राष्ट्रीय आदिवासी एकता मंच ने देशभर में मनाया विश्व आदिवासी दिवस

नॉर्थ ईस्ट से साउथ तक गूंजी आदिवासी एकता की आवाज; महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, गुजरात, मध्यप्रदेश, राजस्थान, झारखंड, ओडिशा समेत देशभर में आयोजन

जयपुर। स्मार्ट हलचल|विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय आदिवासी एकता मंच के तत्वावधान में देशभर में आदिवासी समाज की एकजुटता का विराट स्वरूप देखने को मिला। नॉर्थ ईस्ट से लेकर साउथ और उत्तर भारत से लेकर पश्चिम भारत तक आदिवासी समाज ने अपनी संस्कृति, परंपरा, पहचान और अधिकारों के प्रति जागरूकता का संदेश दिया। विभिन्न राज्यों में रैलियां, सामाजिक सम्मेलन, विचार गोष्ठियां, सांस्कृतिक कार्यक्रम, पौधरोपण, प्रतिभा सम्मान और जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए।

राष्ट्रीय महासचिव राकेश मीणा ने बताया कि राष्ट्रीय आदिवासी एकता मंच से जुड़े पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने देश के विभिन्न राज्यों में विश्व आदिवासी दिवस के कार्यक्रमों को व्यापक स्तर पर आयोजित किया। तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, केरल, कर्नाटक, महाराष्ट्र, गुजरात, मध्यप्रदेश, राजस्थान, ओडिशा, झारखंड, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, असम, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों में समाजबंधुओं ने कार्यक्रमों में भाग लिया।

नॉर्थ ईस्ट से साउथ तक आदिवासी संस्कृति की झलक

विश्व आदिवासी दिवस के कार्यक्रमों में आदिवासी समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत देखने को मिली। पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे समाजबंधुओं ने लोकगीत और लोकनृत्य प्रस्तुत किए। कई स्थानों पर युवाओं और महिलाओं ने बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाई। आयोजनों में आदिवासी इतिहास, संस्कृति और परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने पर जोर दिया गया।

अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम और असम में आदिवासी समाज की पारंपरिक संस्कृति और सामाजिक एकता से जुड़े कार्यक्रम हुए। वहीं झारखंड, ओडिशा, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और राजस्थान में भी बड़ी संख्या में समाजबंधुओं ने कार्यक्रम आयोजित कर आदिवासी एकता का संदेश दिया।

दक्षिण भारत में तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, केरल और कर्नाटक में भी विभिन्न आयोजनों के माध्यम से विश्व आदिवासी दिवस मनाया गया। इन कार्यक्रमों में आदिवासी समाज के अधिकारों के साथ शिक्षा और रोजगार को लेकर जागरूकता पैदा करने पर जोर दिया गया।

अरुणाचल के गृहमंत्री मामा नाटुंग ने दिया एकता का संदेश

विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर अरुणाचल प्रदेश के गृहमंत्री मामा नाटुंग ने आदिवासी समाज की एकता को मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की संस्कृति, पहचान और अधिकारों को लेकर चिंतन करने तथा सामाजिक एकता को मजबूत करने का अवसर है।

उन्होंने युवाओं से शिक्षा और कौशल विकास को प्राथमिकता देने का आह्वान किया। उनका कहना था कि आदिवासी समाज की नई पीढ़ी शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ेगी तो समाज का भविष्य और मजबूत होगा।

राकेश मीणा बोले—एकता ही समाज की सबसे बड़ी ताकत

राष्ट्रीय आदिवासी एकता मंच के राष्ट्रीय महासचिव राकेश मीणा ने बताया कि विश्व आदिवासी दिवस के आयोजनों में मंच का प्रमुख संदेश सामाजिक एकता, शिक्षा, रोजगार और आत्मनिर्भरता रहा। उन्होंने कहा कि देश के अलग-अलग राज्यों में रहने वाले आदिवासी समुदायों की भाषा, बोली और संस्कृति अलग हो सकती है, लेकिन समाज के सामने मौजूद अनेक चुनौतियां समान हैं।

उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज को राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर सामाजिक हितों के मुद्दों पर एकजुट होना होगा। समाज की युवा पीढ़ी को बेहतर शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं, तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता है।

