घूमर की सुर-लहरियों से गूंजा रामेश्वरम, 5000 से अधिक दर्शकों ने लिया राजस्थानी लोक संस्कृति का आनंद

भाविप स्वामी विवेकानंद की ‘घूमर’ संध्या में उमड़ा जनसैलाब, संस्कृति के मंच से सेवा का संदेश*

भीलवाड़ा में सजी यादगार सांस्कृतिक संध्या, 11 लोकगीत, 7 नृत्य शैलियां और 5000 दर्शक, ‘घूमर’ ने रचा सांस्कृतिक उत्सव

अध्यक्ष गिरीश अग्रवाल के संयोजन में बना यादगार आयोजन, सेवा प्रकल्पों के लिए जुटाई सहयोग राशि

पंकज पोरवाल
भीलवाड़ा ।स्मार्ट हलचल|राजस्थानी लोकगीतों की मिठास, घूमर की मनमोहक प्रस्तुतियों और सुर-ताल के संगम ने रामेश्वरम सभागार को लोक संस्कृति के रंगों से सराबोर कर दिया। भारत विकास परिषद स्वामी विवेकानंद के 37वें पावन पर्व के उपलक्ष्य में आयोजित सांस्कृतिक संध्या ‘घूमर’ में 5 हजार से अधिक दर्शकों ने शिरकत की। ढाई घंटे तक चले कार्यक्रम में कलाकारों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। खास बात यह रही कि लोक संस्कृति के इस उत्सव को परिषद के बहुउद्देशीय सेवा केंद्र के प्रकल्पों के लिए निधि समर्पण से भी जोड़ा गया। मंच से जैसे ही ‘पधारो म्हारे देश’ के स्वर गूंजे, सभागार तालियों से गूंज उठा। वीणा म्यूजिक जयपुर के गायक मुकेश चांवरिया (सरूपिया) और सुप्रिया की जुगलबंदी ने ‘केसरिया बालम’, ‘ओढ़नी’, ‘वारी जाऊं री घूमर छायो नकराळी मां’, ‘म्हारो घूमर छे नखरालो’ और ‘गोरबंद नखरालो’ सहित 11 लोकगीतों की प्रस्तुति देकर समां बांध दिया। शो डायरेक्टर प्रसन्नजीत मालू और कोरियोग्राफर श्वेता पारीक के निर्देशन में वीणा नृत्य समूह की कलाकार ऋतु, माही, देविका, जयश्री एवं संजय ने पारंपरिक घूमर, गोरबंद, पिया आओ तुम और तेरहताली सहित सात राजस्थानी लोक नृत्य प्रस्तुत किए। नन्हीं बाल कलाकार तक्षी सोडानी की प्रस्तुति ने भी दर्शकों का दिल जीत लिया। एंकर हरीश हिंदुस्तानी के चुटीले अंदाज और इवेंट मैनेजर खुशी अग्रवाल के कुशल संचालन ने कार्यक्रम को यादगार बनाया। यह विशाल आयोजन केवल सांस्कृतिक मनोरंजन तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके पीछे समाज सेवा और सामाजिक सरोकार की एक गहरी भावना निहित थी। परिषद के बहुउद्देशीय सेवा केंद्र के प्रकल्पों के लिए आयोजित निधि समर्पण संध्या में शहरवासियों और दानदाताओं ने सहयोग प्रदान किया। परिषद की सातों शाखाओं के कार्यकर्ताओं ने एक समान पारंपरिक वेशभूषा में अतिथियों के सत्कार और व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी संभाली। सभागार को अयोध्या खंड, काशी खंड, मथुरा खंड एवं चारभुजा खंड में विभाजित किया गया। आयोजन के दौरान अनुशासन और व्यवस्थाओं का विशेष ध्यान रखा गया। कार्यक्रम में शहर विधायक अशोक कोठारी, नगर निगम महापौर जसवंत कंवर सहित अनेक गणमान्यजन मौजूद रहे। आयोजन में मुख्य प्रायोजक एवं सहयोगियों त्रिलोक छाबड़ा, दिनेश भाई, नितिन नोलखा, गोपाल राठी, श्याम चांडक, राधा कृष्ण सोमानी, योगेश भाई, पल्लवी लढा, के.जी. तोषनीवाल, रामपाल सोनी एवं कैलाश सोनी का विशेष सहयोग रहा। परिषद अध्यक्ष गिरीश अग्रवाल के संयोजन तथा सचिव के.जी. सोनी, आदित्य मानसिंहका, पारस मल बोहरा, कैलाश अजमेरा, सुमित जागेटिया और कैलाश घरगोई सोनी सहित सदस्यों के प्रयासों से आयोजन सफल रहा। भीलवाड़ा में सांस्कृतिक विरासत को संजोने की दिशा में परिषद का यह तीसरा बड़ा आयोजन था। इससे पहले वर्ष 2006 में वीणा म्यूजिक का कार्यक्रम और वर्ष 2023 में ‘घर एक मंदिर’ नाट्य प्रस्तुति आयोजित की गई थी। परिषद ने आयोजन की सफलता के लिए शहरवासियों, सातों शाखाओं के कार्यकर्ताओं और दानदाताओं का आभार व्यक्त किया।