सरकारी अमले की खुली सांठगांठ ! राजकोष को लगा करोड़ों का चूना, जनहित के पैसे पर निजी व्यवसायियों की ‘ऐश’ !

आकाश शर्मा

चित्तौड़गढ़।स्मार्ट हलचल|ऐतिहासिक और स्वाभिमानी धरा चित्तौड़गढ़ की नगर परिषद में वित्तीय अराजकता, भ्रष्टाचार और राजस्व लूट का ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने समूचे प्रशासनिक तंत्र की नींद उड़ा दी है  ! स्थानीय निधि अंकेक्षण विभाग की ताजातरीन ऑडिट रिपोर्ट (वर्ष 2024–2025) ने नगर परिषद के उन काले कारनामों से पर्दा उठा दिया है, जिन्हें अब तक कागजों की धूल तले दबाकर रखा गया था । एक तरफ जहां शहर की जनता सड़क, पानी, सफाई और बुनियादी सुविधाओं के तरस रही है, वहीं दूसरी तरफ नगर परिषद का जिम्मेदार अमला अपने ही अधिकार क्षेत्र की करोड़ों रुपये की राजस्व वसूली दबाकर बैठा हुआ है । शहर के बड़े मैरिज गार्डन संचालकों, रसूखदार टेलीकॉम कंपनियों और व्यावसायिक संपत्तियों पर काबिज प्रभावशाली लोगों पर मेहरबानी बरसाते हुए 2.34 करोड़ से अधिक का राजस्व डकारने की खुली छूट दे दी गई ! यह सिर्फ एक प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि सार्वजनिक धन के साथ किया गया बहुत बड़ा विश्वासघात और आपराधिक वित्तीय कुप्रबंधन है !

राजस्व की घोर अनदेखी और करोड़ों रुपए की वसूली का महा-घोटाला !

ऑडिट रिपोर्ट के पन्नों में दर्ज तथ्य और आंकड़े इतने विस्फोटक हैं कि वे नगर परिषद प्रशासन की निष्ठा और नियत पर गंभीर सवालिया निशान खड़े करते हैं। नियम-कानूनों की धज्जियां उड़ाते हुए राजकोष को 2.34 करोड़ से अधिक की सीधी चपत लगाई गई है । जानिए इस महा-वित्तीय लापरवाही की परत-दर-परत सच्चाई ।

विवाह स्थलों (मैरिज गार्डनों) पर मेहरबानी !

बकाया राजस्व राशि 99,03,020/- चित्तौड़गढ़ शहर में दर्जनों लग्जरी मैरिज गार्डन और विवाह स्थल धड़ल्ले से कमर्शियल बुकिंग कर लाखों-करोड़ों रुपए पीट रहे हैं, लेकिन नगर परिषद ने इनसे नियमानुसार देय पंजीकरण शुल्क, वार्षिक अनुमति शुल्क और विलंब शास्ति (Penalty) की वसूली करना तो दूर, सख्त नोटिस तक जारी करने की जहमत नहीं उठाई । ऑडिट में आक्षेप है कि यह निजी मैरिज गार्डन व्यवसायियों को अप्रत्यक्ष रूप से अनुचित वित्तीय लाभ पहुँचाने का खुला खेल है। जनता से टैक्स वसूलने वाली परिषद ने इन रसूखदारों के आगे घुटने टेक रखे हैं !

कॉरपोरेट टेलीकॉम कंपनियों से सांठगांठ !

बकाया राजस्व राशि 82,41,720/- शहर के कोने-कोने और घनी आबादी वाले इलाकों में स्थापित विशालकाय मोबाइल टावरों से प्राइवेट टेलीकॉम कंपनियां हर महीने करोड़ों का बिजनेस उठा रही हैं। लेकिन नगर परिषद इनसे अपना वाजिब वार्षिक अनुज्ञा शुल्क  तक वसूल नहीं कर पाई  । ऑडिट में आक्षेप है कि आम आदमी का छोटा सा चालान काटने में फुर्ती दिखाने वाला प्रशासन इन अरबपति टेलीकॉम कंपनियों पर कार्रवाई करने (टावर सील करने या कनेक्शन काटने ) से क्यों कतरा रहा है ? यह अधिकारियों की संदिग्ध कार्यप्रणाली और मिलीभगत की ओर सीधा इशारा करता है !

परिषद की अपनी संपत्तियों पर अवैध कब्जे की छूट !

बकाया राजस्व राशि 53,18,998/- नगर परिषद की बेशकीमती जमीनों, दुकानों और भवनों का व्यावसायिक उपयोग करने वाले किरायेदार सालों से बिना किराया दिए मजे मार रहे हैं। ऑडिट में आक्षेप है कि परिषद की अपनी संपत्ति से 53 लाख से अधिक का किराया बकाया होना प्रशासनिक निकम्मेपन की पराकाष्ठा है । न तो बकायादारों से पाई-पाई वसूली गई और न ही बेदखली की कोई वैधानिक कार्रवाई की गई ।

अन्य मदों में राजस्व की खुली बर्बादी और फर्जीवाड़ा !

मवेशी ठेका घोटाला मृत मवेशियों के चमड़े/हड्डी का ठेका बीच में छोड़ने वाले ठेकेदार की अमानत राशि जब्त नहीं की गई और नया ठेका नहीं करके राजकोष को 85,000/- की चपत अलग से लगाई गई। यूडी टैक्स और कचरा संग्रहण शुल्क गोल -नगरीय विकास कर (UD Tax) और डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन के नाम पर वसूली जाने वाली यूजर चार्ज राशि का सर्वे ही नहीं कराया गया। होटल, रेस्टोरेंट व डेयरी बूथ शहर के प्रमुख होटलों से लाइसेंस फीस, दूध बूथों से किराया और बहुमंजिला इमारतों से भवन पूर्णता प्रमाण-पत्र शुल्क वसूलने में भारी हेराफेरी की गई। लूट का कुल हिसाब ! दो करोड़ चौंतीस लाख तिरेसठ हजार सात सौ चालीस रुपये मात्र ।

ऑडिट टीम की तीखी सिफारिशें और कड़ी चेतावनी !

विशेष वसूली अभियान व सीलिंग की कार्रवाई की जायें -राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 की सख्त धाराओं के तहत सभी डिफ़ॉल्टरों को अंतिम नोटिस जारी कर तुरंत बैंक खाते कुर्क किए जाएं, मैरिज गार्डन व मोबाइल टावर सील किए जाएं । दोषी अधिकारियों के वेतन से रिकवरी की जायें- राजस्व वसूली दबाकर बैठने वाले तात्कालिक अधिकारियों, राजस्व निरीक्षकों और जिम्मेदार कर्मियों की जवाबदेही तय की जाए तथा इस पूरी 2.34 करोड़ की राशि की वसूली उनके वेतन व पेंशन से की जाए । उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की जायें – इस पूरे प्रकरण में निजी फर्मों को फायदा पहुंचाने के एवज में हुए संभावित भ्रष्टाचार की जांच हेतु एसीबी (ACB) या उच्च स्तरीय जांच कमेटी गठित की जाए ।