राकेश मीणा ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस को केवल एक दिन का आयोजन बनाकर सीमित नहीं किया जाना चाहिए। इसे समाज के भविष्य की दिशा तय करने वाले अभियान के रूप में आगे बढ़ाना होगा। गांव से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक शिक्षा और रोजगार को प्राथमिकता देकर आदिवासी युवाओं को आगे लाना होगा।

शिक्षा और रोजगार बने प्रमुख मुद्दे

देशभर में हुए कार्यक्रमों में शिक्षा और रोजगार को प्रमुख मुद्दा बनाया गया। वक्ताओं ने कहा कि समाज के विकास का सबसे मजबूत आधार शिक्षा है। आदिवासी युवाओं को उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं, तकनीकी संस्थानों और कौशल विकास कार्यक्रमों से जोड़ना जरूरी है।

कार्यक्रमों में यह भी कहा गया कि युवाओं को सरकारी नौकरियों के साथ निजी क्षेत्र, स्वरोजगार, उद्यमिता और आधुनिक तकनीक के क्षेत्र में भी अवसर तलाशने चाहिए। महिलाओं की शिक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता को भी सामाजिक विकास का महत्वपूर्ण आधार बताया गया।

राजनीतिक मतभेद अलग, सामाजिक हित सर्वोपरि

राष्ट्रीय आदिवासी एकता मंच की ओर से आयोजित कार्यक्रमों में यह संदेश भी प्रमुखता से दिया गया कि राजनीतिक विचारधाराएं अलग-अलग हो सकती हैं, लेकिन सामाजिक हितों के मुद्दे पर समाज को एकजुट रहना चाहिए। आदिवासी अधिकार, शिक्षा, रोजगार, संस्कृति, युवाओं का भविष्य और महिलाओं का सशक्तीकरण ऐसे मुद्दे हैं, जिन पर सामूहिक प्रयास जरूरी है।

वक्ताओं ने कहा कि संगठन और संस्थाएं समाज की ताकत हैं, लेकिन इनका उद्देश्य केवल कार्यक्रम आयोजित करना नहीं बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक शिक्षा, जागरूकता और विकास का संदेश पहुंचाना होना चाहिए।

संस्कृति संरक्षण के साथ आधुनिक शिक्षा पर जोर

विश्व आदिवासी दिवस के आयोजनों में एक ओर जहां पारंपरिक लोकगीत और लोकनृत्य के माध्यम से संस्कृति को जीवंत रखा गया, वहीं दूसरी ओर आधुनिक शिक्षा और तकनीक को अपनाने की जरूरत पर भी जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी समाज अपनी जड़ों और संस्कृति से जुड़ा रहते हुए आधुनिक दुनिया के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ सकता है।

देशभर के आयोजनों ने दिया एकता का संदेश

नॉर्थ ईस्ट के अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम और असम से लेकर झारखंड, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड तक तथा राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र से लेकर तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु तक हुए आयोजनों ने आदिवासी समाज की व्यापक एकजुटता का संदेश दिया।

राष्ट्रीय आदिवासी एकता मंच ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस पर देशभर में हुई भागीदारी यह दर्शाती है कि आदिवासी समाज अब अपनी सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण के साथ शिक्षा, रोजगार, सामाजिक सम्मान और आत्मनिर्भरता को भी अपने भविष्य का आधार बना रहा है।

राष्ट्रीय महासचिव राकेश मीणा ने कहा कि आने वाले समय में राष्ट्रीय आदिवासी एकता मंच देश के विभिन्न राज्यों में शिक्षा, रोजगार, युवा जागरूकता और सामाजिक एकता से जुड़े अभियानों को और मजबूत करेगा। उन्होंने समाज के युवाओं, बुद्धिजीवियों, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों से एकजुट होकर काम करने का आह्वान किया।

नॉर्थ ईस्ट से साउथ तक और उत्तर से पश्चिम तक विश्व आदिवासी दिवस पर एक ही संदेश गूंजा—आदिवासी समाज की संस्कृति और पहचान सुरक्षित रहे, युवा शिक्षित हों, रोजगार के अवसर बढ़ें और सामाजिक एकता और मजबूत हो।