साइबर ठगी रोकने से लेकर हर वर्ग तक ऋण पहुंचाने पर मंथन, SLBC की 170वीं बैठक में बैंकिंग क्षेत्र का रोडमैप तैयार

 

मुख्य सचिव बोले- क्रेडिट ग्रोथ के साथ वित्तीय समावेशन पर भी दें जोर; 3,400 से ज्यादा जागरूकता शिविरों में 70 हजार ग्राहकों तक पहुंचा ‘स्मार्ट बैंकिंग एवं सेफ बैंकिंग 2.0’ अभियान

✍️राकेश मीणा

जयपुर। स्मार्ट हलचल|राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (SLBC), राजस्थान की 170वीं बैठक गुरुवार को जयपुर में हुई। बैठक में प्रदेश में बढ़ते साइबर अपराध, बैंकिंग क्षेत्र की सुरक्षा, वित्तीय समावेशन, वार्षिक साख योजना, सरकारी योजनाओं में ऋण वितरण और विकसित राजस्थान-2047 के लक्ष्यों को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक की सह-अध्यक्षता SLBC अध्यक्ष एवं बैंक ऑफ बड़ौदा के कार्यपालक निदेशक संजय वी. मुदालियर तथा राजस्थान सरकार के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने की।

बैठक में केंद्र एवं राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ भारतीय रिजर्व बैंक, नाबार्ड, राजस्थान पुलिस की साइबर अपराध शाखा तथा प्रदेश के विभिन्न बैंकों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

साइबर अपराध बैंकिंग क्षेत्र के लिए बड़ी चुनौती

SLBC अध्यक्ष संजय वी. मुदालियर ने कहा कि साइबर अपराध बैंकिंग क्षेत्र के लिए लगातार बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। साइबर ठगी से बचाव के लिए बैंकिंग सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने के साथ ग्राहकों को जागरूक करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि बैंक अधिकारी और कर्मचारी भी साइबर अपराध के नए तरीकों के प्रति लगातार अपडेट रहें, ताकि ग्राहकों के साथ होने वाली धोखाधड़ी को समय रहते रोका जा सके।

उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में SLBC राजस्थान की ओर से साइबर जागरूकता को लेकर कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए। 21 जुलाई को सचिवालय जयपुर में विशेष बैठक आयोजित की गई। इसके अलावा 1930 साइबर क्राइम हेल्पलाइन कॉल सेंटर का दौरा कर साइबर शिकायतों की स्थिति और उनके निस्तारण की प्रक्रिया को समझा गया।

3,400 से अधिक शिविर, 70 हजार ग्राहकों को जागरूक किया

बैठक में बताया गया कि ‘स्मार्ट बैंकिंग एवं सेफ बैंकिंग 2.0’ अभियान के तहत प्रदेशभर में 3,400 से अधिक जागरूकता शिविर आयोजित किए गए। इन शिविरों के माध्यम से करीब 70 हजार ग्राहकों तक पहुंचकर उन्हें सुरक्षित बैंकिंग, साइबर धोखाधड़ी से बचाव और सावधानी बरतने के बारे में जानकारी दी गई।

SLBC अध्यक्ष ने सभी बैंकों से इस अभियान को और प्रभावी बनाने तथा ग्राहकों को डिजिटल बैंकिंग के साथ-साथ साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करने का आग्रह किया।

ई-धरती से जुड़ा ULI, ऑनलाइन आसान होंगी ऋण संबंधी प्रविष्टियां

बैठक में बैंकिंग और भूमि अभिलेखों से जुड़ी एक महत्वपूर्ण पहल की भी जानकारी दी गई। बताया गया कि राजस्थान सरकार ने आरबीआई के सहयोग से यूनिफाइड लेंडिंग इंटरफेस (ULI) को ई-धरती पोर्टल से जोड़ा है। इससे भूमि अभिलेखों में ऋण से संबंधित प्रविष्टियों की प्रक्रिया ऑनलाइन और अधिक सरल होने की उम्मीद है।

इस पहल से ऋण प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ने के साथ बैंक और संबंधित विभाग भूमि अभिलेखों की जानकारी को अधिक सुगमता से देख सकेंगे।

विकसित राजस्थान-2047 के चार स्तंभों पर जोर

मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने बैठक में साइबर धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि साइबर अपराध पर प्रभावी रोकथाम के लिए बैंकों और पुलिस सहित सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है।

