* विभागीय मुद्दों, पदोन्नति एवं पदों की स्वीकृति को लेकर हुआ विस्तृत मंथन
शिवराज बारवाल मीना
टोंक।स्मार्ट हलचल|राजस्थान शिक्षा सेवा परिषद – उप प्राचार्य (रेशा वीपी) का जिला स्तरीय शैक्षिक सम्मेलन 19 सितंबर 2026 को संपन्न हुआ। दो दिवसीय सम्मेलन की शुरुआत 18 सितंबर को कोठीनातमाम, टोंक में हुई।
सम्मेलन की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष हेमराज मीणा ने की।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक एवं एडीईओ कृष्ण गोपाल शर्मा तथा प्रारंभिक शिक्षा के एडीईओ महेश शर्मा रहे। विशिष्ट अतिथियों के रूप में पूर्व एडीईओ चौथमल चौधरी, वरिष्ठ उप जिला शिक्षा अधिकारी राम प्रसाद मीणा, कुंभाराम चौधरी, निपुण सक्सेना, मुशीर अहमद, राजा राम मीणा, शिव शंकर चौधरी, धर्मराज चोपदार तथा प्रदेश सभा अध्यक्ष हरिनारायण मीणा मौजूद रहे। इसके अलावा रेशा वीपी के पदाधिकारियों सुरेंद्र चौधरी, सियाराम मीणा, पृथ्वीराज मीणा, राजीव वर्मा, रामफूल चौधरी, गिर्राज मीणा, शशि कला साहू, समरीन, किशन चौधरी एवं ओमप्रकाश वर्मा सहित अन्य पदाधिकारियों एवं शिक्षकों की मौजूदगी में शिक्षा एवं प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श किया गया।
*इन मुद्दों पर हुआ मंथन*
सम्मेलन में उपप्राचार्य की काउंसलिंग प्रक्रिया शीघ्र शुरू करने, उपप्राचार्य से प्राचार्य पद पर पदोन्नति प्रक्रिया जल्द पूरी करने, नव स्वीकृत विद्यालयों में व्याख्याताओं के पद शीघ्र स्वीकृत करने तथा विद्यालयों में आधारभूत ढांचे के विकास पर विशेष जोर देने की मांग उठी। शिक्षकों ने कहा कि विद्यालयों में आवश्यक संसाधन एवं आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध होने से विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। साथ ही शिक्षा एवं प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े अन्य विषयों पर भी विचार साझा किए गए।
*उच्च स्तर पर भेजा जाएगा ज्ञापन*
सम्मेलन में जिलाध्यक्ष हेमराज मीणा ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों एवं शिक्षकों की समस्याओं का पारदर्शी एवं समयबद्ध समाधान विभागीय प्रगति की महत्वपूर्ण कड़ी है। सम्मेलन में विभिन्न मांगों एवं सुझावों को शामिल करते हुए विस्तृत ज्ञापन तैयार कर शासन एवं उच्च अधिकारियों को भेजने का निर्णय लिया गया। समापन अवसर पर प्रदेश सभा अध्यक्ष हरिनारायण मीणा ने रेशा वीपी पद को यथावत रखने की मांग उठाई। उन्होंने सभी वर्गों की डीपीसी प्रक्रिया निरंतर जारी रखने की अपील की। सम्मेलन में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने तथा शिक्षक हितों से जुड़े विषयों को उचित स्तर पर प्रभावी ढंग से उठाने पर भी सहमति बनी।