24 घंटे तक सरकारी जमीन पर गरजती रही जेसीबी! सूचना के बावजूद नहीं रुका अवैध खनन, जिम्मेदारों की चुप्पी पर उठे सवाल

जड़ौरा में सरकारी भूमि से मिट्टी निकाले जाने का मामला, वायरल वीडियो के बाद जांच की बात; ग्रामीणों ने निष्पक्ष कार्रवाई की उठाई मांग

गोला गोकरणनाथ खीरी। स्मार्ट हलचल|कुंभी गोला ब्लॉक की ग्राम पंचायत जड़ौरा में सरकारी भूमि पर कथित रूप से 24 घंटे तक लगातार अवैध खनन किए जाने का मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि दिन-रात जेसीबी मशीन से मिट्टी की खुदाई की गई और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से उसे लगातार ढोया जाता रहा। घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया है।
ग्रामीणों का कहना है कि जल जीवन मिशन के तहत निर्माणाधीन बड़ी पानी की टंकी के समीप 16 जुलाई को सुबह से लेकर पूरी रात तक जेसीबी मशीनें चलती रहीं। सरकारी भूमि से निकाली गई मिट्टी गांव में बनी सरकारी दुकानों के सामने डलवाई गई, जबकि इन दुकानों की नीलामी पहले ही हो चुकी है। ग्रामीणों का आरोप है कि पूरे दिन और रात खुलेआम खनन होता रहा, लेकिन जिम्मेदार विभागों ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई करना जरूरी नहीं समझा।
ग्रामीणों और पंचायत से जुड़े एक कर्मी ने आरोप लगाया कि यह खनन ग्राम प्रधान की ओर से कराया गया। हालांकि, इस आरोप की अभी तक किसी सक्षम अधिकारी द्वारा पुष्टि नहीं की गई है।

ग्रामीणों के मुताबिक, 16 जुलाई को ही मामले की सूचना खनन अधिकारी आशीष कुमार सिंह को दे दी गई थी। उनका कहना है कि अधिकारी ने बताया था कि सूचना तहसीलदार को भेज दी गई है और आगे की कार्रवाई राजस्व विभाग करेगा। इसके बावजूद मौके पर कोई टीम नहीं पहुंची और कथित अवैध खनन जारी रहा। बाद में 17 जुलाई को दोबारा पूछने पर खनन अधिकारी ने कहा कि यदि उन्हें सटीक लोकेशन उपलब्ध कराई जाती है तो वे मौके पर जाकर कार्रवाई करेंगे।

वहीं, कुंभी ब्लॉक के खंड विकास अधिकारी महावीर प्रसाद ने मामले से अनभिज्ञता जताते हुए कहा कि इस खनन का उनके कार्यालय से कोई संबंध नहीं है और उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं है।

दूसरी ओर, तहसीलदार गोला अरुण कुमार ने बताया कि उन्हें गांव के एक व्यक्ति से मामले की जानकारी मिली है। उन्होंने लेखपाल को मौके पर भेजकर जांच कराने की बात कही। हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि जब तक जांच के निर्देश दिए गए, तब तक सरकारी भूमि से बड़ी मात्रा में मिट्टी निकाली जा चुकी थी।
इधर, ग्राम पंचायत जड़ौरा के प्रधान पति आशीष मिश्रा ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि उन्हें खनन की कोई जानकारी नहीं है और जिस समय खनन होने का दावा किया जा रहा है, उस समय वह किसी आवश्यक कार्य से गांव से बाहर थे।
अब पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि संबंधित अधिकारियों को समय रहते सूचना मिल गई थी, तो कथित अवैध खनन को तत्काल क्यों नहीं रोका गया? विभागों के अलग-अलग बयान प्रशासनिक समन्वय पर भी सवाल खड़े कर रहे हैं।
ग्रामीणों ने मांग की है कि सरकारी भूमि पर हुए कथित अवैध खनन की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए, वायरल वीडियो और अन्य साक्ष्यों की जांच की जाए तथा यदि अनियमितता सिद्ध होती है तो दोषियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।