(महेन्द्र नागौरी)
भीलवाड़ा |स्मार्ट हलचल|शहर के रोडवेज बस स्टैंड परिसर में अव्यवस्थाओं और लापरवाही ने यात्रियों की परेशानी बढ़ा दी है। शौचालय के समीप खुला पड़ा टैंक जहां हादसे को न्योता दे रहा है, वहीं उससे उठती तेज दुर्गंध ने यात्रियों और आसपास के लोगों का जीना दुश्वार कर दिया है। बदबू के कारण कुछ देर परिसर में खड़ा रहना भी लोगों के लिए मुश्किल हो रहा है।
खुला टैंक बना जानलेवा खतरा
बस स्टैंड में प्रतिदिन बड़ी संख्या में यात्रियों की आवाजाही रहती है। ऐसे व्यस्त सार्वजनिक परिसर में शौचालय का टैंक खुला पड़ा होना गंभीर लापरवाही को दर्शाता है। टैंक के आसपास पर्याप्त सुरक्षा घेरा नहीं होने से कभी भी कोई यात्री, बच्चा या बुजुर्ग हादसे का शिकार हो सकता है।
रात के समय खतरा और बढ़ जाता है। पर्याप्त रोशनी के अभाव में खुले टैंक का पता नहीं चलने पर दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
दुर्गंध ने बढ़ाई परेशानी
खुले टैंक से उठती बदबू ने यात्रियों की परेशानी को और बढ़ा दिया है। दुर्गंध के कारण आसपास का वातावरण दूषित बना हुआ है। यात्रियों को बस का इंतजार करने के दौरान बदबू का सामना करना पड़ता है। गर्मी और उमस के बीच स्थिति और ज्यादा परेशान करने वाली हो जाती है।
लोगों का कहना है कि एक तरफ खुला टैंक जान के लिए खतरा बना है तो दूसरी तरफ दुर्गंध स्वास्थ्य और स्वच्छता व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है।
जिम्मेदारों की चुप्पी पर सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि रोडवेज बस स्टैंड जैसे सार्वजनिक स्थल पर खुले टैंक और गंदगी की स्थिति जिम्मेदार अधिकारियों की नजर से कैसे बची हुई है? यदि अधिकारियों को इसकी जानकारी है तो अब तक टैंक को सुरक्षित क्यों नहीं कराया गया?
यात्रियों की मांग है कि टैंक को तत्काल ढकवाया जाए, आसपास मजबूत बैरिकेडिंग कराई जाए, सफाई एवं दुर्गंध की समस्या का स्थायी समाधान किया जाए तथा परिसर में नियमित स्वच्छता व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
लोगों का कहना है कि हादसा होने का इंतजार करने के बजाय जिम्मेदारों को अभी चेतना होगा। आखिर कब तक खुले टैंक और बदबू के बीच यात्री अपनी जान और सेहत दोनों से समझौता करते रहेंगे?
