नाम वापसी से पहले जहाजपुर में सियासी ‘सस्पेंस’! निर्दलीयों ने उलझाया चुनावी गणित

कल तय होगा कौन मैदान में, कौन हटेगा पीछे; नरेश मीणा-कांता देवी के निर्दलीय मैदान में रहने से भाजपा की बढ़ी चिंता

अलकेश पारीक

जहाजपुर। स्मार्ट हलचल|नगर पालिका चुनाव में नामांकन का दौर खत्म होते ही अब जहाजपुर की सियासत में असली हलचल शुरू हो गई है। कल नाम वापसी की अंतिम तारीख है और इसके साथ ही चुनावी मैदान की तस्वीर काफी हद तक साफ हो जाएगी। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि टिकट से नाराज होकर निर्दलीय उतरे दावेदार मैदान में डटे रहते हैं या फिर राजनीतिक मान-मनुहार के बाद अपना नाम वापस लेते हैं।

जहाजपुर के 25 वार्डों में कांग्रेस ने 24 वार्डों में अपने प्रत्याशी उतारे हैं। भाजपा ने भी अपने प्रत्याशियों के साथ चुनावी मैदान संभाल लिया है। लेकिन कई वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशियों की मौजूदगी ने मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। खासकर भाजपा के सामने टिकट वितरण के बाद उभरी निर्दलीय चुनौती को साधना आसान नजर नहीं आ रहा।

नरेश-कांता की एंट्री से बदले समीकरण

इन सबके बीच सबसे ज्यादा चर्चा निवर्तमान पालिका अध्यक्ष नरेश मीणा और उनकी पत्नी कांता देवी मीणा के निर्दलीय मैदान में होने को लेकर है। दोनों अलग-अलग वार्डों से चुनावी मैदान में हैं। ऐसे में इनके चुनाव मैदान में बने रहने से भाजपा के सामने अपने प्रत्याशियों को मजबूत रखने के साथ-साथ वार्डवार समीकरण साधने की चुनौती बढ़ गई है।

कांग्रेस से ज्यादा निर्दलीयों का ‘फैक्टर’ चर्चा में

जहाजपुर के चुनावी समीकरणों में इस बार कांग्रेस और भाजपा की सीधी टक्कर के साथ निर्दलीय फैक्टर भी अहम भूमिका निभाता दिखाई दे रहा है। कुछ वार्डों में निर्दलीयों की मौजूदगी मुकाबले को त्रिकोणीय तो कुछ जगह बहुकोणीय बना सकती है। ऐसे में निर्दलीय प्रत्याशी किस दल के वोट बैंक में सेंध लगाते हैं, इसका सीधा असर चुनाव परिणाम पर पड़ सकता है।

आज मान-मनुहार, कल सामने आएगी असली तस्वीर

नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद आज राजनीतिक गलियारों में दिनभर मान-मनुहार, समझाइश और सियासी जोड़-तोड़ की चर्चाएं चलती रहीं। दोनों प्रमुख दलों की नजर अब उन प्रत्याशियों पर है, जो टिकट नहीं मिलने या अन्य कारणों से निर्दलीय मैदान में उतर चुके हैं।

कल नाम वापसी के बाद यह साफ हो जाएगा कि कौन मैदान छोड़ता है और कौन अपनी चुनौती बरकरार रखता है। इसके बाद ही हर वार्ड में मुकाबले की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।

फिलहाल जहाजपुर के चुनाव में प्रत्याशी तो सामने आ चुके हैं, लेकिन मुकाबले का असली रोमांच अभी बाकी है। कल नाम वापसी के बाद तय होगा कि चुनावी मैदान में कितने खिलाड़ी बचते हैं और किसके सामने किसकी चुनौती खड़ी रहती है।

अब नजर कल पर—कौन मानेगा, कौन डटेगा और कौन बिगाड़ेगा किसका गणित?