उन्होंने विकसित राजस्थान-2047 के विजन के चार प्रमुख स्तंभों—गरीब, युवा शक्ति, नारी शक्ति और अन्नदाता—को ध्यान में रखते हुए प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाओं और ऋण की पहुंच बढ़ाने पर जोर दिया।

मुख्य सचिव ने कहा कि बैंकों का लक्ष्य केवल क्रेडिट ग्रोथ बढ़ाना नहीं होना चाहिए। प्रदेश के ऐसे वर्गों तक भी संस्थागत वित्तीय सेवाएं पहुंचनी चाहिए, जो अभी बैंकिंग व्यवस्था से पूरी तरह नहीं जुड़ पाए हैं। उन्होंने वित्तीय समावेशन को मजबूत करने के लिए बैंकों को सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

वार्षिक साख योजना और अटल पेंशन योजना की सराहना

SLBC राजस्थान की संयोजक एवं बैंक ऑफ बड़ौदा की महाप्रबंधक परिमिता मिश्रा ने वार्षिक साख योजना और अटल पेंशन योजना में बेहतर प्रदर्शन करने वाले बैंकों की सराहना की। उन्होंने बैंकों से वित्त वर्ष 2026-27 की आगामी तिमाहियों में भी इसी गति को बनाए रखने की अपील की।

उन्होंने कहा कि वित्तीय समावेशन और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक पात्र लोगों तक पहुंचाने के लिए बैंक स्तर पर लगातार निगरानी और बेहतर समन्वय जरूरी है।

राज कुमार मीणा ने रखा बैंकों के प्रदर्शन का तुलनात्मक ब्यौरा

बैठक में बैंक ऑफ बड़ौदा के उप महाप्रबंधक एवं प्रमुख (SLBC) राज कुमार मीणा ने राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति के सदस्य बैंकों के निर्धारित लक्ष्यों के मुकाबले व्यावसायिक प्रदर्शन का तुलनात्मक प्रस्तुतिकरण दिया।

राज कुमार मीणा ने विभिन्न बैंकों की प्रगति, निर्धारित लक्ष्यों और उपलब्धियों से संबंधित आंकड़ों को बैठक के समक्ष रखा। उन्होंने बैंकिंग क्षेत्र से संबंधित राज्य सरकार के पास लंबित मुद्दों पर भी चर्चा की और विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत प्रदेश में हुई प्रगति की जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में वित्तीय समावेशन को मजबूत करने के लिए बैंकिंग संस्थाओं को आपसी समन्वय के साथ काम करने की आवश्यकता है। साथ ही साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए बैंक कर्मचारियों और ग्राहकों दोनों को लगातार जागरूक किया जाना जरूरी है।

आरबीआई और साइबर क्राइम शाखा ने दी प्रस्तुति

बैठक में भारतीय रिजर्व बैंक और राजस्थान पुलिस की साइबर अपराध शाखा की ओर से भी प्रस्तुतियां दी गईं। वित्तीय समावेशन, डिजिटल बैंकिंग और साइबर धोखाधड़ी की रोकथाम से जुड़े विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।

बैठक में डॉ. देबाशीष पुष्टी, अतिरिक्त सचिव, वित्तीय सेवाएं विभाग, वित्त मंत्रालय, भारत सरकार; नीलाभ सक्सेना, आयुक्त उद्योग विभाग, राजस्थान सरकार; विजय कुमार सिंह, अतिरिक्त महानिदेशक साइबर अपराध, राजस्थान पुलिस; सत्येंद्र कुमार, सीईओ RITI; शांतनु कुमार सिंह, उप महानिरीक्षक साइबर अपराध; धनपत राज, पुलिस अधीक्षक साइबर अपराध; रंजीव शंकर, क्षेत्रीय निदेशक, भारतीय रिजर्व बैंक जयपुर; डॉ. आर. रवि बाबू, मुख्य महाप्रबंधक, नाबार्ड जयपुर सहित केंद्र एवं राज्य सरकार के अधिकारी तथा विभिन्न बैंकों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

बैठक के अंत में उपस्थित अधिकारियों, बैंक प्रतिनिधियों एवं अन्य प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया गया। बैठक का आयोजन राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति, बैंक ऑफ बड़ौदा, अंचल कार्यालय, जयपुर की ओर से किया गया।