आसींद। पुलिस की वर्दी का नाम आते ही आंखों के सामने अनुशासन,कानून और सख्ती की तस्वीर उभरती है। लेकिन कभी-कभी यही खाकी किसी के लिए सुरक्षा का एहसास बन जाती है,किसी के दुख में सहारा बन जाती है और किसी परिवार के लिए अपने सदस्य जैसी हो जाती है। आसींद क्षेत्र में करीब 18 वर्षों तक अपनी सेवाएं देने वाले एएसआई श्रवण कुमार विश्नोई ऐसे ही पुलिस अधिकारी रहे,जिन्होंने खाकी को केवल नौकरी नहीं,बल्कि जनसेवा का माध्यम बनाया। श्रवण कुमार विश्नोई का गृह जिला जोधपुर स्थानांतरण के आदेश जैसे ही सामने आए,पूरे आसींद क्षेत्र में भावनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा। विदाई के दिन ऐसा दृश्य देखने को मिला,जिसे लोगों ने अपने जीवन में शायद पहली बार देखा।सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण,व्यापारी,जनप्रतिनिधि,सामाजिक कार्यकर्ता,युवाओं से लेकर बुजुर्ग और महिलाएं तक उन्हें विदा करने थाने पर पहुंचीं। फूल-मालाओं से लदे श्रवण कुमार विश्नोई का जगह-जगह स्वागत हुआ।ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच जब विदाई का पल आया तो माहौल भावुक हो गया। कई लोगों की आंखें नम थीं,तो कई गले लगकर रो पड़े। हर कोई एक ही बात कह रहा थ”ऐसे पुलिस अधिकारी किस्मत वालों को मिलते हैं।” ग्रामीणों का कहना था कि आसींद में किसी पुलिस अधिकारी को शायद पहली बार इतना आत्मीय,भव्य और भावनात्मक सम्मान मिला है। यह सिर्फ एक स्थानांतरण नहीं था,बल्कि उस इंसान को विदा करना था जिसने अपने व्यवहार,ईमानदारी और सेवा से लोगों के दिलों में स्थायी जगह बना ली। साल 2006 में जब जोधपुर की धरती से आए एक युवा ने आसींद थाने में कांस्टेबल के रूप में अपनी पहली ज्वाइनिंग दी थी,तब किसी ने नहीं सोचा था कि यही जवान आने वाले वर्षों में आसींद की पहचान बन जाएगा। समय बीतता गया,पद बदलते गए,लेकिन श्रवण कुमार विश्नोई का व्यवहार कभी नहीं बदला। उन्होंने हमेशा जनता को अपना परिवार समझा और हर व्यक्ति की समस्या को अपनी जिम्मेदारी मानकर समाधान का प्रयास किया।
अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई चर्चित और चुनौतीपूर्ण मामलों के खुलासे में अहम भूमिका निभाई। वर्ष 2006 के चर्चित मेमा हत्याकांड में अपराधियों तक पहुंचने के लिए दिन-रात मेहनत की। भगवान देवनारायण की जन्मस्थली मालासेरी के पुजारियों की नृशंस हत्या के मामले में अपने मजबूत मुखबिर तंत्र और सूझबूझ के दम पर आरोपियों को चित्तौड़गढ़ क्षेत्र से गिरफ्तार करवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वर्ष 2008 में सर्राफा व्यापारी के यहां हुई बड़ी लूट के मामले का खुलासा कर व्यापारियों का पुलिस पर विश्वास और मजबूत किया। सिर्फ अपराध नियंत्रण ही नहीं,बल्कि सामाजिक सौहार्द बनाए रखने में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा। वर्ष 2013 में जब आसींद सांप्रदायिक तनाव की चपेट में था, चारों तरफ हिन्दू मुस्लिम की चर्चा थी तब उन्होंने प्रशासन और दोनों समुदायों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर हालात सामान्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उस समय उनकी शांत,संयमित और संवेदनशील कार्यशैली की हर ओर सराहना हुई।
