ठेकेदार की संवेदनहीन करतूत, बच्चों से मरी हुई मछलियां उठवाई, बढ़ा विवाद
गंगापुर । पोटलां कस्बे के प्रमुख जलस्रोत पोटलां तालाब’ में रविवार को अचानक हजारों की संख्या में मछलियों के मरने से हड़कंप मच गया। तालाब की सतह पर तैरती मछलियों के कारण पूरे क्षेत्र में दुर्गंध फैल गई , जिससे स्थानीय लोगों का जीना दूभर हो गया । इस गंभीर स्थिति को देखते हुए गंगापुर उपखंड अधिकारी विवेक गुर्जर ने मामले में कार्रवाई करते हुए जल संसाधन विभाग, सहाड़ा तहसीलदार व पशुपालन विभाग के आला अधिकारियों को मामले को लेकर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। वहीं सिंचाई विभाग, वन विभाग और स्थानीय पटवारी ने मौके पर पहुँचकर स्थिति का जायजा लिया। लेकिन इस बीच ठेकेदार की एक संवेदनहीन करतूत सामने आई है, जिसने पूरे मामले को और भी विवादास्पद बना दिया है।
प्रशासन और विभागों का संयुक्त निरीक्षण
मछलियों के मरने की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन हरकत में आया। मौके पर पहुँचे संबंधित विभागों के कर्मचारियों ने तालाब की स्थिति का जायजा लिया और स्थिति का निरीक्षण किया। प्रारंभिक तौर पर यह आशंका जताई जा रही है कि पानी में ऑक्सीजन की कमी, प्रदूषण या किसी जहरीले पदार्थ के मिलने से यह हादसा हो सकता है। प्रशासन मछलियों के मरने के कारणों का पता लगा रहा है। वही मरी हुई मछलियों का पोस्टमार्टम किया जा रहा है।राजस्व विभाग के पटवारी ने मौका व पंचनामा तैयार कर अधिकारियों को रिपोर्ट भेजी।
ठेकेदार की संवेदनहीनता मासूमों से उठवाया मृत मछलियों का ढेर
मछलियां मरने के दौरान ही सोमवार सुबह एक बेहद चौंकाने वाला और शर्मनाक मामला सामने आया। तालाब का ठेका लेने वाले ठेकेदार ने कानूनी कार्रवाई और बदनामी से बचने के लिए आनन-फानन में मरी हुई मछलियों को तालाब से बाहर निकलवाना शुरू कर दिया। चौंकाने वाली बात यह है कि इस काम के लिए ठेकेदार ने छोटे-छोटे मासूम बच्चों का सहारा लिया। ये बच्चे अपने हाथों से बिना किसी सुरक्षा उपकरण के सड़ती हुई मछलियों को उठाकर प्लास्टिक कट्टों और बोरियों में भर रहे थे। यह न केवल बाल श्रम का उल्लंघन है, बल्कि उन बच्चों के स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा पैदा करने वाला कृत्य है।
स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश
सोमवार सुबह ग्रामीण घटनास्थल की तरफ तालाब की पाल से गुजर रहे थे इस दौरान दो छोटे बच्चों द्वारा मरी हुई मछलियों को उठाते हुए देखा इस पर लोगों ने ठेकेदार की इस हरकत पर तीव्र आक्रोश व्यक्त किया है। ग्रामीणों का कहना है कि मछलियों के सड़ने से फैल रही दुर्गंध से संक्रामक बीमारियाँ फैलने का खतरा बना हुआ है। ठेकेदार ने सबूत मिटाने के चक्कर में बच्चों की जान जोखिम में डाल दी । प्रशासन को ठेकेदार के खिलाफ बाल श्रम और लापरवाही बरतने के आरोप में सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की गई।
पर्यावरण पर मंडराया संकट
पर्यावरणविदों के अनुसार, इतनी बड़ी संख्या में मछलियों की मौत स्थानीय प्रशासनिक तंत्र के लिए एक बड़ा संकेत है। यदि तालाब का पानी इसी तरह प्रदूषित रहा, तो यह न केवल तालाब में पल जलजीवों के लिए, बल्कि आसपास के लोगों के लिए भी गंभीर स्वास्थ्य समस्या बन सकता है। तालाब में रोज चरने वाले गाय, भैंस, बकरी सहित अनेक मवेशियों पानी पिने का एक मात्र जल स्रोत यही है ऐसे में पशुओं की जान के साथ भी खिलवाड़ हो सकता है। प्रशासन जल्द ही पानी के नमूने लेकर जांच करवाकर आगे की कार्रवाई करे, और मवेशियों की सुरक्षा की व्यवस्था कि जावे ताकि ऐसे हादसे की पुनरावृत्ति ना हो सके।

