उपजाऊ जमीन बचाने का प्रयास: आठ गांवों में डैम निर्माण के प्रस्ताव का विरोध, बच्चों ने किया स्कूलों का बहिष्कार, किसान नेताओं का मिला समर्थन

​ सादुलपुर (बजरंग आचार्य )-
स्मार्ट हलचल|सादुलपुर के निकटवर्ती क्षेत्र सिद्धमुख इन दिनों किसान आंदोलन का मुख्य केंद्र बनता जा रहा है। क्षेत्र के आठ गांवों के ग्रामीण अपनी कृषि भूमि पर प्रस्तावित डैम निर्माण के खिलाफ पिछले तीन सप्ताह से गांव ताम्बाखेड़ी में धरने पर बैठे हैं।जानकारी मुताबिक सोमवार को प्रभावित आठ गांवों के सरकारी व निजी स्कूलों के अनेक छात्र-छात्राएं भी धरना स्थल पर पहुंचे और अपना समर्थन व्यक्त करते हुए आंदोलन में शामिल हो गए।
​यमुना जल परियोजना के अंतर्गत प्रस्तावित वॉटर रिजवायर के निर्माण हेतु राज्य सरकार द्वारा लगभग 800 करोड़ रुपये की टेंडर प्रक्रिया शुरू की गई है। इस परियोजना से धानोठी छोटी, धानोठी बड़ी, दुमकी, ताम्बाखेड़ी, ढीगारला, चुबकियागढ़, रामसरा टिब्बा और हंसियावास गांवों की कृषि भूमि प्रभावित होने की संभावना है। ग्रामीणों का कहना है कि कृषि भूमि के स्थान पर उपलब्ध गैर-कृषि या सरकारी भूमि का उपयोग किया जाना चाहिए।
​इस विषय पर किसानों को शीर्ष किसान नेताओं का भी समर्थन मिल रहा है। शनिवार को भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने ताम्बाखेड़ी पहुंचकर ग्रामीणों के रुख का समर्थन किया। रविवार को किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट धरना स्थल पहुंचे और चूरू जिला कलेक्टर को ज्ञापन भेजकर ग्रामीणों का पक्ष सरकार तक पहुंचाने का आग्रह किया। वहीं सोमवार को किसान नेता सुरेश कोथ ने भी मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों से संवाद किया।
​दूसरी तरफ, ग्रामीणों का कहना है कि पिछले तीन सप्ताह से धरना जारी रहने के बावजूद अभी तक स्थानीय प्रशासन या शासन स्तर से औपचारिक वार्ता की पहल नहीं की गई है, जिससे ग्रामीणों में अपनी मांगों को लेकर चिंता बनी हुई है।