एजाज़ अहमद उस्मानी
स्मार्ट हलचल।अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नागौर आशा राम चौधरी (आरपीएस) के निर्देशन में औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) नागौर में सड़क सुरक्षा, यातायात नियमों तथा साइबर जागरूकता विषय पर एक दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों एवं प्रशिक्षणार्थियों को सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम, सुरक्षित यातायात व्यवहार और बढ़ते साइबर अपराधों से बचाव के संबंध में विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। कार्यक्रम के प्रथम सत्र में मुख्य वक्ता यातायात उप अधीक्षक पुलिस श्री उम्मेद सिंह ने सड़क सुरक्षा एवं यातायात नियमों की जानकारी देते हुए कहा कि वाहन चलाते समय निर्धारित गति सीमा का पालन करना प्रत्येक चालक की जिम्मेदारी है। उन्होंने वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का उपयोग नहीं करने, नशे की अवस्था में वाहन नहीं चलाने, हेलमेट एवं सीट बेल्ट का अनिवार्य रूप से प्रयोग करने, लेन अनुशासन बनाए रखने, यातायात संकेतों का पालन करने तथा पैदल यात्रियों को प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने बताया कि खतरनाक ओवरटेकिंग और यातायात नियमों की अनदेखी सड़क दुर्घटनाओं का प्रमुख कारण बनती है। विद्यार्थियों को सड़क दुर्घटनाओं से बचाव के लिए आवश्यक सावधानियों के बारे में भी विस्तार से अवगत कराया गया। उप अधीक्षक श्री उम्मेद सिंह ने नाबालिग बच्चों द्वारा वाहन चलाने से संबंधित नए दंडात्मक प्रावधानों की जानकारी देते हुए बताया कि ऐसे मामलों में कड़ी कानूनी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। उन्होंने राहगीर योजना के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने वाले नागरिक को कानूनी झंझटों से मुक्त रखा जाता है तथा उसे प्रोत्साहन स्वरूप 25 हजार रुपये तक की पुरस्कार राशि भी प्रदान की जाती है।
उन्होंने प्रधानमंत्री राहत योजना के अंतर्गत सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को सूचीबद्ध अस्पतालों में पहले सात दिनों तक डेढ़ लाख रुपये की सीमा तक निशुल्क उपचार की सुविधा के बारे में भी जानकारी दी। इसके साथ ही मुख्यमंत्री आयुष्मान सड़क दुर्घटना बीमा योजना का उल्लेख करते हुए बताया कि हिट एंड रन मामलों में अज्ञात वाहन से दुर्घटना होने पर मृतक के परिजनों को दो लाख रुपये तथा घायल व्यक्ति को 50 हजार रुपये तक की सहायता राशि प्रदान की जाती है। कार्यक्रम के द्वितीय सत्र में “साइबर जागरूकता” विषय पर संबोधित करते हुए यातायात उप अधीक्षक श्री उम्मेद सिंह ने कहा कि डिजिटल युग में साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं, इसलिए प्रत्येक नागरिक का जागरूक होना आवश्यक है। उन्होंने साइबर अपराधों के विभिन्न प्रकारों की जानकारी देते हुए स्टेटलोन एप फ्रॉड, इन्वेस्टमेंट फ्रॉड, एपीके फाइल से जुड़े धोखाधड़ी के मामले, फर्जी लॉटरी, पार्सल स्कैम, केवाईसी अपडेट के नाम पर ठगी, ऑनलाइन जॉब फ्रॉड, साइबर स्लेवरी, सिम ब्लॉक एवं बैंक खाता बंद होने संबंधी फर्जी कॉल तथा फर्जी ग्राहक सेवा नंबरों के माध्यम से की जाने वाली ठगी से सावधान रहने की अपील की।
उन्होंने बताया कि साइबर ठग अक्सर लोगों को झांसे में लेकर उनकी निजी एवं बैंकिंग जानकारी हासिल कर लेते हैं, इसलिए किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने, ओटीपी साझा करने अथवा संदिग्ध मोबाइल एप डाउनलोड करने से बचना चाहिए। विद्यार्थियों को विशेष रूप से सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म पर सतर्क रहने की सलाह दी गई। साइबर जागरूकता सत्र के अन्य वक्ता साइबर थाना नागौर के कानिस्टेबल श्री मुकनाराम ने साइबर अपराध होने पर की जाने वाली कानूनी कार्रवाई की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किसी भी प्रकार की साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए तथा साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल के माध्यम से भी शिकायत की जा सकती है।
उन्होंने मोबाइल फोन चोरी अथवा गुम होने की स्थिति में राजकॉप नागरिक पोर्टल एवं सीईआईआर पोर्टल के माध्यम से मोबाइल ब्लॉक करने, उसकी लोकेशन ट्रैक करने तथा पुनः प्राप्त करने की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया।
कार्यक्रम में यातायात थाना नागौर से कानिस्टेबल गणेशाराम, आईटीआई नागौर के प्राचार्य एवं संस्थान के अधिकारी-कर्मचारी भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों ने सड़क सुरक्षा और साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक रहने का संकल्प लिया।
