ग्रामीण उद्यमों से डिजिटल खदानों तक नए सौपान से हिंदुस्तान जिंक में महिलाएं रच रही आज़ादी के किर्तीमान

सखी पहल के माध्यम से 25 हजार से अधिक ग्रामीण महिलाएं बचत, ऋण, कौशल और आजीविका के अवसरों से जुड़ीं।

ओम जैन

शंभूपुरा।स्मार्ट हलचल|देश अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है, इन वर्षाे में हिंदुस्तान जिंक ने महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है। कंपनी एक ओर ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार और उद्यमिता के अवसर एवं आधुनिक माइंस और स्मेल्टर्स में महिलाओं को तकनीक आधारित नेतृत्व भूमिकाओं में आगे बढ़ा कर नए सौपान रच रही है तो साथ ही ये महिलाएं अपनी उपलब्धियों से आजादी के किर्तीमान भी स्थापित कर रही है।
हिंदुस्तान जिंक की आधुनिक और तकनीक-संचालित माइंस एवं स्मेल्टर्स में महिला इंजीनियर, ऑपरेटर और तकनीकी विशेषज्ञ एआई, ऑटोमेशन और डिजिटलीकरण जैसे उन्नत क्षेत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा रही हैं। यह प्रयास आर्थिक स्वतंत्रता से लेकर नेतृत्व तक महिलाओं को सशक्त बनाने की कंपनी की सोच को दर्शाता है।
हिंदुस्तान जिंक की प्रमुख ‘सखी’ पहल के तहत 25 हजार से अधिक ग्रामीण महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ चुकी हैं। इन समूहों के माध्यम से उन्हें बचत, ऋण, उद्यमिता प्रशिक्षण और आजीविका के अवसर मिल रहे हैं। सखी उत्पादन समिति से जुड़ी फरजाना इसका एक प्रेरणादायक उदाहरण हैं। उन्होंने घरेलू श्रम कार्य से आगे बढ़कर परिधानों और एफएमसीजी उत्पाद निर्माण में अपना स्थान बनाया और आज लगभग 3.47 लाख रुपये वार्षिक आय अर्जित कर रही हैं। कोविड-19 के दौरान उनकी इकाई ने कपड़े के मास्क बनाकर न केवल अपनी आय बनाए रखी, बल्कि समाज की भी महत्वपूर्ण जरूरत पूरी की।
हिंदुस्तान जिंक के सीईओ अमरेंदु प्रकाश ने कहा कि, स्वतंत्रता ने हमें एक राष्ट्र के रूप में अपना भविष्य गढ़ने की आजादी दी, जबकि आर्थिक स्वतंत्रता प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जिंदगी को बेहतर बनाने की ताकत देती है। हिंदुस्तान जिंक में हम मानते हैं कि हमारी जिम्मेदारी केवल आर्थिक मूल्य सृजित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि ऐसे अवसर सृजित करना भी है जो लोगों को आगे बढ़ने में सहायक हो।
कंपनी की ‘समाधान’ पहल भी महिलाओं को कृषि और पशुपालन आधारित आजीविका को मजबूत बनाने में मदद कर रही है।
जहां ग्रामीण महिलाएं उद्यमिता और आजीविका के माध्यम से आर्थिक रूप से मजबूत बन रही हैं, वहीं हिंदुस्तान जिंक के कार्यस्थलों पर भी उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिल रहा है। कंपनी के कुल कार्यबल में 26.3 प्रतिशत महिलाएं हैं, जो भारत के मेटल एवं माइनिंग उद्योग में सबसे अधिक है। साथ ही, 62 प्रतिशत कर्मचारी 35 वर्ष से कम आयु के हैं, जिससे यह उद्योग के सबसे युवा और समावेशी कार्यबलों में शामिल है।
आज हिंदुस्तान जिंक में महिलाएं भूमिगत खदानों में काम कर रही हैं, भारी मशीनरी संचालित कर रही हैं, महत्वपूर्ण उत्पादन प्रक्रियाओं का प्रबंधन कर रही हैं, माइन रेस्क्यू टीमों का हिस्सा हैं और एआई, मशीन लर्निंग, ऑटोमेशन तथा डिजिटलीकरण जैसे उन्नत तकनीकी क्षेत्रों का नेतृत्व कर रही हैं।
देबारी जिंक स्मेल्टर में कार्यरत आईआईटी दिल्ली से स्नातक स्वप्निल थोरी, डिजिटलाइजेशन विभाग का नेतृत्व कर रही हैं। वह एआई और मशीन लर्निंग आधारित समाधानों के माध्यम से स्मेल्टर्स और पावर प्लांट्स में बदलाव ला रही हैं।
वेदांता समूह की कंपनी हिंदुस्तान जिंक शिक्षा, कौशल विकास, स्वास्थ्य, सामुदायिक विकास और महिलाओं के सशक्तीकरण जैसे क्षेत्रों में समावेशी विकास को बढ़ावा देने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। विकसित भारत 2047 की दिशा में बढ़ते हुए कंपनी यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि विकास के लाभ केवल उसके परिचालन तक सीमित न रहें, बल्कि समाज और समुदायों तक भी पहुंचें।