ज्ञानरूपी सूर्य एक बार उदित होकर कभी अस्त नही होता: प्रतिभा श्री जी

ओम जैन

शंभूपुरा।स्मार्ट हलचल|सेन्थी स्थित शांति भवन में चातुर्मासिक प्रवचन के दौरान जैन सिद्धान्ताचार्य श्री प्रतिभा श्री जी म. सा. ने फरमाया कि भौतिक संसार मे प्रकाश के दो प्रतिमान होते है एक दीपक व दूसरा सूर्य। सूर्य दिपक से श्रेष्ठ है किन्तु इसमे कुछ दोष बताए गए है।
सूर्य सायंकाल मे अस्त होता है बादलो से आच्छादित होता है और राहु ग्रसित होता है। लोगस मे कहा गया है आईचेसु अहिय पयासयरा। प्रातः काल मे सूर्य उदित होता है और सन्ध्याकाल मे अस्त हो जाता है किन्तु प्रभु आपका ज्ञानरूपी सूर्य एक बार उदित होकर कभी अस्त नही होता है। नभ सूर्य राहु द्वारा ग्रसीत होता है तब पृथ्वी पर दिन मे भी रात्री जैसा अंधकार छा जाता है। नभ सूर्य बादलो के आच्छादन से अदृश्य हो जाता है जैसे पे टी मे पड़ा सोना आच्छादित रहता है। सूर्य सीमित क्षेत्र मे प्रकाश देता है किन्तु हे भगवन् आप मोहकर्म ज्ञानवर्णीय कर्मो से प्रयुक्त है। आपका केवल ज्ञान रूपी सूर्य तीनो लोको मे प्रकाशित रहता है।
उन्होंने बताया कि ज्योतिषशास्त्र मे राहु केतु और शनि पीड़ादायक ग्रह माने जाते है। यह ग्रह अमंगल भाव के सूचक है। इस अमंगल को हटाने के लिए धार्मिक अनुष्ठान पानी की शीतल फुहार के समान है।
साध्वी दीक्षिता श्रीजी म.सा., साध्वी प्रेक्षा श्रीजी, ओर साध्वी प्रेरणा श्रीजी म.सा ने भी अपने प्रवचन से लाभान्वित किया।
अनवरत नवकार मंत्र जाप की श्रृंखला मे 3 सितम्बर गुरुवार का जाप रोशनलाल चोपड़ा की तरफ से रखा गया है।
श्री संघ सेन्थी ने प्रतिदिन प्रवचन एवं जाप में अधिकाधिक संख्या मे पधारकर धर्म रूपी हवन मे आहुतियां प्रज्जवलित करने का आव्हान किया।