श्रवण कुमार विश्नोई ने कभी पुलिस की जिम्मेदारी को थाने की चारदीवारी तक सीमित नहीं रखा। वे गांव-गांव की चौपालों तक पहुंचे,लोगों को कानून की जानकारी दी,बाल विवाह,सामाजिक कुरीतियों और अपराधों के प्रति जागरूक किया। अवैध शराब और नशे के खिलाफ उन्होंने लगातार अभियान चलाए और युवाओं को नशे से दूर रहकर समाज निर्माण का संदेश दिया। यही कारण रहा कि लोग उन्हें केवल पुलिस अधिकारी नहीं,बल्कि समाज सुधारक के रूप में भी पहचानने लगे। साल 2020 में जब पूरा देश कोरोना महामारी से जूझ रहा था और लोग अपने घरों में कैद थे,तब श्रवण कुमार विश्नोई दिन-रात सड़कों पर डटे रहे। जरूरतमंद परिवारों तक राशन पहुंचाना,बीमार और असहाय लोगों की मदद करना,प्रवासी मजदूरों को सहयोग देना और लोगों को सुरक्षित रखना उनकी प्राथमिकता बन गई। उनकी इसी निस्वार्थ सेवा से प्रभावित होकर कोरोना काल के बाद दौलतगढ़ क्षेत्र की जनता ने उनका ऐतिहासिक नागरिक अभिनंदन किया था, जिसकी चर्चा आज भी लोग गर्व से करते हैं।
उनकी उत्कृष्ट सेवाओं को देखते हुए उन्हें ब्लॉक,जिला और विभिन्न सामाजिक संस्थाओं द्वारा अनेक बार सम्मानित किया गया। वर्ष 2025 में तत्कालीन भीलवाड़ा पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र यादव ने उन्हें राजस्थान पुलिस के प्रतिष्ठित “सामुदायिक पुलिसिंग अवार्ड” से सम्मानित किया। यह सम्मान केवल एक पुरस्कार नहीं,बल्कि जनता और विभाग के बीच बनाए गए विश्वास की पहचान था। विदाई समारोह में मौजूद लोगों ने कहा कि श्रवण कुमार विश्नोई ने कभी किसी व्यक्ति के साथ पद या पहचान देखकर व्यवहार नहीं किया। गरीब हो या अमीर,किसान हो या व्यापारी,युवा हो या बुजुर्ग हर किसी को उन्होंने समान सम्मान दिया। यही वजह है कि आज उनकी विदाई पर पूरा आसींद परिवार की तरह भावुक दिखाई दिया। भावुक माहौल के बीच श्रवण कुमार विश्नोई ने भी कहा कि”आसींद मेरे लिए सिर्फ पोस्टिंग नहीं रही,यह मेरी कर्मभूमि और दूसरा घर है। यहां के लोगों ने मुझे जो सम्मान,अपनापन और प्यार दिया है,उसे मैं जीवनभर नहीं भूल पाऊंगा।” आज श्रवण कुमार विश्नोई अपने गृह जिले जोधपुर में नई जिम्मेदारी निभाने जा रहे हैं, लेकिन आसींद की गलियों,चौपालों और लोगों के दिलों में उनकी पहचान हमेशा जिंदा रहेगी। खाकी पहनने वाले बहुत मिलेंगे,लेकिन जनता के दिलों में जगह बनाने वाले बहुत कम होते हैं।आसींद की जनता की ओर से श्रवण विश्नोई को एक संदेश दिया की “श्रवण 18 वर्षों तक जिस ईमानदारी,संवेदनशीलता और समर्पण से कस्बे में सेवा की,उसके लिए पूरा आसींद हमेशा आपका ऋणी रहेगा। हमारी दुआ है कि आप जहां भी रहें सुरक्षित रहें,स्वस्थ रहें और अपनी इसी कार्यशैली से लोगों के दिल जीतते रहें।आसींद आपको कभी नहीं भूलेगा।”
