“परिंडा लगाओ, परिंदा बचाओ” से गूंजा खेड़ा पालोला कोठियां

नन्हे हाथों ने उठाया बेजुबान पक्षियों की प्यास बुझाने का संकल्प
108 दाना-पानी पात्र लगाने का लक्ष्य, 500 का व्यापक अभियान
गर्मी में परिंदों के लिए संवेदना और सेवा का अनूठा संदेश
शाहपुरा, मूलचन्द पेसवानी
भारत विकास परिषद गुलाबपुरा के सहयोग से ग्राम खेड़ा पालोला कोठियां स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में वैशाख माह की अमावस्या के अवसर पर शुक्रवार को “परिंडा लगाओ, परिंदा बचाओ” कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम का आगाज विद्यालय प्रबंधन समिति अध्यक्ष रामकुमार चैधरी, विकास समिति अध्यक्ष रामप्रसाद चैधरी के मुख्य आतिथ्य एवं पूर्व वार्ड पंच कालूराम भील की उपस्थिति में हुआ।
इस अभियान के तहत “हर घर परिंडा” का संदेश देते हुए 108 दाना-पानी के पात्र लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। साथ ही सार्वजनिक स्थलों एवं छायादार पेड़ों पर लगाए गए परिंदों की देखभाल की जिम्मेदारी विद्यार्थियों को सौंपी गई, जिससे उनमें जिम्मेदारी और संवेदनशीलता का भाव विकसित हो सके।
कार्यक्रम में नन्हे-मुन्ने बच्चों ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया और बेजुबान परिंदों के लिए दाना-पानी की व्यवस्था करने का संकल्प लिया। बच्चों के उत्साह ने कार्यक्रम को जीवंत बना दिया और “छोटे हाथ, बड़ा काम” की मिसाल पेश की।
राजस्थान राज्य भारत स्काउट गाइड के कब मास्टर यूनिट लीडर अखत्यार अली ने बताया कि यह कार्यक्रम हर वर्ष पर्यावरण संरक्षण एवं जैव विविधता के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित किया जाता है। भीषण गर्मी में प्यास से तड़पते पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था करना मानवीय संवेदना का श्रेष्ठ उदाहरण है, जिसे बच्चे पूरे उत्साह के साथ निभा रहे हैं।
भारत विकास परिषद शाखा गुलाबपुरा के अध्यक्ष संपत व्यास ने बताया कि पूरे क्षेत्र में 500 दाना-पानी के पात्र लगाने का लक्ष्य रखा गया है। इस दौरान पूर्व प्रांतीय पदाधिकारी किशोर राजपाल, पूर्व उपाध्यक्ष रतन लाल लखारा, वरिष्ठ सदस्य नंदकिशोर काबरा, जयप्रकाश जायसवाल एवं मुक्तिधाम प्रकल्प प्रभारी सत्यनारायण अग्रवाल ने भी परिंडे लगाकर आमजन को पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
कार्यक्रम प्रभारी सरोज चैधरी ने बताया कि इस पहल से विद्यार्थियों में जीव-जंतुओं के प्रति दया, संवेदनशीलता और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है। विद्यार्थियों को परिंडे वितरित कर उन्हें घर-घर एवं सार्वजनिक स्थलों पर लगाने के लिए प्रेरित किया गया।
विद्यालय परिवार की यह अनूठी पहल न केवल बेजुबान पक्षियों के जीवन को बचाने में सहायक बन रही है, बल्कि समाज में संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक तैयार करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है। ग्रीष्मावकाश के दौरान भी विद्यार्थी मिट्टी के बर्तनों में पानी और दाना भरकर परिंदों की सेवा करेंगे, वहीं विद्यालय में वाटर कूलर के माध्यम से बरसात तक परिंदों को पानी उपलब्ध कराया जाएगा।