मधुर भजनों और प्रेरक प्रसंगों के माध्यम से दिया संस्कार, भक्ति और मानव जीवन का संदेश
जोगणिया माता
जोगणिया माता, स्मार्ट हलचल। श्रावण मास के पावन अवसर पर जोगणिया माता धाम स्थित विशाल रामलीला मैदान में बुधवार को संत श्री प्रेमनारायण जी महाराज (गेहूंखेड़ी) के सानिध्य में एक दिवसीय संगीतमय सत्संग एवं कथा का आयोजन हुआ। कथा में क्षेत्रभर से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं, माताओं, बहनों एवं बच्चों ने श्रद्धा और भक्ति भाव से अमृतमयी वाणी का श्रवण किया।
संत प्रेमनारायण जी महाराज ने मधुर भजनों, प्रेरक प्रसंगों और सरल दृष्टांतों के माध्यम से मानव जीवन की सार्थकता, प्रभु स्मरण, भक्ति और श्रेष्ठ संस्कारों का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि सत्संग में वही लोग पहुंचते हैं, जिन्हें स्वयं भगवान बुलाते हैं। संसार क्षणभंगुर है, जबकि ईश्वर का स्मरण ही मनुष्य के साथ अंत तक रहता है।
माताओं को दिए श्रेष्ठ संस्कारों के संदेश
कथा के दौरान संत श्री ने विशेष रूप से माताओं एवं बालिकाओं को संस्कारों का महत्व बताते हुए कहा कि मां ही बच्चे की प्रथम गुरु होती है। उन्होंने माताओं से बच्चों में अच्छे संस्कार, सेवा, सद्भाव और धार्मिक चेतना विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रेम में किसी विधि-विधान की आवश्यकता नहीं होती, केवल निष्काम भाव होना चाहिए।
भक्ति और सेवा का दिया संदेश
संत श्री ने श्रीमद्भगवद्गीता एवं रामायण की चौपाइयों का मधुर गायन करते हुए उपस्थित श्रद्धालुओं को धर्म, सेवा और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। कथा के दौरान भजनों और प्रवचनों पर श्रद्धालु भाव-विभोर होकर तालियों की गड़गड़ाहट से वातावरण को भक्तिमय बनाते रहे।
जोगणिया माता तीर्थ की सराहना
उन्होंने जोगणिया माता तीर्थ की व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कहा कि यहां गोशाला, वेद पाठशाला, नक्षत्र वाटिका तथा भव्य मंदिर परिसर धार्मिक और सांस्कृतिक चेतना का उत्कृष्ट केंद्र बन चुके हैं। उन्होंने जोगणिया माता धाम की उल्लेखनीय प्रगति की प्रशंसा करते हुए इसे एक भव्य तीर्थ के रूप में विकसित होने पर प्रसन्नता व्यक्त की।
कार्यक्रम के समापन पर संस्थान के अध्यक्ष सत्यनारायण जोशी ने संत प्रेमनारायण जी महाराज का सम्मान किया तथा भविष्य में भी नियमित रूप से कथा आयोजन का आग्रह किया। संत श्री ने भी समय मिलने पर पुनः कथा करने का आश्वासन दिया। कथा के उपरांत श्रद्धालुओं ने जोगणिया माता की आरती में भाग लेकर धर्मलाभ प्राप्त किया।
