बी एम राठौर
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सांगोद, 5 नवम्बर।स्मार्ट हलचल|देश की ऊर्जा शक्ति के रूप में तेजी से उभर रहे राजस्थान ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अनूठी पहचान बनाई है। नई दिल्ली के प्रतिष्ठित भारत मंडपम में आयोजित “भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट एवं एक्सपो 2026” के दौरान राजस्थान को अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए देश में तृतीय स्थान प्राप्त हुआ है। उपराष्ट्रपति श्री सीपी राधाकृष्णन ने यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया, जिसे प्रतिनिधि के रूप में ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने गर्व के साथ स्वीकार किया।
राष्ट्रीय सम्मान समारोह में ऊर्जा मंत्री श्री हीरालाल नागर ने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के कुशल नेतृत्व में प्रदेश नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में निरंतर नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। आज राजस्थान में कुल 51.6 गीगावाट अक्षय ऊर्जा और 45 गीगावाट सौर ऊर्जा क्षमता स्थापित हो चुकी है। यह आंकड़े इस बात का प्रमाण हैं कि राजस्थान अब केवल ऊर्जा उत्पादन करने वाला राज्य नहीं, बल्कि देश की ऊर्जा आवश्यकताओं को दिशा देने वाला अग्रणी राज्य बन चुका है।
*पीएम-कुसुम योजना और विभिन्न मानकों में शीर्ष पर*
ऊर्जा मंत्री ने रेखांकित किया कि प्रदेश अक्षय ऊर्जा उत्पादन, स्थापित सौर क्षमता और ‘प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान’ (पीएम-कुसुम) योजना में देश में प्रथम स्थान पर है। नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मूल्यांकन तंत्र के अंतर्गत यह सम्मान केवल उत्पादन आंकड़ों के आधार पर नहीं, बल्कि नीतिगत एवं नियामकीय व्यवस्था, ग्रिड की तैयारी, डिस्कॉम के प्रदर्शन और निवेश के अनुकूल माहौल जैसे महत्वपूर्ण मानकों पर खरा उतरने के बाद मिला है। केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा भी राजस्थान के इन प्रयासों की विशेष सराहना की गई है।
*विकसित एवं आत्मनिर्भर राजस्थान का संकल्प*
मंत्री हीरालाल नागर ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक देश के 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित क्षमता के लक्ष्य में अपनी अहम भूमिका निभाना है। सौर और पवन ऊर्जा के साथ-साथ ऊर्जा भंडारण, ग्रीन हाइड्रोजन और आधुनिक ट्रांसमिशन नेटवर्क के विकास पर तेजी से काम किया जा रहा है। यह उपलब्धि प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करने, किसानों की आय बढ़ाने और राजस्थान को देश का सबसे मजबूत व विश्वस्तरीय ऊर्जा केंद्र बनाने की दिशा में एक सशक्त कदम है।