साधना करेंगे।
उन्होंने बताया कि आयोजन की व्यवस्थाओं में महिला मंडल एवं युवा शक्ति का विशेष सहयोग रहा। विधानाचार्य श्री आदि कुमार जी भैयाजी के कुशल निर्देशन में अनिल डाबी, अनीशा एवं उनकी टीम द्वारा विधान संपन्न कराया जा रहा है। आयोजन में सुरेश हरसौरा, अरविंद, अशोक पाटोदी, धर्मचंद (सीए), रामरतन सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे
