चयन तिथि अंकन लंबित रहने पर शिक्षा निदेशालय के खिलाफ बनाई रणनीति
चित्तौड़गढ़, स्मार्ट हलचल। राजस्थान शिक्षा सेवा परिषद प्रधानाचार्य (रैसा-पी) की जिला कार्यकारिणी की बैठक बुधवार को मधुबन स्थित हाथीकुंड मंदिर परिसर में संरक्षक एवं राष्ट्रपति पुरस्कृत डॉ. गोविंद राम शर्मा की अगुवाई में आयोजित हुई। बैठक में पदोन्नत प्रधानाचार्यों की चयन तिथि अंकन प्रक्रिया लंबे समय से लंबित रहने पर शिक्षा निदेशालय बीकानेर के प्रति गहरा रोष व्यक्त किया गया तथा आंदोलन की रणनीति तैयार की गई।
संघ के जिला अध्यक्ष दिलीप कुमार जैन ने बताया कि माननीय शिक्षा मंत्री द्वारा बार-बार निर्देश दिए जाने और शासन स्तर से आदेश जारी होने के बावजूद सत्र 2015-16 से 2019-20 तक पदोन्नत प्रधानाचार्यों की पदोन्नति तिथि अंकन का कार्य अब तक पूरा नहीं किया गया है। इससे प्रधानाचार्य वर्ग में भारी नाराजगी और असंतोष व्याप्त है।
उन्होंने बताया कि सत्र 2017-18 में पदोन्नत हुए 1970 प्रधानाचार्यों में से केवल कुछ की ही पदोन्नति तिथि 01 अप्रैल 2017 का अंकन वर्ष 2022 में किया गया, जबकि शेष हजारों प्रधानाचार्य आज भी इस प्रक्रिया से वंचित हैं।
जैन ने कहा कि 03 मार्च 2015 को वित्त विभाग द्वारा 4999 प्रधानाचार्य पदों की स्वीकृति दिए जाने के बावजूद निदेशालय स्तर पर आवश्यक कार्रवाई में शिथिलता बरती गई। संघ का आरोप है कि डीपीसी विभाग में कार्यरत अधिकारियों एवं कर्मचारियों की लापरवाही के कारण करीब 8000 प्रधानाचार्यों का चयन वरिष्ठता अंकन लंबित पड़ा हुआ है।
रैसा-पी जिला कोषाध्यक्ष श्याम लाल लुहाड़िया ने बताया कि तिथि अंकन को लेकर आगामी 1 जून को जिला प्रतिनिधिमंडल द्वारा सांसद एवं विधायक से वार्ता की जाएगी। साथ ही जिला कलेक्टर के माध्यम से शिक्षा मंत्री एवं शिक्षा निदेशालय को ज्ञापन सौंपा जाएगा। इसके बाद प्रदेश नेतृत्व के निर्देशानुसार आंदोलन शुरू किया जाएगा।
बैठक में संरक्षक आनंद कुमार दीक्षित, सभाध्यक्ष भैरूलाल वीरवाल, जिला मंत्री भगवान लाल सुधार, महिला मंत्री अनुराधा आर्य, अतिरिक्त मंत्री संजय कोदली, संगठन मंत्री सतीश कुमार दशोरा, हरीश न्याति, राजकुमार तोलंबिया, नजीराम जाट, सुभाष मेडतवाल सहित कई प्रधानाचार्य उपस्थित रहे।
