देशभर से पहुंचे संत-महात्माओं ने संस्कृति संरक्षण और सामाजिक समरसता पर रखे विचार
नई दिल्ली।स्मार्ट हलचल|राजधानी दिल्ली के प्रतिष्ठित हॉलिडे इन होटल में आयोजित भव्य ‘संत संसद’ में देशभर से पहुंचे संत-महात्माओं, धर्माचार्यों और अखाड़ों के प्रतिनिधियों ने सनातन धर्म, भारतीय संस्कृति और राष्ट्रवाद को सशक्त बनाने के संकल्प के साथ गहन मंथन किया। कार्यक्रम में आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और राष्ट्र निर्माण के विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।
इस अवसर पर महंत लोकेश दास ने बताया कि संत संसद किसी राजनीतिक मंच का हिस्सा नहीं, बल्कि सनातन धर्म और राष्ट्रहित के लिए कार्य करने वाला एक वैचारिक एवं आध्यात्मिक मंच है। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य भारतीय संस्कृति की जड़ों को मजबूत करना, समाज को जागरूक करना और राष्ट्र के समक्ष उपस्थित चुनौतियों पर संत समाज के माध्यम से सकारात्मक दिशा प्रदान करना है।
महंत लोकेश दास ने कहा कि आज देश में सनातन संस्कृति को नई ऊर्जा देने की आवश्यकता है। संत समाज का दायित्व है कि वह समाज को जोड़ने, युवाओं को भारतीय संस्कारों से परिचित कराने और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण की दिशा में आगे आए। उन्होंने कहा कि संत संसद के माध्यम से धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा, गौसंरक्षण, सामाजिक समरसता, धर्मांतरण जैसे संवेदनशील विषयों पर गंभीर चर्चा कर ठोस प्रस्ताव पारित किए जाते हैं, जो केंद्र और राज्य सरकारों के लिए मार्गदर्शक बनते हैं।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि भारत की आत्मा उसकी सनातन संस्कृति में बसती है और जब तक यह संस्कृति सुरक्षित है, तब तक राष्ट्र की अस्मिता अक्षुण्ण रहेगी। संतों ने जातिगत भेदभाव से ऊपर उठकर एकजुटता का संदेश दिया और समाज के हर वर्ग को राष्ट्रहित में मिलकर कार्य करने का आह्वान किया।
संत संसद में देश-विदेश से आए हजारों संत-महात्माओं ने भारतीय संस्कृति के संरक्षण, धार्मिक स्थलों के विकास, युवा पीढ़ी को संस्कारवान बनाने तथा सामाजिक बुराइयों के उन्मूलन पर अपने विचार व्यक्त किए। इस दौरान राष्ट्रहित और धर्महित में कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव भी पारित किए गए।
महंत लोकेश दास ने कहा कि संत संसद केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि यह राष्ट्र निर्माण की दिशा में संत समाज का एक मजबूत संकल्प है। इससे नई पीढ़ी को सनातन मूल्यों से जोड़ने और भारतीय संस्कृति को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने कहा कि संत समाज सदैव राष्ट्र, धर्म और समाज के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध रहेगा। 
