स्मार्ट हलचल|नगर निगम का नाम आते ही अमूमन लोगों के जेहन में लेट-लतीफी और अनसुनी शिकायतों की तस्वीर उभरती है। मगर विजय नगर स्थित स्कीम-54 में घटी एक घटना ने इस आम धारणा को बदला है। यहां एक नागरिक की पहल और निगम कर्मियों की तत्परता ने साबित किया कि व्यवस्था में जवाबदेही अभी जिंदा है।
स्कीम-54 निवासी मानवी अग्रवाल जैन के घर के बगीचे का कचरा जमा था। सुबह 8 बजे उन्होंने कचरा संग्रहण वाहन के कर्मचारी पंकज को इसकी जानकारी दी। पंकज ने बिना टालमटोल किए सूचना तुरंत संबंधित जोन तक पहुंचाई। कुछ ही देर में स्थानीय पार्षद पूजा पाटीदार के प्रतिनिधि मनोज जाधव ने रहवासी से संपर्क कर लोकेशन और कचरे की स्थिति समझी। इसके बाद कार्रवाई में तनिक भी देर नहीं हुई। ठीक सुबह 10:30 बजे निगम की टीम वाहन समेत दरवाजे पर मौजूद थी। औपचारिकता पूरी कर टीम ने कचरा उठाया और रवाना हो गई।
शिकायत दर्ज होने से लेकर समाधान तक—महज ढाई घंटे का वक्त लगा।
मानवी के लिए यह सिर्फ कचरा उठने की राहत नहीं, बल्कि नागरिक चेतना का विषय भी था। उन्होंने कहा, “लापरवाही पर सवाल उठाना नागरिक का लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन वक्त पर बेहतर काम होने पर सराहना करना भी हमारा नैतिक कर्तव्य होना चाहिए।”
अक्सर नागरिक व्यवस्था की खामियों की तस्वीरें खींचकर सोशल मीडिया पर वायरल करते हैं, जो सजगता के लिहाज से जरूरी भी है। लेकिन जब कोई कर्मचारी ईमानदारी से अपनी जिम्मेदारी निभाता है, तब वैसी ही तत्परता तारीफ में कम ही दिखती है। यह घटना कोई चमत्कार नहीं, बल्कि तय जिम्मेदारी का समय पर निर्वहन है। शहर सिर्फ लगातार शिकायतों से नहीं, बल्कि सही काम को मिलने वाली सार्वजनिक सराहना से बेहतर बनता है।